Friday, August 14, 2026
HomeLaworder HindiFilthy Verbal Blows: पति ने पत्नी को कहा 'बांझ'; इस पर पत्नी...

Filthy Verbal Blows: पति ने पत्नी को कहा ‘बांझ’; इस पर पत्नी बोली -तुम तो ‘नपुंसक’ हो…यह बहस हाई कोर्ट की चौखट पर पहुंची, जानिए रोचक केस

मामला सारांश (At a Glance)

पहलूविवरण
माननीय न्यायाधीशन्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ला (Justice Indrajeet Shukla)
संबंधित धाराएंIPC की धारा 498A (क्रूरता) एवं धारा 504 (अपमान)
मुख्य सिद्धांतआपसी तीखी बहस में तंज कसना या ‘बांझ/नपुंसक’ कहना बिना गंभीर खतरे के 498A नहीं बनाता।
हाई कोर्ट का फैसलापति के खिलाफ दर्ज आपराधिक शिकायत और समनिंग आदेश पूरी तरह रद्द।

Filthy Verbal Blows: इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने वैवाहिक विवाद से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि पति-पत्नी के बीच बहस के दौरान एक-दूसरे पर की गई अभद्र टिप्पणियां या तंज कसना अपने आप में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 498A (क्रूरता) का अपराध नहीं बनाता।

न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ला (Justice Indrajeet Shukla) की एकल पीठ ने पति के खिलाफ निचली अदालत (लखनऊ) में लंबित आपराधिक शिकायत और समनिंग आदेश को रद्द करते हुए कहा कि वैवाहिक मतभेदों से पैदा होने वाली सभी समस्याओं का हल आपराधिक मुकदमा चलाना नहीं है।

Filthy Verbal Blows: हाई कोर्ट की प्रमुख और सख्त टिप्पणियां

  1. ‘बांझ’ कहना संवेदनहीन, लेकिन स्वतः 498A के तहत क्रूरता नहीं:“शिकायतकर्ता को ‘बांझ औरत’ कहना निस्संदेह संवेदनहीन और निंदनीय है, लेकिन यह टिप्पणी स्वतः धारा 498A IPC के तहत क्रूरता के आवश्यक तत्वों को आकर्षित नहीं करती। ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है कि यह बात शिकायतकर्ता को आत्महत्या के लिए उकसाने या उसके जीवन, अंग अथवा शारीरिक या मानसिक स्वास्थ्य को गंभीर खतरा पहुंचाने के इरादे से कही गई थी।”
  2. दोनों पक्षों की ओर से अमर्यादित तीखी बहस (Filthy Verbal Blows):
    • कोर्ट ने पाया कि जब पति और उसके रिश्तेदारों ने महिला को ‘बांझ’ कहा, तो प्रतिक्रिया स्वरूप महिला ने भी पति को ‘नपुंसक’ कहा।
    • पीठ ने कहा: “निःसंतान होने को लेकर ताने मारना, मेडिकल जांच कराने से इनकार करना या इस तरह के घरेलू विवाद से उत्पन्न मौखिक बहसों को, जब तक कि धारा 498A के आवश्यक घटक पूरे न हों, क्रूरता का अपराध नहीं माना जा सकता।”
  3. IPC 498A हर वैवाहिक असहमति के लिए नहीं:“आपराधिक मुकदमा वैवाहिक विवादों से उत्पन्न होने वाली सभी समस्याओं की रामबाण दवा (Panacea) नहीं है। धारा 498A का उद्देश्य हर वैवाहिक असहमति या घरेलू अनबन को आपराधिक रूप देना नहीं था।”
  4. दहेज मांग और मारपीट के साक्ष्य नहीं:
    • अदालत ने माना कि शिकायत में दहेज की मांग का एक भी शब्द नहीं था और आरोप सामान्य व गोलमोल (General and Omnibus) थे। साथ ही, मारपीट के दावों का समर्थन करने के लिए कोई मेडिकल रिपोर्ट पेश नहीं की गई थी।

मामले की पृष्ठभूमि और कोर्ट का अंतिम फैसला

  • विवाद की वजह: दंपत्ति के बीच बच्चा न होने के कारण गहरे मतभेद और हताशा थी, जिसके कारण दोनों पक्षों की ओर से आरोप-प्रत्यारोप और गाली-गलौज हुई।
  • निचली अदालत का समन: पत्नी की शिकायत पर लखनऊ की अदालत ने पति को समन जारी किया था, जिसे पति ने वकील शोभित सिंह के माध्यम से हाई कोर्ट में चुनौती दी थी।
  • अंतिम निर्णय: हाई कोर्ट ने माना कि शिकायत में लगाए गए आरोप आपराधिक क्रूरता या धारा 504 (शांति भंग करने के इरादे से अपमान) के तत्वों को पूरा नहीं करते। अदालत ने पति के खिलाफ चल रही पूरी आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया।

RELATED ARTICLES

Most Popular

Patna
overcast clouds
31 ° C
31 °
31 °
79 %
3.1kmh
100 %
Fri
31 °
Sat
36 °
Sun
35 °
Mon
29 °
Tue
31 °