Friday, October 2, 2026
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COURT CRAFT: सुप्रीम जज आदेश लिखाना शुरू किए…उधर युवा वकील चल पड़ीं, फिर क्या हुआ पढ़ें

COURT CRAFT: सुप्रीम कोर्ट ने कहा, वर्तमान पीढ़ी के वकीलों में “कोर्ट क्राफ्ट” सीखने की रुचि नहीं है। वे केवल मामले पढ़ने को ही पर्याप्त समझ रही है।

यह हुआ मामला

न्यायमूर्ति एस. वी. एन. भट्टी और न्यायमूर्ति पी. बी. वरले की पीठ ने यह टिप्पणी उस समय की जब एक युवा वकील अदालत के आदेश लिखे जाने के दौरान अनौपचारिक ढंग से वहां से चली गई। मामले की सुनवाई के दौरान जब यह मुद्दा उठा, तो वकील ने पीठ को बताया कि स्थगन के लिए एक पत्र प्रसारित किया गया है। इसके बावजूद, जैसे ही पीठ ने आदेश लिखवाना शुरू किया, वह वकील कोर्टरूम से बाहर चली गई। इस व्यवहार से अप्रसन्न पीठ ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा, “नई पीढ़ी कोर्ट क्राफ्ट सीखना नहीं चाहती। केस पढ़ना केवल 30 प्रतिशत है, बाकी 70 प्रतिशत कोर्ट क्राफ्ट है।

दिल्ली की तीस हजारी अदालत में मार्च में भी आया था एक मामला

सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी न्यायिक कार्यवाही के प्रति पेशेवर अनुशासन और व्यवहार की आवश्यकता को रेखांकित करती है। इस सदंर्भ में एक मामला दिल्ली की तीस हजारी अदालत में मार्च में सामने आया था। एक वादी वर्चुअल सुनवाई के दौरान धूम्रपान करते देखे गए। उस समय अतिरिक्त जिला जज शवि कुमार वीसी की दूसरी तरफ थे। आदेश में कहा गया कि जब अन्य मामलों की सुनवाई हो रही थी, उस दौरान भी वह फोन पर बात करते हुए देखे गए। इससे अदालत की कार्यवाही में बाधा आती है। जब कोर्ट सख्त हुई तो उन्होंने मामले में माफी मांगी।

Expaliner: आइए कोर्ट क्राफ्ट के बारे में जानें

कोर्ट क्राफ्ट का अर्थ है वकील द्वारा अदालत में अपनी प्रस्तुति, व्यवहार, भाषा, रणनीति, और व्यावसायिक दक्षता का ऐसा संतुलन, जो उसे एक प्रभावशाली, संजीदा और न्यायपालिका के प्रति जिम्मेदार वकील बनाता है। यह केवल कानून पढ़ना नहीं है, बल्कि उस ज्ञान को समय, स्थान और परिस्थिति के अनुसार प्रभावी ढंग से लागू करने की कला है। कोर्ट क्राफ्ट वकील की पहचान नहीं, बल्कि उसकी सबसे बड़ी ताकत होती है।

कोर्ट क्राफ्ट के मुख्य पहलू

  1. न्यायालयीन शिष्टाचार (Courtroom Etiquette): एक वकील का व्यवहार भी उसकी योग्यता का हिस्सा होता है। इसके अलावा न्यायाधीश के सामने कैसे खड़े हों, कब बोलें, कब चुप रहें, न्यायालय के कर्मचारियों और सह-वकीलों से कैसे पेश आएं जैसी चीजें हैं।
  2. तर्क-कला और रणनीति (Advocacy & Strategy): कब बहस को तेज करना है, और कब शांत रहकर न्यायाधीश को सोचने देना है। कौन सा कानून किस परिस्थिति में लागू होगा? किस साक्ष्य या तर्क को पहले रखना है और किसे बाद में। यह कौशल अनुभव और अभ्यास से आता है, केवल किताबों से नहीं।
  3. जज को पढ़ने की क्षमता (Reading the Bench): हर न्यायाधीश की सोचने और सुनने की शैली अलग होती है। कोर्ट क्राफ्ट में यह शामिल है कि आप समझें कि न्यायाधीश किस बात पर ध्यान दे रहे हैं, आपको अपनी दलील को उसी दिशा में कैसे मोड़ना है।
  4. भावनात्मक बुद्धिमत्ता (Emotional Intelligence): गवाहों, मुवक्किलों और कोर्ट स्टाफ के साथ संवाद, केस की गंभीरता को समझते हुए भावनाओं पर नियंत्रण,
    हार या टकराव की स्थिति में संयम बनाए रखना।
  5. भाषा और प्रस्तुति (Language & Presentation): स्पष्ट, सम्मानजनक और प्रभावशाली भाषा का प्रयोग, तथ्यों को सरल और व्यवस्थित ढंग से रखना,
    तकनीकी शब्दों का संतुलित उपयोग, ताकि न्यायाधीश को बात समझ में आए।

क्यों ज़रूरी है कोर्ट क्राफ्ट?

केवल कानून जानने से कोई भी अच्छा वकील नहीं बनता। कोर्ट क्राफ्ट वकील को विश्वसनीय, व्यावहारिक और न्यायपालिका के अनुकूल बनाता है। इससे न्यायधीशों का सम्मान और मुवक्किलों का भरोसा दोनों प्राप्त होता है। इसे सीखने के लिए सीनियर वकीलों की कार्यशैली को Observe करें। रोज़ कोर्ट में बैठें और सुनवाई की बारीकियां समझें। मूट कोर्ट, इंटर्नशिप, लाइव केसों से अनुभव लें। Feedback लें और खुद में सुधार करें। अनुशासन, धैर्य और निरंतर अभ्यास बनाए रखें।

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