केस एवं प्रक्रियात्मक सारांश (Case Matrix Overview)
| विधिक/प्रशासनिक बिंदु | विवरण (अगस्त 2026) |
| माननीय पीठ | न्यायमूर्ति अनिल क्षेत्रपाल एवं न्यायमूर्ति शैल जैन (दिल्ली उच्च न्यायालय) |
| विषय/कानून | Customs Act, 1962 – Section 127C (Procedure for disposal of settlement applications), Section 127C(8A), Section 127C(12) |
| मुख्य कानूनी सिद्धांत | कोरम के अभाव या संस्थागत अक्षमता के कारण सेटलमेंट बोर्ड द्वारा निर्णय न ले पाने की अवधि को वैधानिक समयावधि (Limitation) से बाहर रखा जाएगा; करदाता के वैधानिक अधिकार समाप्त नहीं होंगे। |
| अदालत का निर्णय | सेटलमेंट अर्जी को Abated मानने वाले आदेश रद्द; बोर्ड के बंद रहने की अवधि को सीमा अवधि से बाहर करने का आदेश। |
Custom Act: दिल्ली हाईकोर्ट ने सीमा शुल्क (Customs) सेटलमेंट मामलों में एक महत्वपूर्ण कानूनी व्यवस्था देते हुए माना है कि जिस अवधि के दौरान अंतरिम निपटान बोर्ड (Interim Board for Settlement) कोरम (Quorum) की कमी के कारण कार्य करने में असमर्थ रहा, उस अवधि को सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 की धारा 127C के तहत समय सीमा (Limitation Period) की गणना से बाहर (Exclude) रखा जाना चाहिए।
न्यायमूर्ति अनिल क्षेत्रपाल और न्यायमूर्ति शैल जैन की पीठ ने 4 अगस्त 2026 को दिए अपने फैसले में ‘अंतरिम निपटान बोर्ड’ द्वारा जारी उन आदेशों/संचारों को रद्द कर दिया, जिनके तहत याचिकाकर्ता की सेटलमेंट कार्यवाही को समय सीमा समाप्त होने के आधार पर ‘उपशमित’ (Abated – समाप्त) घोषित कर दिया गया था।
हाई कोर्ट की मुख्य व महत्वपूर्ण टिप्पणियां
- संस्थागत अक्षमता और नागरिक के अधिकार:“विधायिका के इस इरादे को स्वीकार करना कठिन है कि एक याचिकाकर्ता, जिसने अधिनियम के तहत उपलब्ध वैधानिक उपाय का लगन से पालन किया है और उस पर आयद प्रत्येक दायित्व को पूरा किया है, फिर भी केवल इसलिए उस वैधानिक उपाय को खो दे क्योंकि कार्यवाही तय करने के लिए सौंपा गया वैधानिक प्राधिकरण कार्य करने की कानूनी योग्यता ही खो चुका था।”
- ‘आदेश पारित न होने’ की परिभाषा: अदालत ने माना कि धारा 127C(8A) और 127C(12) के तहत “निर्धारित अवधि के भीतर कोई आदेश पारित न होना” की व्याख्या में ऐसी स्थिति शामिल नहीं हो सकती जहां वैधानिक कोरम के अभाव में स्वयं अंतरिम बोर्ड ही एक प्रभावी न्यायिक फोरम के रूप में अस्तित्वहीन हो गया हो।
मामला क्या था? (Case Background)
- मामले की पृष्ठभूमि और कोरम की कमी
- सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 की धारा 127C के तहत याचिकाकर्ता की सेटलमेंट अर्जी पर अंतिम सुनवाई पूरी हो चुकी थी और आदेश सुरक्षित रख लिया गया था।
- हालांकि, 30 सितंबर 2025 को अंतरिम बोर्ड के एक सदस्य के सेवानिवृत्त होने के बाद कोरम पूरा न होने से बोर्ड 1 अक्टूबर 2025 से कार्य करने में असमर्थ हो गया।
- विभाग (Revenue) का रुख और कार्यवाही की समाप्ति
- कोई निर्णय सुनाए बिना वैधानिक समय सीमा समाप्त हो जाने पर, बोर्ड ने माना कि धारा 127C(12) के तहत मामला स्वतः उपशमित (Abate) हो गया है।
- राजस्व विभाग का तर्क था कि तय समय सीमा समाप्त होते ही कानूनन मामला स्वतः समाप्त माना जाता है।
- अदालत का विश्लेषण
- कोर्ट ने कहा कि राजस्व विभाग की व्याख्या स्वीकार करने का मतलब होगा कि जब कोई कानूनी रूप से गठित बोर्ड ही मौजूद नहीं है, तब भी आवेदक के खिलाफ समय सीमा की उल्टी गिनती चलती रहे, जो पूरी तरह अनुचित है।
⚖️ हाई कोर्ट का अंतिम फैसला
दिल्ली उच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ता के पक्ष में फैसला सुनाते हुए निम्नलिखित निर्देश दिए।
- समयावधि का बहिष्करण (Exclusion of Limitation Period): कोर्ट ने घोषित किया कि 1 अक्टूबर 2025 (जब कोरम की कमी से बोर्ड गैर-कार्यात्मक हुआ) से लेकर इस फैसले की तारीख तक की पूरी अवधि को सीमा शुल्क अधिनियम की धारा 127C(8A) व 127C(12) के तहत सीमा अवधि की गणना से पूरी तरह बाहर (Exclude) रखा जाएगा।
- आदेश रद्द: बोर्ड द्वारा कार्यवाही समाप्त/उपशमित (Abated) घोषित करने वाले संचारों को रद्द कर दिया गया और बोर्ड को पुनर्गठित होकर मामले पर निर्णय लेने का निर्देश दिया गया।

