विवाद और अदालती आदेश की पृष्ठभूमि
- अगस्त का हाईकोर्ट आदेश:इससे पहले अगस्त में, हाईकोर्ट की इसी पीठ ने पंजाब सरकार को 31 अगस्त तक कर्मचारियों का बकाया DA/DR जारी करने का निर्देश दिया था। साथ ही, बकाया चुकता होने तक प्रिंट या सोशल मीडिया पर बड़े पैमाने पर विज्ञापनों जैसे “अनुत्पादक खर्चों” पर रोक लगा दी थी।
- सुप्रीम कोर्ट में चुनौती व अनुपालन का मुद्दा:
- पंजाब सरकार ने इस आदेश को उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) में चुनौती दी है।
- याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता चेतन मित्तल और संजय कौशल ने आरोप लगाया कि सरकार ने अभी तक अनुपालन हलफनामा (Compliance Affidavit) दाखिल नहीं किया है।
- उन्होंने कोर्ट का ध्यान आकर्षित किया कि सरकार द्वारा अन्य राज्यों में विज्ञापन दिए जा रहे हैं और रक्षाबंधन पर करोड़ों रुपये जारी किए गए, जबकि सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री में अपील की खामियों (Defects) को भी दूर नहीं किया गया है।
- नियुक्ति पर पंजाब सरकार का विरोध:जस्टिस मिश्रा की मुख्य न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति का पंजाब की भगवंत मान सरकार ने विरोध किया था और शपथ ग्रहण समारोह का बहिष्कार भी किया था। सरकार का आरोप था कि केंद्र ने राज्य से परामर्श किए बिना यह प्रक्रिया पूरी की।
चंडीगढ़: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के बकाया महंगाई भत्ते (DA) के भुगतान से जुड़े मामले में बेहद सख्त रुख अपनाया है।
नवनियुक्त मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति अश्विनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति रोहित कपूर की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि अदालत पूरी तरह कानून के शासन (Rule of Law) से संचालित होगी और किसी भी प्रकार के दबाव या पैंतरेबाजी से प्रभावित नहीं होगी। पंजाब सरकार द्वारा पदोन्नति के विरोध के बीच मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ लेने के तुरंत बाद जस्टिस मिश्रा ने पीठ की अध्यक्षता करते हुए यह अहम टिप्पणी की।
उच्च न्यायालय की प्रमुख और सख्त टिप्पणियां
1. किसी दबाव के आगे नहीं झुकेगी अदालत
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश अश्विनी कुमार मिश्रा ने स्पष्ट रूप से कहा: “यह अदालत कानून के शासन द्वारा संचालित होगी और यह संस्था किसी भी तरह की रणनीति या पैंतरेबाजी (Tactics) से भयभीत या दबाव में (Browbeaten) नहीं आएगी। इसलिए, हम पूरी तरह से कानून के अनुसार चलेंगे। हमने संविधान की शपथ ली है और हम अपनी शपथ की रक्षा करना और उसका सम्मान करना अच्छी तरह जानते हैं।”
2. दोनों पक्षों की बयानबाजी से अप्रभावित रहने का रुख
अदालत ने याचिकाकर्ताओं और राज्य सरकार दोनों को अनावश्यक टीका-टिप्पणी से बचने की हिदायत देते हुए कहा: “किसी भी पक्ष को टिप्पणी करने की आवश्यकता नहीं है! आपके पास कहने या करने के लिए बहुत सी बातें हो सकती हैं, लेकिन हम केवल कानून के दायरे में फैसला करेंगे। हमने संविधान की रक्षा की शपथ ली है।”
मामले की पृष्ठभूमि और पूर्व आदेश (अगस्त 2026)
