Wednesday, July 15, 2026
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Home Buyers: बिल्डरों की मनमानी और अधिकारियों की मिलीभगत बर्दाश्त नहीं…पार्श्वनाथ डेवलपर्स पर क्या चला कानूनी चाबुक, फटाफट पढ़ डालिए

Home Buyers: घर खरीदारों (Homebuyers) को दो दशकों से फ्लैट न देने और रेरा के आदेश के बावजूद मुआवजा न चुकाने पर सुप्रीम कोर्ट ने रीयल एस्टेट कंपनी पार्श्वनाथ डेवलपर्स (Parsvnath Developers) पर अब तक की सबसे सख्त कार्रवाई की है।

मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने बेहद कड़ा रुख अपनाते हुए पार्श्वनाथ समूह की दो कंपनियों के साथ-साथ उनके निदेशकों के सभी बैंक खाते तुरंत प्रभाव से फ्रीज (Freeze) करने का आदेश दिया है। अदालत ने इन कंपनियों और उनके निदेशकों के खिलाफ नए जमानती वारंट (Bailable Warrants) जारी करते हुए उन्हें 17 जुलाई 2026 को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में हाजिर होने का हुक्म दिया है।

रेरा (RERA) अधिनियम को कड़ाई से लागू होने पर ही डरेंगे बिल्डर: अदालत

शीर्ष अदालत ने कहा, “रेरा (RERA) अधिनियम को घर खरीदारों के हितों की रक्षा के लिए एक वैधानिक तंत्र के रूप में बनाया गया था, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि यह कानून तब तक बेअसर है जब तक कि इसके तहत पारित आदेशों का कड़ाई से क्रियान्वयन (Implementation) न हो। बिल्डरों ने रेरा के आदेशों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई हैं और ऐसा लगता है कि स्थानीय पुलिस व जिला कलेक्टरों ने या तो बिल्डरों के साथ सांठगांठ (Collusion) कर ली है या वे अपनी जिम्मेदारियों को निभाने में पूरी तरह विफल रहे हैं।”

मामला क्या है?: 20 साल से घर का इंतजार और ‘रेरा’ की लाचारी

यह मामला गुरुग्राम (Gurugram) के सेक्टर 53 में स्थित ‘पार्श्वनाथ एक्सोटिका’ (Parsvnath Exotica) प्रोजेक्ट के घर खरीदारों (रीता टिक्कू और अन्य) की ओर से दायर याचिका से जुड़ा है।

20 साल पहले पूरा भुगतान: इन वरिष्ठ नागरिकों (Senior Citizens) को साल 2006 में इस प्रोजेक्ट में फ्लैट आवंटित किए गए थे और 2007 की शुरुआत में बिल्डर-बायर एग्रीमेंट हुआ था। फ्लैट की कुल कीमत ₹1.78 करोड़ थी, जिसे खरीदारों ने 20 साल पहले ही पूरा चुका दिया था।

2013 की डेडलाइन: समझौते के मुताबिक फ्लैट का पजेशन 36 महीनों के भीतर यानी फरवरी 2013 तक मिल जाना चाहिए था। लेकिन सालों चक्कर काटने के बाद भी जब निर्माण कार्य पूरा नहीं हुआ, तो खरीदारों ने हरियाणा रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (HRERA) का दरवाजा खटखटाया।

रेरा के आदेशों की अवहेलना: हरेरा (HRERA) ने खरीदारों के पक्ष में मुआवजे का आदेश सुनाया। बिल्डर ने इस आदेश को कहीं चुनौती भी नहीं दी, जिससे यह अंतिम (Final) हो गया। लेकिन इसके बावजूद न तो फ्लैट दिए गए और न ही मुआवजा दिया गया।

सुप्रीम कोर्ट की तीखी टिप्पणियां: जब बेलिफ को भी अंदर नहीं घुसने दिया गया

याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता प्रिया हिंगोरानी ने कोर्ट को बताया कि इन बुजुर्ग खरीदारों में से एक कैंसर सर्वाइवर (कैंसर से उबर चुके) भी हैं, जो अपनी जीवनभर की कमाई गंवाने के बाद इंसाफ के लिए दर-दर भटक रहे हैं। सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने पूरी व्यवस्था और प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाए:

