Bihar Police Torture: पटना हाईकोर्ट ने अपने कड़े रुख ने साफ कर दिया है कि खाकी वर्दी की आड़ में होने वाली कस्टोडियल हिंसा और दलितों के दमन को अदालतें मूकदर्शक बनकर नहीं देखेंगी।
पुलिस और स्थानीय प्रशासन के कस्टोडियल टॉर्चर और गुमशुदगी के मामले पर पर्दा डाला गया
हाईकोर्ट के जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद और जस्टिस कुमार मनीष की खंडपीठ ने इस मामले में दायर हेबियस कॉर्पस (बंदी प्रत्यक्षीकरण) याचिका पर सुनवाई करते हुए जांच एजेंसी की नीयत पर गंभीर सवाल उठाए हैं। पुलिस और स्थानीय प्रशासन एक कस्टोडियल टॉर्चर (Custodial Torture) और गुमशुदगी के मामले पर पर्दा डालने में जुटे थे। लेकिन पटना उच्च न्यायालय (Patna High Court) की लगातार फटकार और सख्त निगरानी का नतीजा है कि घटना के करीब 10 महीने बाद 5 आबकारी अधिकारियों (Excise Personnel) और 2 ड्राइवरों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है।
…वो 13 अगस्त की शाम
इस कस्टोडियल टॉर्चर के दौरान पीड़ित ने अपने परिजन से कहा, मुझे अब फोन मत करो… आबकारी पुलिस (Excise Police) मुझे बहुत बुरी तरह पीट रही है।” 13 अगस्त की शाम एक दलित युवक की अपने परिवार को की गई यह आखिरी बदहवास कॉल थी, जिसने पूरे परिवार की रूह कंपा दी। इसके बाद से युवक का कोई सुराग नहीं मिला।
मामला क्या है?: दुबई से लौटा था घर, आबकारी रेड के बाद से लापता
यह दर्दनाक मामला बिहार के भोजपुर (आरा) जिले के बिहिया इलाके का है।
पीड़ित की पृष्ठभूमि: 31 वर्षीय सनोज कुमार (दलित समुदाय) पेशे से राजमिस्त्री थे। वह 2024 के अंत में दुबई से लौटे थे ताकि अपनी पत्नी और तीन साल के बेटे के साथ गांव में रह सकें। जब वह लापता हुए, तब उनकी पत्नी गर्भवती थीं।
13 अगस्त की शाम: सनोज ने शाम 6 बजे अपने पिता को फोन कर कहा कि वह बेटे के लिए कुछ सामान लेकर जल्द घर आ रहे हैं। कुछ ही देर बाद उन्होंने फोन कर बताया कि बिहिया के पास एक अवैध शराब ठिकाने पर आबकारी विभाग की छापेमारी (Excise Raid) के दौरान उन्हें हिरासत में ले लिया गया है।
आखिरी कॉल और लापता: जब बड़े भाई ने दोबारा सनोज को फोन किया, तो सनोज रो रहे थे और उन्होंने कहा कि पुलिस उन्हें बुरी तरह पीट रही है, इसलिए फोन न करें। उसके बाद से उनका फोन हमेशा के लिए स्विच ऑफ हो गया।
पुलिस का ढुलमुल रवैया और कोर्ट में बेनकाब हुआ झूठ
सनोज के पिता गौरी शंकर राम ने बिहिया थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई, लेकिन पुलिस और आबकारी विभाग लगातार कहानी बदलते रहे।
झूठी कहानियां: आबकारी थाने ने पहले कहा कि किसी को हिरासत में नहीं लिया गया। बाद में उन्होंने माना कि तीन लोगों को पकड़ा गया था, लेकिन “एक आरोपी गाड़ी का पिछला दरवाजा खोलकर भाग गया।”
मोबाइल लोकेशन ने खोली पोल: अदालत की जांच के दौरान जब सनोज के दो मोबाइल फोन की लोकेशन निकाली गई, तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ। गायब सनोज के फोन का टावर लोकेशन जगदीशपुर आबकारी पुलिस स्टेशन के भीतर आ रहा था। बाद में गिरफ्तार अधिकारियों ने कबूल किया कि उन्होंने सनोज का फोन अपने पास ही रख लिया था।
