Thursday, September 24, 2026
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BANK SARFAESI Act: गंजे भी हेयरकट चाहते हैं…डिफॉल्टर्स पर सख्त टिप्पणी; बैंक की संपत्ति बेचने की याचिका खारिज, ₹5 लाख का जुर्माना

केस एवं प्रक्रियात्मक सारांश (Case Matrix Overview)

विधिक/प्रशासनिक बिंदुविवरण (2026)
माननीय पीठन्यायमूर्ति रवि कृष्ण कपूर एवं न्यायमूर्ति चैताली चटर्जी (दास) [कलकत्ता उच्च न्यायालय]
पक्षकारसाउथ इंडियन बैंक बनाम प्रोपेलो इनोवेशंस प्राइवेट लिमिटेड व अन्य
संबंधित कानूनSARFAESI Act, 2002 (Section 13(2), Section 17) एवं RBI Guidelines
मुख्य कानूनी सिद्धांतसरफेसी अधिनियम के तहत DRT में उपाय उपलब्ध होने पर रिट याचिका विचारणीय नहीं है; बैंक को दरकिनार कर अपनी संपत्ति बेचने या अनधिकृत OTS की मांग करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है।
अदालत का निर्णयएकल पीठ का आदेश रद्द; कर्जदारों की याचिका खारिज व ₹5 लाख का जुर्माना।

BANK SARFAESI Act: कलकत्ता हाईकोर्ट की खंडपीठ ने साउथ इंडियन बैंक (South Indian Bank) से कर्ज लेकर डिफॉल्ट करने वाले उधारकर्ताओं (Borrowers) द्वारा बैंक के हस्तक्षेप के बिना अपनी अचल संपत्तियों को बेचने के बार-बार किए गए प्रयासों पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की है।

न्यायमूर्ति रवि कृष्ण कपूर और न्यायमूर्ति चैताली चटर्जी (दास) की खंडपीठ ने एकल पीठ के उस आदेश को रद्द करते हुए यह फैसला सुनाया, जिसने बैंक की रिकवरी कार्यवाही पर रोक लगा दी थी। कोर्ट ने कर्जदारों पर ₹5,00,000 (5 लाख रुपये) का भारी जुर्माना भी लगाया। अदालत ने इसे “व्यावसायिक रूप से अदूरदर्शी” (Commercially Imprudent) और “शरारतपूर्ण” (Mischievous) करार दिया।

हाई कोर्ट की मुख्य व तीखी टिप्पणियां

  • ‘हेयरकट’ और अनुबंध दायित्वों पर टिप्पणी:“साझा समाज में जहां कानून का शासन चलता है, नागरिकों को अपने द्वारा सोच-समझकर स्वीकार की गई संविदात्मक प्रतिबद्धताओं (Contractual Obligations) का पालन करना चाहिए। विसंगतियां अब एक सामान्य नियम बन गई हैं। और ‘अब तो गंजे भी हेयरकट (Haircut/कर्ज माफी) चाहते हैं’, जो व्यवस्था उन्हें खुशी-खुशी प्रदान कर देती है।”
  • ईज ऑफ डूइंग बिजनेस बनाम फ्रॉड:“मंत्र ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ (Ease of Doing Business) का होना चाहिए, न कि ‘ईज ऑफ डूइंग फ्रॉड’ (Ease of Doing Fraud) का। अंततः इसका नुकसान केवल ‘हम भारत के लोग’ को ही उठाना पड़ता है।”
  • OTS (एकमुश्त समाधान) कोई मौलिक अधिकार नहीं: अदालत ने कहा कि एकमुश्त समाधान (One Time Settlement – OTS) प्राप्त करने का कोई निहित या वैधानिक अधिकार (Vested Right) नहीं होता है, खासकर तब जब उधारकर्ता बार-बार चूक (Default) करता रहा हो।

मामला क्या था? (Case Background)

  1. कर्ज का पुनर्गठन और NPA घोषणा
    • ‘प्रोपेलो इनोवेशंस प्राइवेट लिमिटेड’ (Propello Innovations Pvt. Ltd.) और उसके निदेशकों ने 2013 में साउथ इंडियन बैंक से ₹10 करोड़ से अधिक की ऋण सुविधाएं ली थीं। कोविड-19 और अन्य कारणों से 2020 में खातों का पुनर्गठन (Restructuring) किया गया।
    • बकाया राशि न चुकाने और शर्तों के उल्लंघन पर बैंक ने जुलाई 2024 में खातों को NPA घोषित कर दिया और अगस्त 2024 में सरफेसी अधिनियम (SARFAESI Act) की धारा 13(2) के तहत नोटिस जारी किया।
  2. एकल पीठ का आदेश और कानूनी विवाद
    • उधारकर्ताओं ने हाई कोर्ट की एकल पीठ के समक्ष रिट याचिका दायर कर तर्क दिया कि बैंक द्वारा लगाया गया दंडात्मक ब्याज (Penal Interest) RBI की ‘फेयर लैंडिंग प्रैक्टिस’ दिशानिर्देशों का उल्लंघन है।
    • एकल पीठ ने इस आधार पर बैंक के खिलाफ फैसला दिया था। हालांकि, अपील के दौरान RBI ने स्पष्ट किया कि 18 अगस्त 2023 वाले उन दिशानिर्देशों को 28 नवंबर 2025 से वापस ले लिया गया था और उन्हें नए नियमों में मिला दिया गया था।
  3. वैकल्पिक वैधानिक उपाय (Alternative Statutory Remedy)
    • खंडपीठ ने माना कि चूंकि उधारकर्ता पहले ही ऋण वसूली न्यायाधिकरण (DRT) के समक्ष धारा 17 के तहत मामला ले जा चुके थे, इसलिए रिट याचिका पोषणीय (Maintainable) ही नहीं थी। संसद द्वारा सरफेसी अधिनियम (SARFAESI Act) जैसी विशिष्ट संस्था बनाए जाने के बाद हाई कोर्ट को असाधारण रिट क्षेत्राधिकार का उपयोग नहीं करना चाहिए।

⚖️ हाई कोर्ट का अंतिम फैसला

कलकत्ता हाई कोर्ट ने एकल पीठ का फैसला रद्द करते हुए बैंक की अपील स्वीकार कर ली और निम्नलिखित आदेश दिए।

  1. रिट याचिका खारिज: कर्जदारों की रिट याचिका खारिज कर दी गई और सभी मुख्य मुद्दों पर निर्णय लेने का अधिकार DRT (Debts Recovery Tribunal) के पास छोड़ दिया गया।
  2. ₹5 लाख का जुर्माना: बैंक का समय बर्बाद करने और वैधानिक प्रक्रिया को बाधित करने के लिए उधारकर्ताओं पर ₹5,00,000 का हर्जाना लगाया गया, जो 8 सप्ताह के भीतर बैंक को चुकाना होगा। न चुकाने पर इसे बैंक के बकाये में जोड़ दिया जाएगा।

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