सारांश मैट्रिक्स (Case Matrix)
| बिंदु | विवरण |
| माननीय अदालत | मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय (इंदौर पीठ) |
| न्यायाधीश | न्यायमूर्ति संदीप एन. भट |
| मुख्य कानूनी आधार | मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (MTP) एक्ट, 1971 एवं POCSO नियम, 2020 |
| गर्भपात की समयावधि | 24 सप्ताह तक (1 डॉक्टर 20 सप्ताह तक, 2 डॉक्टर 20-24 सप्ताह तक) |
| मुख्य निर्णय | 24 सप्ताह तक के गर्भपात के लिए कोर्ट की मंजूरी (Court Approval) की जरूरत नहीं; अस्पताल सीधे प्रक्रिया पूरी करें। |
Termination of Pregnancy: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (Madhya Pradesh High Court) की इंदौर पीठ ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में यह स्पष्ट किया है कि 24 सप्ताह तक के गर्भ को समाप्त कराने (Termination of Pregnancy) के लिए बलात्कार और यौन उत्पीड़न की पीड़िताओं को कोर्ट की मंजूरी या कानूनी प्रक्रिया अपनाने की कोई आवश्यकता नहीं है।
न्यायमूर्ति संदीप एन. भट की एकल पीठ ने 16 वर्षीय बलात्कार पीड़िता के पिता द्वारा दायर एक रिट याचिका को खारिज (Dismiss) करते हुए यह व्यवस्था दी। इसके साथ ही अदालत ने राज्य स्वास्थ्य विभाग के आयुक्त को निर्देश दिया कि वे इस संबंध में जारी पूर्व न्यायिक आदेश को सभी सरकारी एवं निजी अस्पतालों में प्रसारित करें ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति में पीड़िताओं को परेशानी न हो।
⚖️ मामले की पृष्ठभूमि (Case Background)
- याचिकाकर्ता का पक्ष: 16 वर्षीय नाबालिग पीड़िता के पिता ने उच्च न्यायालय का रुख कर 18 सप्ताह के अनचाहे गर्भ को समाप्त करने के लिए न्यायिक अनुमति मांगी थी। पीड़िता का तर्क था कि यौन उत्पीड़न के कारण वह अत्यधिक मानसिक आघात (Mental Trauma) से गुजर रही है और इस गर्भावस्था को जारी नहीं रखना चाहती।
- अदालत का फैसला: कोर्ट ने याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि इस मामले में न्यायिक अनुमति की आवश्यकता ही नहीं है, क्योंकि कानून पहले से ही इसकी अनुमति देता है।
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के प्रमुख विधिक बिंदु
- MTP अधिनियम, 1971 के तहत कानूनी अधिकार
- अदालत ने जबलपुर पीठ द्वारा दिए गए 20 फरवरी 2025 के पूर्व निर्णय का हवाला दिया।
- 20 सप्ताह तक का गर्भ: किसी एक पंजीकृत चिकित्सा व्यवसायी (Registered Medical Practitioner) द्वारा समाप्त किया जा सकता है।
- 20 से 24 सप्ताह का गर्भ: दो पंजीकृत चिकित्सा व्यवसायियों (Registered Medical Practitioners) की सहमति से कानून के तहत समाप्त किया जा सकता है।
- संविधान का अनुच्छेद 226: बलात्कार या यौन उत्पीड़न की पीड़िताओं को 24 सप्ताह तक के गर्भपात के लिए संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालय का रुख करने की आवश्यकता नहीं है।
- POCSO नियम, 2020 का संदर्भ
- अदालत ने प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंसेस (POCSO) नियम, 2020 के नियम 6(3) का उल्लेख किया।
- इसके तहत आपातकालीन चिकित्सा देखभाल या गर्भपात सेवा प्रदान करते समय कोई भी डॉक्टर, अस्पताल या मेडिकल सेंटर पीड़िता से कानूनी/मैजिस्ट्रेटी मांग (Legal or Magisterial Requisition) या अन्य औपचारिक दस्तावेजों की मांग नहीं कर सकता।