CCTV फुटेज से खुली झूठ की कलई: हाई कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी में नोट किया कि रेड के दौरान इस्तेमाल की गई गाड़ी पूरी तरह से बंद बोलेरो (Enclosed Bolero) थी। कोर्ट ने कहा, “ऐसी गाड़ी से किसी का कूदकर भाग जाना तब तक मुमकिन नहीं है, जब तक कि पीछे का दरवाजा अंदर या बाहर से जानबूझकर खोला न जाए।”
पटना हाई कोर्ट की तल्ख टिप्पणी: आप जांच नहीं, आरोपियों की मदद कर रहे हैं
30 जून को हुई सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने भोजपुर पुलिस और पहले जांच अधिकारी (IO) की कार्यप्रणाली पर गहरा असंतोष व्यक्त किया। “पहले आईओ और फिर जगदीशपुर थाने के एसएचओ ने जिस तरह से जांच की है, उस पर हम अपनी कड़ी नाराजगी दर्ज करते हैं। जांच एजेंसी इतनी कछुआ गति से आगे बढ़ रही है, जिससे इस अदालत को यह आभास होता है कि वे पीड़ितों को न्याय दिलाने के बजाय केवल संदिग्ध और आरोपी अधिकारियों की मदद कर रहे हैं। अदालत के इसी दबाव के बाद, भोजपुर पुलिस ने मामले में शामिल निम्नलिखित 7 लोगों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा।
यह है 7 लोग, जिन्हें गिरफ्तार कर जेल भेजा
- आबकारी विभाग: सहायक उप-निरीक्षक (ASI) धीरज कुमार और राज कुमार।
- होमगार्ड: धर्मेंद्र पासवान, उमेश कुमार यादव और राजू कुमार सिंह।
- निजी स्टाफ: आबकारी विभाग की गाड़ियों के दो ड्राइवर— सुरेंद्र कुमार सिंह और विकास कुमार।
इन सभी अधिकारियों को विभागीय रूप से सस्पेंड (Suspended) भी कर दिया गया है।
‘कस्टोडियल मर्डर’ की आशंका और एक परिवार की तबाही
सनोज के भाइयों राकेश और निरंजन को डर है कि कस्टडी में बर्बर पिटाई के कारण सनोज की मौत हो चुकी है और पुलिस ने उनकी लाश को कहीं गायब कर दिया है। परिवार महीनों तक हर उस जगह लावारिस लाशें ढूंढने जाता रहा, जहां से भी कोई सूचना मिलती थी। इस भयावह त्रासदी का असर सनोज के परिवार पर बेहद दर्दनाक रहा। सनोज के गायब होने के सदमे में उनकी गर्भवती पत्नी का गर्भपात (Miscarriage) हो गया, क्योंकि उन्होंने रो-रोकर खाना-पीना छोड़ दिया था। सनोज ने घर बनाने के लिए साहूकारों से ₹50,000 का कर्ज लिया था, जिसकी किस्तें चुकाने के लिए भाइयों के पास अब काम पर लौटने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है। हाई कोर्ट ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पीड़ित परिवार को पुलिस सुरक्षा (Protection) प्रदान करने का आदेश दिया है।
केस शीट: पटना उच्च न्यायालय – बंदी प्रत्यक्षीकरण (2026)
| कानूनी और प्रशासनिक श्रेणियां | उच्च न्यायालय की विधिक स्थिति और निर्देश |
| संबंधित अदालत | पटना उच्च न्यायालय (Patna High Court) |
| माननीय न्यायाधीश | जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद और जस्टिस कुमार मनीष (खंडपीठ) |
| पीड़ित/लापता व्यक्ति | सनोज कुमार (31 वर्ष, दलित समुदाय, भोजपुर) |
| दायर याचिका | हेबियस कॉर्पस (Habeas Corpus – शव/व्यक्ति को पेश करने की मांग) |
| गिरफ्तारियां (जुलाई 2026) | 2 आबकारी एएसआई, 3 होमगार्ड और 2 प्राइवेट ड्राइवर (कुल 7 गिरफ्तार) |
| अदालत का अगला कदम | आरोपियों की पुलिस रिमांड लेकर सच उगलवाने और लापता युवक को खोजने का निर्देश। |

