Monday, May 18, 2026
HomeSupreme CourtArrest Case: न आरोपी फायदा ले- मशीनरी भी मनमानी न करे…सुप्रीम कोर्ट...

Arrest Case: न आरोपी फायदा ले- मशीनरी भी मनमानी न करे…सुप्रीम कोर्ट की गिरफ्तारी मामले पर टिप्पणी

Arrest Case: सुप्रीम कोर्ट ने कहा, राज्य की मशीनरी अपनी शक्तियों का दुरुपयोग न करे और आरोपी भी उसकी टिप्पणियों का फायदा उठाकर छूट न जाए, इन दोनों के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है।

कई कानूनी सवालों पर फैसला सुरक्षित रखा…

न्यायमूर्ति बी. आर. गवई और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ इस बात पर विचार कर रही थी कि क्या हर मामले में यहां तक कि पूर्ववर्ती भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत आने वाले अपराधों में भी गिरफ्तारी से पहले या तुरंत बाद गिरफ्तारी के आधारों को आरोपी को बताना आवश्यक है या नहीं। सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति गवई ने कहा, “हम संतुलन बनाना चाहते हैं। एक ओर हम नहीं चाहते कि मशीनरी अपनी शक्तियों का दुरुपयोग करे, और दूसरी ओर हम यह भी नहीं चाहते कि आरोपी हमारी किसी टिप्पणी का लाभ उठाकर छूट जाए।” शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि एक और प्रश्न यह उठता है कि क्या गिरफ्तारी अमान्य मानी जाएगी यदि किसी असाधारण स्थिति में, किसी आपातकाल के चलते, गिरफ्तारी से पहले या तुरंत बाद आरोपी को गिरफ्तारी के आधार बताना संभव न हो पाए। पीठ ने इन कानूनी सवालों पर फैसला सुरक्षित रख लिया है।

सुनवाई के दौरान पीठ के यह रहे सवाल

सुनवाई के दौरान पीठ ने यह सवाल उठाया कि क्या किसी ऐसे आरोपी को, जिसे रंगे हाथों पकड़ा गया हो, गिरफ्तारी के आधारों की जानकारी देने से संबंधित कोर्ट की टिप्पणियों का लाभ मिलना चाहिए? पीठ ने पूछा, “क्या हमें सभी ज़मीनी सच्चाइयों को भूल जाना चाहिए?” पीठ ने यह भी इंगित किया कि उसकी कुछ पिछली टिप्पणियों का दुरुपयोग भी हुआ है। याचिकाकर्ताओं में से एक के वकील ने दलील दी कि आरोपी को गिरफ्तारी के आधार बताना बेहद ज़रूरी है क्योंकि कानून में यह माना जाता है कि जब तक अदालत दोषी न ठहराए, तब तक व्यक्ति निर्दोष है।

आरोपी को गिरफ्तारी के आधार बताने पर फरवरी में आया था फैसला

फरवरी में, सुप्रीम कोर्ट ने एक अलग फैसले में कहा था कि आरोपी को गिरफ्तारी के आधार बताना सिर्फ औपचारिकता नहीं बल्कि एक “अनिवार्य संवैधानिक आवश्यकता” है। कोर्ट ने कहा था कि अगर पुलिस इस आवश्यकता का पालन नहीं करती है, तो यह संविधान के अनुच्छेद 22 के तहत आरोपी के मौलिक अधिकार का उल्लंघन माना जाएगा। पिछले साल मई में सुप्रीम कोर्ट ने न्यूज़क्लिक के संस्थापक प्रभीर पुरकायस्थ की गिरफ्तारी को “अमान्य” घोषित किया था और उनकी रिहाई का आदेश दिया था। उन्हें गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत दर्ज एक मामले में गिरफ्तार किया गया था। अपने फैसले में कोर्ट ने कहा था कि UAPA या अन्य अपराधों के तहत गिरफ्तार किसी भी व्यक्ति को गिरफ्तारी के आधारों के बारे में लिखित रूप से जानकारी देना उसका मौलिक और वैधानिक अधिकार है।

पीठ बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेशों से उत्पन्न तीन अलग-अलग याचिकाओं की सुनवाई कर रही थी।

  • पहली: जुलाई 2024 के BMW हिट-एंड-रन मामले के एक आरोपी द्वारा दायर की गई थी, जिसमें मुंबई में एक महिला की मौत हो गई थी। आरोपी ने नवंबर 2024 के हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उसकी गिरफ्तारी को अवैध घोषित करने की याचिका खारिज कर दी गई थी। आरोपी ने हाईकोर्ट में गिरफ्तारी से पहले गिरफ्तारी के आधार न बताए जाने का मुद्दा उठाया था।
  • दूसरी: एक महिला द्वारा दायर की गई याचिका थी, जो उस किशोर की मां है, जो मई 2024 में पुणे में हुई पोर्शे कार दुर्घटना में कथित रूप से शामिल था, जिसमें दो लोगों की मौत हो गई थी। महिला पर आरोप है कि उसने कथित रूप से किशोर के खून के नमूनों से छेड़छाड़ की ताकि यह साबित किया जा सके कि दुर्घटना के समय वह नशे में नहीं था। उसने हाईकोर्ट के उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जिसमें गिरफ्तारी के आधारों से जुड़े मुद्दों पर विचार के लिए याचिकाओं के एक समूह को बड़ी पीठ के पास भेजा गया था।
  • तीसरी: याचिका में भी इसी तरह हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें याचिकाओं के एक समूह को बड़ी पीठ के पास भेजने का आदेश दिया गया था।
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Patna
haze
35 ° C
35 °
35 °
59 %
3.1kmh
0 %
Mon
44 °
Tue
43 °
Wed
45 °
Thu
46 °
Fri
45 °

Recent Comments