Friday, September 25, 2026
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AI Photo: यह मामला केवल एक महिला का नहीं बल्कि देश के प्रधानमंत्री से जुड़ा है; यदि वे संवेदनशील नहीं हैं, तो मैं सुनिश्चित करूंगा कि वे संवेदनशील बनें

अदालत की मुख्य टिप्पणियां (Judicial Remarks)

  1. मामले की संवेदनशीलता पर कोर्ट का रुख: सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति गिरीश कथपालिया ने टिप्पणी की:“यह एक असाधारण स्थिति है जिसमें मामला केवल एक महिला का नहीं है, यह देश के प्रधानमंत्री से भी जुड़ा हुआ विषय है। यदि वे (आरोपी) संवेदनशील नहीं हैं, तो मैं सुनिश्चित करूंगा कि वे संवेदनशील बनें।”
  2. महिला को तत्काल पुलिस सुरक्षा (Police Protection): याचिकाकर्ता के वकील द्वारा दुष्कर्म, एसिड अटैक और जान से मारने की धमकियां मिलने की बात कहे जाने पर कोर्ट ने निर्देश दिया कि महिला का पता सार्वजनिक नहीं किया जाएगा। स्थानीय सब-इंस्पेक्टर और SHO को सीधे महिला की सुरक्षा सुनिश्चित करने के आदेश दिए गए हैं।
  3. Meta और सोशल मीडिया को निर्देश: हाईकोर्ट ने Meta को सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों और सहायक लिंक्स/मिरर साइट्स से इस डीपफेक फोटो, वीडियो और आपत्तिजनक सामग्री को तुरंत हटाने (Takedown) का आदेश दिया है।
  4. दिल्ली पुलिस को एक हफ्ते में रिपोर्ट देने का आदेश: दिल्ली पुलिस द्वारा FIR दर्ज किए जाने की जानकारी देने के बाद कोर्ट ने निर्देश दिया कि इस मामले में की गई कार्रवाई की स्टेटस रिपोर्ट एक हफ्ते के भीतर दाखिल की जाए।

नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय राजधानी के जंतर-मंतर पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के विरोध प्रदर्शन के दौरान एक महिला की तस्वीर का चेहरा बदलकर (Face-swapping) भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बनाई गई अश्लील व आपत्तिजनक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) डीपफेक तस्वीर के प्रदर्शन और सोशल मीडिया पर प्रसार पर अत्यंत कड़ा रुख अपनाया है।

मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की खंडपीठ द्वारा मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए तत्काल सुनवाई की अनुमति दिए जाने के बाद, न्यायमूर्ति गिरीश कठपालिया की एकल पीठ ने 25 सितंबर 2026 को इस याचिका पर अत्यावश्यक सुनवाई की। अदालत ने सीजेपी नेताओं—सौरव दास, अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और रत्ना सिंह—को औपचारिक नोटिस जारी किया और दिल्ली पुलिस को एक सप्ताह के भीतर विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया। उच्च न्यायालय ने सोशल मीडिया दिग्गज मेटा (Meta Platforms) को अपनी सभी सेवाओं से आपत्तिजनक सामग्री को तत्काल प्रभाव से हटाने (Takedown) का आदेश दिया है और दिल्ली पुलिस को पीड़िता को पूर्ण सुरक्षा मुहैया कराने का निर्देश दिया है।

सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय की तीखी टिप्पणियां

1. ‘यह मामला देश के प्रधानमंत्री से जुड़ा है’: न्यायमूर्ति गिरीश कठपालिया

सुनवाई के समापन पर न्यायमूर्ति गिरीश कठपालिया ने मामले की असाधारण गंभीरता को रेखांकित करते हुए मौखिक रूप से दर्ज किया: “यह एक असाधारण स्थिति (Extraordinary position) है, जिसमें मामला केवल एक महिला का नहीं है, बल्कि यह देश के प्रधानमंत्री से जुड़ा मामला है। यदि वे (जिम्मेदार पक्ष) संवेदनशील नहीं हैं, तो मैं यह सुनिश्चित करूंगा कि वे संवेदनशील बनें।”