- 31 अगस्त की समयसीमा: अगस्त में हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को निर्देश दिया था कि वह अपने सभी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को महंगाई भत्ते/महंगाई राहत (DA/DR) की अद्यतन लंबित किस्तें 31 अगस्त तक जारी करे।
- फिजूलखर्ची और विज्ञापनों पर रोक: अदालत ने यह भी आदेश दिया था कि जब तक कर्मचारियों का बकाया भुगतान नहीं हो जाता, तब तक राज्य सरकार प्रिंट या सोशल मीडिया पर बड़े पैमाने पर विज्ञापन अभियानों जैसे किसी भी अनुत्पादक खर्च (Unproductive Expenditures) पर रोक लगाए।
- सुप्रीम कोर्ट में चुनौती: पंजाब सरकार ने हाईकोर्ट के इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।
सुनवाई के दौरान उठाए गए मुख्य मुद्दे
- अनुपालन न होने का आरोप: सोमवार को सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता चेतन मित्तल ने अदालत को बताया कि सरकार ने 31 अगस्त की तय समयसीमा बीत जाने के बावजूद अभी तक अनुपालन हलफनामा (Compliance Affidavit) दाखिल नहीं किया है।
- दोष निवारण में देरी और विज्ञापनों पर करोड़ों का खर्च: वरिष्ठ अधिवक्ता संजय कौशल ने दलील दी कि राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील तो दायर की है, लेकिन रजिस्ट्री द्वारा निकाली गई आपत्तियों (Defects) को दूर नहीं किया गया है। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि कोर्ट की रोक के बावजूद देश भर के विभिन्न राज्यों में पूरे पृष्ठ के विज्ञापन जारी किए जा रहे हैं और रक्षाबंधन जैसे अवसरों पर करोड़ों रुपये की नई योजनाएं बांटी जा रही हैं।
- सरकार का विरोध: जब पंजाब सरकार के वकील ने इन दलीलों पर आपत्ति जताई, तो पीठ ने दोहराया कि वह किसी भी दबाव से प्रभावित हुए बिना केवल कानूनी आधार पर सुनवाई करेगी।
हाईकोर्ट का अंतरिम निर्णय
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि चूंकि आज ही उन्होंने कार्यभार संभाला है और वे केस फाइल का पूरी तरह अध्ययन नहीं कर पाए हैं, इसलिए मामले की विस्तृत सुनवाई गुरुवार को की जाएगी।
मुख्य न्यायाधीश की तल्ख टिप्पणी
शपथ लेने के तुरंत बाद पीठ की अध्यक्षता करते हुए मुख्य न्यायाधीश अश्वनी कुमार मिश्रा ने टिप्पणी की: “यह अदालत कानून के शासन से संचालित होगी और यह संस्थान किसी भी रणनीति या दबाव से डरने वाला नहीं है। हम पूरी तरह से कानून के अनुसार चलेंगे। हमने संविधान की शपथ ली है और हम जानते हैं कि अपनी शपथ की रक्षा और संरक्षण कैसे किया जाता है।” अदालत ने दोनों पक्षों (याचिकाकर्ताओं और सरकार) को मामले पर बाहरी बयानबाजी न करने की हिदायत दी।
विधिक प्रतिनिधित्व
- आवेदकों/कर्मचारियों की ओर से: वरिष्ठ अधिवक्ता चेतन मित्तल और वरिष्ठ अधिवक्ता संजय कौशल।
- पंजाब राज्य सरकार की ओर से: राज्य के शासकीय अधिवक्ता।
मामले का संक्षिप्त विवरण (At a Glance)
| विवरण | जानकारी |
| संबंधित अदालत | पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय (Chandigarh) |
| पीठ | मुख्य न्यायाधीश अश्वनी कुमार मिश्रा एवं न्यायमूर्ति रोहित कपूर |
| मूल मामला | पंजाब सरकार के कर्मचारियों का बकाया महंगाई भत्ता (DA/DR) |
| विवाद पृष्ठभूमि | सीजे मिश्रा की नियुक्ति पर पंजाब सरकार का विरोध |
| अगली सुनवाई | गुरुवार (चालू सप्ताह) |

