Friday, June 12, 2026
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Caste Lines: जजों को भी नहीं बख्शता जातिवाद…जनता जाति से ऊपर उठकर वोट दे सकती है, क्या है हाईकोर्ट की टिप्पणी

Caste Lines: मद्रास हाई कोर्ट ने समाज में गहरे धंसे जातिवाद, ऑनर किलिंग(कथित सम्मान के नाम पर हत्या) और राजनीति में जाति के इस्तेमाल को लेकर एक बेहद गंभीर और आंखें खोलने वाला फैसला सुनाया है।

एक कथित ऑनर किलिंग मामले के आरोपी पिता की जमानत अर्जी मंजूर की

हाईकोर्ट के जस्टिस बी. पुगलेंदी की मदुरै पीठ ने यह टिप्पणियां तिरुनेलवेली में हुए एक कथित ऑनर किलिंग मामले के आरोपी पिता की जमानत अर्जी मंजूर करते हुए कीं। मद्रास हाई कोर्ट ने हाल ही में संपन्न हुए तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के ऐतिहासिक परिणामों का हवाला देते हुए कहा कि जनता को जाति या समुदाय की सीमाओं से परे जाकर उम्मीदवारों को चुनने के लिए राजी किया जा सकता है। राज्य में नवगठित सरकार काफी हद तक जाति के कारकों को शून्य (Nullify) करके सत्ता में आई है।

कोर्ट का दर्द…हम जजों को भी जाति के चश्मे से देखा जाता है

सुनवाई के दौरान जस्टिस पुगलेंदी ने समाज के शीर्ष स्तरों पर मौजूद जातिवादी मानसिकता पर गहरी चिंता और मलाल व्यक्त किया। उन्होंने कहा, आज हर कोई किसी न किसी रूप में जातिवाद का शिकार हो रहा है। यहां तक कि हम जज भी इससे अछूते नहीं हैं। हमारे द्वारा मेरिट (योग्यता और सबूतों) के आधार पर दिए जाने वाले अदालती आदेशों को भी लोग अपनी संकीर्ण मानसिकता के कारण जाति से जोड़कर देखने लगते हैं और फैसले के पीछे जातिगत उद्देश्य तलाशने लगते हैं। अदालत ने दुख जताते हुए कहा कि के. कामराज, पसुमपोन मुथुरामलिंग थेवर और वी.ओ. चिदंबरम जैसे देश और राज्य के महान स्वतंत्रता सेनानियों और नेताओं को भी आज कुछ लोगों और राजनीतिक दलों द्वारा केवल एक ‘खास जाति या समुदाय के नेता’ के रूप में समेटकर पेश किया जा रहा है।

मामला क्या था? (इंजीनियरिंग छात्र की कथित ऑनर किलिंग का केस)

यह कानूनी मामला एक दलित (Scheduled Caste) इंजीनियरिंग स्नातक कविन सेल्वागणेश की हत्या से जुड़ा हुआ है। कविन का याचिकाकर्ता के. सरवाणन की बेटी के साथ प्रेम संबंध था।

आरोप: पुलिस के अनुसार, इस रिश्ते से नाराज होकर लड़की के भाई (सुरजीत) और परिवार ने कविन की हत्या कर दी। पिता सरवाणन पर आरोप था कि उन्होंने कथित तौर पर वारदात के बाद अपने बेटे की भागने में मदद की थी।

हाई कोर्ट का रुख: सरवाणन पिछले 10 महीनों से जेल में थे। हाई कोर्ट ने पाया कि मामले की मुख्य जांच पूरी हो चुकी है, चार्जशीट दाखिल है और मुख्य मुकदमे की कार्यवाही पर फिलहाल रोक लगी हुई है। अदालत ने कहा कि उपलब्ध रिकॉर्ड्स यह मानने के लिए पर्याप्त नहीं हैं कि हत्या की मुख्य साजिश या वारदात में सरवाणन की कोई सक्रिय (Active) भूमिका थी। इसलिए उन्हें जेल में रखना प्री-ट्रायल सजा की तरह होगा। कोर्ट ने उन्हें ₹1 लाख के मुचलके पर जमानत दे दी।

ऑनर किलिंग सामाजिक कलंक, सुधार स्कूलों से हो

जस्टिस पुगलेंदी ने ऑनर किलिंग को ‘जातिवाद का सबसे क्रूर और घिनौना रूप’ करार दिया। उन्होंने रिकॉर्ड पेश करते हुए बताया कि पिछले 10 वर्षों में तमिलनाडु में ऑनर किलिंग के 59 मामले दर्ज हुए हैं।

अदालत ने समाज और सरकार को आईना दिखाते हुए कुछ अहम बिंदु रखे

स्कूलों में हिंसक मानसिकता: कोर्ट ने स्कूली छात्रों के बीच होने वाली जातिगत हिंसा को रोकने के लिए गठित जस्टिस के. चंद्रू समिति की रिपोर्ट का जिक्र किया। कोर्ट ने नाराजगी जताई कि इस समिति की सिफारिशों को सरकार द्वारा अभी तक पूरी तरह से लागू नहीं किया गया है।

कानूनों की नाकामी: अदालत ने साफ कहा कि एससी/एसटी (Prevention of Atrocities) एक्ट जैसे कड़े कानून भी समाज की इस आंतरिक बुराई को खत्म करने में पूरी तरह सफल नहीं रहे हैं, क्योंकि इसके तहत दर्ज होने वाले मामलों की संख्या दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है। सुधार कानून से ज्यादा नई पीढ़ी की स्कूली शिक्षा और मानसिकता में लाना होगा।

नेताओं का दोहरा रवैया: कोर्ट ने कहा कि एक तरफ सरकारें जाति मिटाने की बात करती हैं, वहीं दूसरी तरफ कुछ राजनीतिक दल केवल वोट बैंक को मजबूत करने और लोगों को गोलबंद करने के लिए इस सामाजिक बुराई में ‘ईंधन’ (आग में घी) डालने का काम करते हैं।

विश्लेषण: सेना की शहादत और जातिवाद का विरोधाभास

अदालत ने समाज के खोखलेपन पर प्रहार करने के लिए देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले जवानों का एक बेहद मार्मिक उदाहरण दिया।

सामाजिक हकीकतसुप्रीम कोर्ट/हाई कोर्ट का संवैधानिक दृष्टिकोण
जातिगत तुष्टीकरण का डरलोग समाज या अपनी बिरादरी के बहिष्कार के डर से अपनी जातिवादी सोच को छोड़ने से कतराते हैं।
सीमा पर कोई जाति नहींकोर्ट ने कहा कि देश की सीमाओं पर हर जाति, भाषा, समुदाय और क्षेत्र के सैनिक देश की रक्षा करते हैं। जब वे दुश्मन की गोलियों का सामना करते हुए शहादत (Ultimate Sacrifice) देते हैं, तो न तो उनके खून पर और न ही उनकी देशभक्ति पर किसी जाति का कोई निशान होता है। उनका बलिदान ही हमारे संविधान की एकता और समानता की नींव है।

हाई कोर्ट का अंतिम निर्देश

अदालत ने आरोपी सरवाणन को जमानत देते हुए निर्देश दिया कि वे कोयंबटूर में रहेंगे और ट्रायल की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए हर दिन सुबह १०:३० बजे और शाम ५:०० बजे स्थानीय आर.एस. पुरम पुलिस स्टेशन में अपनी हाजिरी दर्ज कराएंगे।

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