रेरा (RERA) सो जाता है और लोग भुगतते हैं

CJI सूर्यकांत ने रेरा की कार्यप्रणाली पर दुख जताते हुए कहा, “एक बार पहले भी हमने रेरा को लेकर कुछ टिप्पणियां की थीं। हमने कहा था कि यह संस्था आदेश पारित करने के बाद गहरी नींद (Slumber) में चली जाती है और आम लोग इसका खामियाजा भुगतते हैं।”

बिल्डर को गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया?

अदालत इस बात से बेहद हैरान थी कि जब खरीदारों की ओर से रिकवरी (वसूली) नहीं हो सकी, तो हरेरा द्वारा निदेशकों के खिलाफ जमानती और गैर-जमानती वारंट जारी किए गए थे। लेकिन हैरानी की बात यह थी कि जब कोर्ट का बेलिफ (कुर्की/वारंट तामीर करने वाला अधिकारी) कंपनी के दफ्तर गया, तो उसे भीतर तक नहीं घुसने दिया गया। इनके द्वारा एक भी प्रोजेक्ट पूरा नहीं किया जा रहा है। रेरा द्वारा जारी गैर-जमानती वारंटों (Non-bailable Warrants) को स्थानीय पुलिस ने एग्जीक्यूट क्यों नहीं किया? उस बिल्डर को अब तक सलाखों के पीछे होना चाहिए था। पुलिस और कलेक्टर क्या कर रहे थे? इसी वजह से आज हाई कोर्ट्स मुकदमों से पटे पड़े हैं।

अधिकारियों और बिल्डरों का ‘नापाक गठजोड़’

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में दर्ज किया कि प्रथम दृष्टया (Prima Facie) यह साफ है कि स्थानीय पुलिस कमिश्नरों और जिला कलेक्टरों (District Collectors) ने या तो बिल्डरों के साथ सांठगांठ कर ली है या वे अपने कानूनी कर्तव्यों का पालन करने में पूरी तरह नाकाम रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट का कड़ा आदेश और निर्देश

अदालत ने इस मामले को केवल एक व्यक्तिगत विवाद न मानकर रियल एस्टेट सेक्टर की एक बड़ी प्रशासनिक विफलता माना और निम्नलिखित कड़े निर्देश जारी किए।

निदेशकों के निजी खाते भी फ्रीज: कोर्ट ने पार्श्वनाथ हेसा डेवलपर्स प्रा. लि. और पार्श्वनाथ डेवलपर्स लि. के कॉर्पोरेट बैंक खातों के साथ-साथ उनके सभी निदेशकों और शीर्ष अधिकारियों के व्यक्तिगत बैंक खातों (Personal Bank Accounts) को भी तुरंत फ्रीज करने का आदेश दिया।

थर्ड-पार्टी अधिकारों पर रोक: ‘पार्श्वनाथ एक्सोटिका’ प्रोजेक्ट से जुड़ी संपत्ति पर किसी भी तरह के नए थर्ड-पार्टी राइट्स (जैसे बेचना या ट्रांसफर करना) बनाने पर पूरी तरह से रोक (Stay) लगा दी गई है।

17 जुलाई को पेशी की सख्त चेतावनी: पार्श्वनाथ की दोनों कंपनियों और उनके निदेशकों को 17 जुलाई को अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना होगा। कोर्ट ने चेतावनी दी है कि यदि वे इस बार भी हाजिर नहीं हुए, तो उनके खिलाफ सीधे गैर-जमानती वारंट (Non-Bailable Warrant) जारी कर पुलिस को गिरफ्तारी का आदेश दिया जाएगा।

अधिकारियों को सख्त निर्देश: सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा के मुख्य सचिव (Chief Secretary), सभी जिला कलेक्टरों, पुलिस कमिश्नरों और सभी बैंकों को निर्देश दिया है कि वे अदालत के इस आदेश का अक्षरशः पालन सुनिश्चित करें।

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