- प्रशासनिक निर्देश
- स्वास्थ्य विभाग के आयुक्त को निर्देश दिया गया कि वे इस संबंध में एक स्पष्ट गाइडलाइन सभी अस्पतालों में भेजें, जिससे अस्पतालों में बिना वजह पीड़िताओं को कोर्ट का चक्कर काटने के लिए बाध्य न किया जाए।
मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (MTP) संशोधन अधिनियम, 2021
भारत में मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (MTP) संशोधन अधिनियम, 2021 महिलाओं के प्रजनन अधिकारों और सुरक्षित गर्भपात (Abortion Rights) की दिशा में एक बड़ा बदलाव है। यह कानून 1971 के पुराने अधिनियम में संशोधन करके लागू किया गया।
मुख्य संशोधनों की तुलना (MTP Act 1971 बनाम 2021)
| प्रावधान | MTP अधिनियम, 1971 | MTP संशोधन अधिनियम, 2021 |
| गर्भावधि की ऊपरी सीमा | 20 सप्ताह | 24 सप्ताह (विशेष श्रेणियों के लिए) |
| डॉक्टरों की सहमति (0–20 सप्ताह) | 12 सप्ताह तक 1 डॉक्टर, 12-20 सप्ताह के लिए 2 डॉक्टर | 20 सप्ताह तक केवल 1 पंजीकृत डॉक्टर (RMP) की राय |
| डॉक्टरों की सहमति (20–24 सप्ताह) | लागू नहीं (अनुमति नहीं थी) | 2 पंजीकृत डॉक्टरों (RMPs) की सहमति |
| वैवाहिक स्थिति का दायरा | केवल विवाहित महिलाएं (गर्भनिरोधक विफलता पर) | अविवाहित और एकल महिलाएं भी शामिल |
| 24 सप्ताह के बाद गर्भपात | अनुमति नहीं | गंभीर भ्रूण असामान्यताओं के मामले में मेडिकल बोर्ड की मंजूरी पर संभव |
MTP संशोधन अधिनियम, 2021 के प्रमुख बिंदु
- 24 सप्ताह तक की विशेष श्रेणियाँ: रेप पीड़िताएँ, अनाचार (Incest) की शिकार, नाबालिग, दिव्यांग महिलाएँ, और वैवाहिक स्थिति में अचानक बदलाव (जैसे विधवा होना या तलाक) का सामना करने वाली महिलाएँ 20 से 24 सप्ताह के बीच गर्भपात करा सकती हैं।
- अविवाहित महिलाओं को अधिकार: पुराने कानून में केवल “पति या पत्नी” के बीच गर्भनिरोधक विफलता को आधार माना गया था। 2021 संशोधन में इसे बदलकर “महिला और उसके साथी” कर दिया गया, जिससे अविवाहित महिलाओं को भी सुरक्षित और कानूनी गर्भपात का अधिकार मिला।
- राज्य स्तरीय मेडिकल बोर्ड: 24 सप्ताह के बाद यदि भ्रूण में गंभीर शारीरिक या मानसिक असामान्यताएँ पाई जाती हैं, तो राज्य द्वारा गठित चार-सदस्यीय मेडिकल बोर्ड (स्त्री रोग विशेषज्ञ, बाल रोग विशेषज्ञ, रेडियोलॉजिस्ट आदि) की मंजूरी से गर्भपात कराया जा सकता है।
- कठोर गोपनीयता नियम: गर्भपात कराने वाली किसी भी महिला का नाम, पता या व्यक्तिगत विवरण केवल कानून द्वारा अधिकृत व्यक्ति को ही दिया जाएगा। इसका उल्लंघन करने पर 1 साल तक की जेल या जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।
- सहमति (Consent) का नियम: यदि महिला वयस्क (18 वर्ष या उससे अधिक) और मानसिक रूप से स्वस्थ है, तो गर्भपात के लिए केवल उसकी स्वयं की सहमति ही काफी है। पति या परिवार के अन्य सदस्यों की अनुमति कानूनी रूप से अनिवार्य नहीं है।
अदालत का मुख्य संदेश
बलात्कार और यौन उत्पीड़न की पीड़िताओं को समय पर चिकित्सा सेवा पाना उनका कानूनी अधिकार है। अस्पतालों को बिना वजह अदालती आदेश की मांग कर पीड़िता के इलाज में देरी नहीं करनी चाहिए।

