केस एवं प्रक्रियात्मक सारांश (Overview Matrix)
| प्रशासनिक/विधिक बिंदु | विवरण (August 2026) |
| माननीय पीठ | CJI सूर्य कांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना (सर्वोच्च न्यायालय) |
| विषय | मणिपुर जातीय हिंसा 2023 से संबंधित CBI और NIA मुकदमों की सुनवाई एवं पुनर्वास |
| प्रस्तावित उपाय | CBI और NIA मुकदमों की दैनिक सुनवाई (Day-to-day trial) हेतु 2 समर्पित एक्सक्लूसिव ट्रायल कोर्ट। |
| जांच की स्थिति | CBI: 31 में से 27 मामलों में रिपोर्ट दाखिल (22 चार्जशीट, 5 क्लोजर)। NIA: 30 में से 15 मामलों में चार्जशीट दाखिल। |
| अन्य निर्देश | गुवाहाटी हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार से स्टेटस रिपोर्ट तलब; 296 धार्मिक संपत्तियों पर अतिक्रमण की जांच के निर्देश। |
Need Of Exclusive Trial Courts: सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2023 में हुई मणिपुर जातीय हिंसा से जुड़े आपराधिक मामलों की त्वरित और निर्बाध सुनवाई के लिए दो अलग-अलग विशेष अदालतें (Exclusive Trial Courts) स्थापित करने का सुझाव दिया है। ये अदालतें केवल केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) द्वारा जांच किए गए मुकदमों की ही सुनवाई करेंगी।
मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने सीबीआई और एनआईए द्वारा की जा रही जांच और मामलों की प्रगति की समीक्षा करते हुए यह निर्देश दिया।
CJI सूर्य कांत ने सुनवाई के दौरान चिंता व्यक्त करते हुए कहा: हमारी मुख्य चिंता यह है कि क्या वर्तमान में मणिपुर हिंसा से जुड़े सीबीआई और एनआईए के मामलों को संभालने वाले विशेष न्यायाधीश केवल इन्हीं मुकदमों को देख रहे हैं या वे अन्य सामान्य मामलों की भी सुनवाई कर रहे हैं। अदालत ने गुवाहाटी उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल (Registrar General) को इस संबंध में अगली सुनवाई से पहले स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है।
CBI और NIA जांच की अद्यतन स्थिति (Investigation Status)
केंद्र सरकार की ओर से पेश अपर सॉलिसिटर जनरल (ASG) ऐश्वर्या भाटी ने कोर्ट को जांच की अद्यतन स्थिति से अवगत कराया।
- CBI मामलों की स्थिति (कुल 31 मामले)
- सीबीआई ने 27 मामलों में फाइनल रिपोर्ट (Final Reports) दाखिल कर दी है।
- इनमें से 22 मामलों में चार्जशीट और 5 मामलों में क्लोजर रिपोर्ट (Closure Reports) दाखिल की गई है।
- 22 में से 20 चार्जशीट वाले मामलों में अदालतों ने संज्ञान (Cognizance) ले लिया है।
- 4 मामलों में जांच अभी भी जारी है।
- सीबीआई के सभी मामले गुवाहाटी की अदालतों में स्थानांतरित (Transfer) किए जा चुके हैं।
- NIA मामलों की स्थिति (कुल 30 मामले)
- एनआईए को सौंपे गए 30 मामलों में से 15 मामलों में चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है, जबकि 15 मामलों में जांच जारी है।
- जिन 15 मामलों में चार्जशीट दाखिल हुई है, उनमें से 7 मामलों में आरोप (Charges) तय किए जा चुके हैं।
- एनआईए के मामलों में से 2 दिल्ली में, 5 गुवाहाटी में और 8 मणिपुर की स्थानीय अदालतों में लंबित हैं।
🏛️ सुप्रीम कोर्ट के प्रमुख निर्देश
- सुरक्षा एवं निर्बाध जांच
- सुप्रीम कोर्ट ने राज्य और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों को निर्देश दिया कि वे मणिपुर में कानून-व्यवस्था की स्थिति को सुचारू बनाएं ताकि CBI और NIA बिना किसी बाधा के अपनी जांच जारी रख सकें।
- पीड़ितों और वकीलों को पारदर्शी जानकारी
- अदालत ने निर्देश दिया कि मुकदमों के केस नंबर और उनकी वर्तमान स्थिति (Status of Proceedings) का पूरा विवरण संकलित कर पीड़ित परिवारों और उनके वकीलों को उपलब्ध कराया जाए।
- पुनर्वास और मुआवजे की समीक्षा (Rehabilitation)
- कोर्ट ने पाया कि मकान पुनर्नियोजन (House Reconstruction) के लिए चिन्हित ~7,000 लाभार्थियों में से 4,000 से अधिक लोगों को धन वितरित किया जा चुका है, और PMAY-G योजना के तहत 12,000 से अधिक मकानों को मंजूरी दी गई है।
- हालांकि, पीड़ित पक्षों के इस दावे पर कि लगभग 24,000 परिवार अभी भी लाभ से वंचित हैं, कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित 3-सदस्यीय समिति को इन दावों का सत्यापन करने का निर्देश दिया।
- पूजा स्थलों पर अतिक्रमण (Encroachment on Places of Worship)
- पीठ ने समिति को निर्देश दिया कि वह पूजा स्थलों से जुड़ी 276 संपत्तियों और 20 चर्चों पर अतिक्रमण के दावों की राजस्व रिकॉर्ड के आधार पर जांच करे और यह सुनिश्चित करे कि कोई नया अतिक्रमण न हो।
पृष्ठभूमि (Case Background)
- हिंसा का कारण: मणिपुर हिंसा की शुरुआत मैतेई (Meitei) समुदाय को अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा देने की मांग का कुकी-जो (Kuki-Zo) समुदायों द्वारा विरोध करने से हुई थी।
- मणिपुर हाई कोर्ट का विवादित आदेश: 19 अप्रैल 2023 को मणिपुर हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को मैतेई समुदाय को एसटी सूची में शामिल करने पर विचार करने का निर्देश दिया था, जिसके बाद राज्य में व्यापक जातीय हिंसा भड़क उठी। (वर्ष 2024 में हाई कोर्ट ने अपने इस विवादित आदेश के उस हिस्से को वापस ले लिया था)।
- सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप: दो महिलाओं को निर्वस्त्र घुमाने का वीडियो वायरल होने के बाद सर्वोच्च न्यायालय ने मामले का स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लिया था और तब से पीड़ितों के पुनर्वास, सुरक्षा और निष्पक्ष आपराधिक जांच की निगरानी कर रहा है।

