Tuesday, June 30, 2026
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Contributory Negligence: एक्सपायरी के नजदीक पहुंच चुका डॉग फूड बेचा…उपभोक्ता फोरम ने सप्लायर पर लगाया ₹50,000 का जुर्माना

Contributory Negligence: दक्षिण दिल्ली जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने थोक में (Bulk Order) सामान बेचते समय उसकी एक्सपायरी डेट को लेकर लापरवाही बरतने वाले सप्लायर्स और खरीदारों को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है।

फूड सप्लायर को Contributory Negligence के लिए हर्जाना देने का दिया निर्देश

दक्षिण दिल्ली जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग की अध्यक्ष मोनिका ए. श्रीवास्तव और सदस्य किरण कौशल की पीठ ने मामले में दोनों पक्षों की लापरवाही पाते हुए ‘साझा लापरवाही’ (Contributory Negligence) का सिद्धांत लागू किया और यह आदेश जारी किया। आयोग ने एक पेट फूड सप्लायर को आदेश दिया है कि वह एक कंपनी को ₹50,000 का एकमुश्त हर्जाना भुगते, क्योंकि उसने 200 बैग के ऑर्डर में से 166 बैग ऐसा डॉग फूड सप्लाई कर दिया था जिसकी शेल्फ लाइफ (Expiry Date) केवल 15 दिन बची थी।

मामला क्या है?: जर्मन शेफर्ड की मौत और एक्सपायरी का खेल

यह मामला अमृतसर में स्थित एक फार्महाउस से जुड़ा है, जिसका संचालन शिकायतकर्ता कंपनी करती है।

70-75 पालतू कुत्ते: इस फार्महाउस में जर्मन शेफर्ड, केन कोर्सो और ओल्ड इंग्लिश मैस्टिफ जैसी ब्रीड्स के लगभग 70 से 75 कुत्ते रखे गए थे। विज्ञापन और दावों से प्रभावित होकर कंपनी ने 27 मार्च, 2023 को सप्लायर को 200 बैग डॉग फूड का ऑर्डर दिया।

कुत्ते की मौत का दावा: शिकायतकर्ता का आरोप था कि इस भोजन को खाने के तुरंत बाद कई कुत्ते बीमार हो गए और 18 अप्रैल, 2023 को एक जर्मन शेफर्ड की मौत हो गई। डॉक्टर की सलाह पर जब पैकेट चेक किए गए, तो पता चला कि 200 में से 166 बैग्स की एक्सपायरी डेट महज 15 दिनों के भीतर (12 अप्रैल, 2023) की थी।

₹40 लाख के मुआवजे की मांग: कंपनी ने रिफंड के साथ-साथ कुत्ते की मौत के लिए ₹20 लाख और मानसिक प्रताड़ना के लिए ₹20 लाख के मुआवजे का दावा ठोका।

सप्लायर की दलीलें और उपभोक्ता फोरम का रुख

सप्लायर ने अपनी सफाई में कहा कि कानूनन एक्सपायरी के नजदीक पहुंच चुके सामान (Near-Expiry Goods) को बेचना प्रतिबंधित नहीं है। उसने यह भी तर्क दिया कि ग्राहक ने डिस्काउंट के चक्कर में जानबूझकर यह सामान खरीदा था और पिल्लों (Puppies) का खाना बड़े कुत्तों को खिलाया, जिससे वे बीमार हुए।

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उपभोगता फोरम ने इन दलीलों पर बारीक विधिक टिप्पणी की

थोक सप्लाई पर नियम: फोरम ने सप्लायर के इस तर्क को खारिज कर दिया कि ग्राहक ने डिस्काउंट के लिए इसे खरीदा था। कोर्ट ने कहा कि इतनी भारी मात्रा (166 बैग) को कोई भी उपभोक्ता महज 15 दिन के भीतर अपने कुत्तों को नहीं खिला सकता था। सप्लायर को यह बात पता होनी चाहिए थी।

कुत्ते की मौत का मुआवजा खारिज: कोर्ट ने ₹40 लाख के मुआवजे की मांग को ठुकरा दिया, क्योंकि शिकायतकर्ता ऐसा कोई भी मेडिकल या दस्तावेजी सबूत (Documentary Evidence) पेश नहीं कर सका जो यह साबित करे कि कुत्ते की मौत इसी भोजन के कारण हुई थी। कोर्ट ने कहा, “कानून की नजर में कोरे बयानों (Bald Averments) की कोई कीमत नहीं होती।”

क्या यह कमर्शियल मामला था?: सप्लायर ने दलील दी थी कि थोक में खरीदने के कारण यह मामला उपभोक्ता अदालत के दायरे में नहीं आता। कोर्ट ने इसे खारिज करते हुए कहा कि यह सामान आगे मुनाफा कमाने के लिए बेचने (Resell) के मकसद से नहीं, बल्कि अपने ही 75 कुत्तों को खिलाने के लिए खरीदा गया था, इसलिए शिकायतकर्ता एक वैध ‘उपभोक्ता’ है।

दोनों पक्षों की ‘साझा लापरवाही’ (Contributory Negligence)

फोरम ने फूड सेफ्टी रेगुलेशन का हवाला देते हुए माना कि केवल एक्सपायरी के पास का सामान बेचना गैरकानूनी नहीं है, इसलिए खरीदार की भी जिम्मेदारी बनती थी। शिकायतकर्ता भी इस मामले में लापरवाह पाया गया है, जिसने इतनी बड़ी मात्रा में सामान लेते वक्त पैकेट पर छपी एक्सपायरी डेट की जांच खुद नहीं की। चूंकि लापरवाही दोनों तरफ से हुई है, इसलिए सप्लायर को तीन महीने के भीतर एकमुश्त ₹50,000 का हर्जाना देना होगा।

Contributory Negligence: केस मैट्रिक्स और ग्राहकों के लिए जरूरी सीख (Case Summary)

कानूनी और उपभोक्ता श्रेणियांदक्षिण दिल्ली जिला उपभोक्ता फोरम का फैसला (जून २०२६)
संबंधित फोरमजिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, दक्षिण दिल्ली
पीठ के सदस्यअध्यक्ष मोनिका ए. श्रीवास्तव और सदस्य किरण कौशल
मुख्य विवाद200 में से 166 डॉग फूड बैग्स की शेल्फ लाइफ सिर्फ 15 दिन बची होना।
विधिक सिद्धांतसाझा लापरवाही (Contributory Negligence): विक्रेता और क्रेता दोनों को सतर्क रहना होगा।
सजा/मुआवजासप्लायर को 3 महीने के भीतर ₹50,000 देने का आदेश।
दिल्ली उपभोक्ता हेल्पलाइन011-28050114
राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन1915
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