2. सिविल बनाम आपराधिक क्षेत्राधिकार और पीड़िता की सुरक्षा

  • अदालत ने प्रारंभिक टिप्पणी में कहा कि तस्वीरों को हटवाने (Takedown) की सामान्य राहत सिविल कोर्ट या दीवानी पीठ के दायरे में आती है, परंतु मामले की अमानवीयता और संवेदनशीलता को देखते हुए अदालत तकनीकी प्रक्रियाओं में पीड़िता को नहीं उलझाएगी:“यह राहत सिविल बेंच के समक्ष जानी चाहिए थी। परंतु इस मामले की संवेदनशीलता और भयावहता को देखते हुए, हम पीड़िता को एक अदालत से दूसरी अदालत तक भागने पर मजबूर नहीं कर सकते।”
  • पहचान व पते की गोपनीयता: अदालत ने विशेष निर्देश दिया कि अदालती रिकॉर्ड या आदेशों में पीड़िता का पता सार्वजनिक न किया जाए। पीड़िता का पता सीधे संबंधित क्षेत्र के सब-इंस्पेक्टर और थाना प्रभारी (SHO) को साझा किया जाएगा, जो व्यक्तिगत रूप से महिला की शारीरिक सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे।

3. राजनीतिक प्रदर्शनों में हर्जाने (Compensation) का सिद्धांत

  • सुनवाई के दौरान पीठ ने याचिकाकर्ता के वकील से पूछा कि क्या उन्होंने मुआवजे की भी मांग की है। अदालत ने याद दिलाया:“क्या आपने हर्जाने की मांग की है? मुझे एक न्यायिक आदेश स्मरण है जिसमें कहा गया था कि जब भी राजनीतिक दल या संगठन प्रदर्शन करते हैं और उस दौरान कानून का उल्लंघन या किसी को नुकसान पहुंचता है, तो वे हर्जाना देने के लिए उत्तरदायी होंगे।”

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मामले की तथ्यात्मक पृष्ठभूमि एवं याचिका के गंभीर आरोप

  • जंतर-मंतर पर CJP का प्रदर्शन:
    • याचिका के अनुसार, जंतर-मंतर पर आयोजित प्रदर्शन के दौरान प्रतिवादियों (CJP नेताओं और कार्यकर्ताओं) ने याचिकाकर्ता महिला की निजी तस्वीर को उसकी सहमति के बिना हासिल किया।
    • इसके बाद AI फेस-स्वैपिंग और डीपफेक तकनीक का उपयोग कर उसका चेहरा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ एक बेहद आपत्तिजनक, अश्लील और अशोभनीय तस्वीर में मॉर्फ कर दिया गया।
  • बैनर लहराना, नारेबाजी और पॉर्न साइट्स पर अपलोडिंग:
    • याचिका में आरोप लगाया गया है कि इस मॉर्फ की गई तस्वीर के बड़े-बड़े भौतिक बैनर (Banners) छपवाए गए, भारी भीड़ के सामने लहराए गए और यौन रूप से अपमानजनक व भद्दी नारेबाजी की गई।
    • इस पूरे कृत्य की वीडियो रिकॉर्डिंग कर इंस्टाग्राम और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर वायरल किया गया।
    • याचिकाकर्ता का आरोप है कि इसके बाद इन गैर-सहमति वाली अश्लील तस्वीरों को विभिन्न अश्लील (Pornographic) वेबसाइटों और मिरर डोमेन पर भी अपलोड कर दिया गया।
  • दुष्कर्म व तेजाब हमले की धमकियां:
    • सोशल मीडिया पर तस्वीरें वायरल होने के बाद पीड़िता को लगातार गैंगरेप, एसिड अटैक और जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं, जिसके कारण वह अपने ही घर में कैद रहने को मजबूर हो गई है।
  • 24 सितंबर को एफआईआर: पीड़िता द्वारा 23 सितंबर को शिकायत दिए जाने के बाद, दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल/साइबर पुलिस स्टेशन ने 24 सितंबर को भारतीय न्याय संहिता (BNS) और आईटी एक्ट की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की। हालांकि, सामग्री को तुरंत इंटरनेट से न हटाए जाने के कारण महिला ने उच्च न्यायालय का रुख किया।

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उच्च न्यायालय के प्राथमिक अंतरिम निर्देश

