कानूनी एवं नीतिगत सारांश (Overview Matrix)
| प्रशासनिक/विधिक बिंदु | विवरण (August 2026) |
| याचिकाकर्ता | कर्नाटक राज्य सरकार |
| अदालत | सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court of India) |
| चुनौतीपूर्ण फैसला | कर्नाटक हाई कोर्ट (डिवीजन बेंच) का जनवरी 2026 का निर्णय |
| संबंधित कानून | Motor Vehicles Act, 1988, कर्नाटक एग्रीगेटर रूल्स 2016, एवं गिग वर्कर वेलफेयर एक्ट 2025 |
| मुख्य कानूनी मुद्दे | 1. क्या मोटरसाइकिल ‘Motor Cab’ या ‘Contract Carriage’ की श्रेणी में आती है? 2. सुरक्षा, महिला सुरक्षा और बीमा फ्रेमवर्क के बिना वाणिज्यिक बाइक-टैक्सी की अनुमति दी जा सकती है या नहीं? |
| वर्तमान स्थिति | राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में SLP दायर की है; सुनवाई स्थगित करने हेतु पत्र दिया गया। |
Passenger-Safety Features: कर्नाटक सरकार ने राज्य में बाइक-टैक्सी (Bike Taxis) सेवाओं के संचालन और पंजीकरण को हरी झंडी दिखाने वाले कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।
सुप्रीम कोर्ट में दायर अपनी विशेष अनुमति याचिका (SLP) में राज्य सरकार ने तर्क दिया है कि मोटरसाइकिलों में ऑटोरिक्शा या कैब की तरह आवश्यक यात्री-सुरक्षा सुविधाएं (Passenger-Safety Features) नहीं होती हैं। इसके व्यावसायिक उपयोग से सड़क दुर्घटनाओं, बीमा कवर, ट्रैफिक जाम, प्रदूषण और विशेष रूप से महिलाओं की सुरक्षा (Women’s Safety) को लेकर गंभीर चिंताएं खड़ी होती हैं।
🏛️ कर्नाटक सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दिए गए मुख्य तर्क
- सुरक्षा, दुर्घटनाएं और महिलाओं की सुरक्षा
- राज्य सरकार ने कहा कि दोपहिया वाहन दुर्घटनाओं के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील होते हैं।
- “मोटरसाइकिलों में सुरक्षा सुविधाओं का अभाव है, जिससे दुर्घटनाओं की स्थिति में मृत्यु या गंभीर चोट लगने पर पर्याप्त बीमा कवरेज और महिला यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े गंभीर मुद्दे पैदा होते हैं।”
- रोजी-रोटी पर पूरी तरह से प्रतिबंध नहीं
- सरकार ने स्पष्ट किया कि बाइक-टैक्सी पर रोक से राइडर्स की आजीविका पर पूर्ण प्रतिबंध (Blanket Ban) नहीं लगता। वे Swiggy, Zomato, Amazon और Flipkart जैसे प्लेटफॉर्म्स के जरिए डिलीवरी और लॉजिस्टिक्स सेवाओं में काम करना जारी रख सकते हैं।
- इसके अतिरिक्त, वे ‘कर्नाटक प्लेटफॉर्म-बेस्ड गिग वर्कर्स (सोशल सिक्योरिटी एंड वेलफेयर) एक्ट, 2025’ के तहत सामाजिक सुरक्षा और कल्याणकारी योजनाओं के दायरे में आते हैं।
- मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) का दायरा
- राज्य ने तर्क दिया कि मोटर वाहन अधिनियम, 1988 के तहत किसी भी श्रेणी के वाहन को टैक्सी के रूप में चलाने का कोई निरपेक्ष या मौलिक अधिकार नहीं है।
- ‘कॉन्ट्रैक्ट कैरिज परमिट’ (Contract-Carriage Permit) देना परिवहन अधिकारियों का विवेकाधिकार (Discretion) है, जो जनसुरक्षा के आधार पर इसे खारिज कर सकते हैं।
- सरकार ने 18 मार्च 2026 को राज्यसभा में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के उस जवाब का भी हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि मोटर वाहन कानून में ‘बाइक टैक्सी’ शब्द को परिभाषित ही नहीं किया गया है।
- पर्यावरण और यातायात प्रबंधन
- याचिका में अनुमान लगाया गया है कि बाइक-टैक्सी के अत्यधिक संचालन को सीमित करने से सालाना लगभग 1.39 मिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) के उत्सर्जन को रोका जा सकता है, साथ ही सार्वजनिक परिवहन प्रणाली को मजबूत किया जा सकता है।
मामले की पृष्ठभूमि (Case Background)
- सिंगल बेंच का फैसला
- कर्नाटक हाई कोर्ट के एकल न्यायाधीश (Single Judge) ने पहले आदेश दिया था कि जब तक राज्य सरकार बाइक टैक्सी की अनुमति देने वाली कोई नीति/नियम लागू नहीं करती, तब तक सेवाओं पर रोक रहेगी।
- डिवीजन बेंच (Division Bench) का निर्णय (जनवरी 2026)
- Ola, Uber, Rapido और बाइक टैक्सी वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा दायर अपीलों पर सुनवाई करते हुए डिवीजन बेंच ने पाबंदी हटा दी थी।
- हाई कोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया था कि वे मोटरसाइकिलों को परिवहन वाहनों (Transport Vehicles) के रूप में पंजीकृत करने और उन्हें बाइक टैक्सी के रूप में चलाने के परमिट देने के आवेदनों पर विचार करें। हाई कोर्ट ने इसे संविधान के अनुच्छेद 19(1)(g) के तहत वैध व्यवसाय माना था।
- सुप्रीम कोर्ट में चुनौती
- कर्नाटक सरकार ने डिवीजन बेंच के इसी फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। (मामले में 11 अगस्त को सुनवाई संभावित थी, लेकिन राज्य द्वारा स्थगन हेतु पत्र प्रसारित किया गया है)।