  1. मेटा (Meta) को तत्काल टेकडाउन का आदेश: मेटा प्लेटफॉर्म्स को निर्देश दिया गया कि वह इंस्टाग्राम, फेसबुक आदि से संबंधित आपत्तिजनक डीपफेक तस्वीरों, वीडियो और लिंक्स को तुरंत ब्लॉक और डिलीट करे।
  2. पुलिस सुरक्षा: दिल्ली पुलिस को पीड़िता को तत्काल और पुख्ता सुरक्षा प्रदान करने का आदेश दिया गया।
  3. एक सप्ताह में स्टेटस रिपोर्ट: दिल्ली पुलिस के अतिरिक्त स्थायी वकील (ASC) को निर्देश दिया गया कि वे 1 सप्ताह के भीतर मामले में की गई ठोस कानूनी कार्रवाई का ब्योरा देते हुए स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करें।
  4. नोटिस जारी: CJP नेताओं सौरव दास, अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और रत्ना सिंह को याचिका पर नोटिस जारी किया गया।

विधिक विवरण

  • केस संदर्भ: पीड़िता बनाम राज्य (NCT दिल्ली), मेटा प्लेटफॉर्म्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, सौरव दास, अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका व अन्य [W.P.(Crl.) – दिल्ली उच्च न्यायालय]
  • विधिक प्रतिनिधित्व:
    • याचिकाकर्ता (महिला) की ओर से: अधिवक्ता उमेश चंद्र शर्मा
    • दिल्ली पुलिस की ओर से: अतिरिक्त स्थायी वकील (ASC)
  • प्रासंगिक कानून एवं विधिक धाराएं:
    • सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (IT Act, 2000) की धारा 66E (निजता का उल्लंघन), धारा 67/67A (इलेक्ट्रॉनिक रूप में अश्लील व लैंगिक रूप से स्पष्ट सामग्री का प्रकाशन व प्रसारण)
    • सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 का नियम 3(2)(b) (बिना सहमति के नग्नता/डीपफेक/मॉर्फ सामग्री की शिकायत पर 24 घंटे के भीतर अनिवार्य टेकडाउन)
    • भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) की धारा 75 (यौन उत्पीड़न), धारा 79 (महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाना), धारा 351/352 (आपराधिक धमकी) एवं धारा 356 (मानहानि)
    • भारत का संविधान – अनुच्छेद 21 (गरिमापूर्ण जीवन, निजता और शारीरिक सुरक्षा का मौलिक अधिकार)
  • संबद्ध न्यायिक सिद्धांत व नजीरें:
    • के.एस. पुट्टास्वामी बनाम भारत संघ (2017, सुप्रीम कोर्ट 9-जज संविधान पीठ) — ‘निजता, व्यक्तिगत स्वायत्तता और किसी व्यक्ति की छवि का अधिकार (Right to Image & Persona) अनुच्छेद 21 के तहत संरक्षित मौलिक अधिकार हैं।’
    • एक्स बनाम यूट्यूब एलएलसी व अन्य (दिल्ली उच्च न्यायालय) — ‘बिना सहमति के किसी महिला की अश्लील या डीपफेक सामग्री इंटरनेट पर अपलोड होने पर मध्यवर्तियों (Intermediaries) का यह वैधानिक दायित्व है कि वे उसे वैश्विक स्तर पर तुरंत ब्लॉक करें।’
  • पीठ: न्यायमूर्ति गिरीश कठपालिया (दिल्ली उच्च न्यायालय) [रोस्टर रेफरेंस: मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय एवं न्यायमूर्ति तेजस कारिया]
  • अगली कार्यवाही: दिल्ली पुलिस द्वारा 1 सप्ताह के भीतर स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की जाएगी।

AI Photo:मामले का विवरण (At a Glance)

विवरणजानकारी
संबंधित अदालतदिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court)
न्यायाधीशन्यायमूर्ति गिरीश कथपालिया (Justice Girish Kathpalia)
याचिकाकर्तापीड़ित महिला (प्रतिनिधित्व: एडवोकेट उमेश चंद्र शर्मा)
आरोपी/प्रतिवादीCJP कार्यकर्ता सौरभ दास, अभिजीत दिपके, आशुतोष रंका, रत्ना सिंह, दिल्ली पुलिस और Meta
मुख्य आदेशआपत्तिजनक AI कंटेंट का तत्काल टेकडाउन, दिल्ली पुलिस द्वारा सुरक्षा और FIR पर स्टेटस रिपोर्ट
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