केस अवलोकन (Case Snapshot)
| पहलू | विवरण |
| अदालत | दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) |
| पीठ | न्यायमूर्ति नवीन चावला एवं न्यायमूर्ति रविंद्र दुदेजा |
| मामला | अदालत स्वयं की प्रेरणा से बनाम राकेश कुमार, अधिवक्ता (Criminal Contempt) |
| मूल संदर्भ | जिला एवं सत्र न्यायाधीश एम.के. नागपाल (तीस हजारी कोर्ट) |
| मुख्य बिंदु | जज को धमकाने, अभद्र भाषा का प्रयोग करने और कोर्ट की गरिमा कम करने पर आपराधिक अवमानना का केस। |
| अगली सुनवाई | 15 अक्टूबर 2026 |
Criminal Contempt of Court: दिल्ली उच्च न्यायालय ने खुली अदालत में एक निचली अदालत (ट्रायल कोर्ट) के न्यायाधीश पर चिल्लाने, पक्षपात का आरोप लगाने और उन्हें धमकाने के आरोप में अधिवक्ता राकेश कुमार के खिलाफ आपराधिक अवमानना (Criminal Contempt of Court) की कार्यवाही शुरू की है [Court on its own Motion बनाम Rakesh Kumar, Advocate]।
पीठ और मामले की पृष्ठभूमि
न्यायमूर्ति नवीन चावला और न्यायमूर्ति रविंदर दुडेजा की खंडपीठ ने 20 अगस्त को पारित दो अलग-अलग आदेशों के माध्यम से अधिवक्ता राकेश कुमार के खिलाफ आरोप तय किए और उनसे जवाब तलब किया है।
यह अवमानना कार्यवाही दिल्ली की तीस हजारी अदालत के जिला न्यायाधीश एम. के. नागपाल द्वारा भेजे गए संदर्भ (Reference) के आधार पर शुरू की गई है। जिला न्यायाधीश ने वकील के अनुचित आचरण और धमकियों से जुड़ी दो अलग-अलग घटनाओं की रिपोर्ट उच्च न्यायालय को भेजी थी। मामले में अदालत की सहायता हेतु अधिवक्ता अमित जॉर्ज को एमिकस क्यूरी (Amicus Curiae) नियुक्त किया गया है।
निचली अदालत द्वारा रिपोर्ट की गई घटनाएं
- 4 मार्च 2025 की घटना: आरोप है कि वकील ने अदालत में तेज आवाज में बात की और जिला न्यायाधीश पर पक्षपातपूर्ण तरीके से काम करने का आरोप लगाया। उन्होंने कथित तौर पर कहा कि जज ठीक से काम नहीं करते हैं, जज का पिछला रिकॉर्ड खंगालने के लिए आरटीआई (RTI) आवेदन लगाने की धमकी दी और कहा कि वे किसी जज की “चमचागिरी” करने के लिए वकील नहीं बने हैं। अधिवक्ता ने कथित तौर पर यह भी कहा कि जज का वेतन करदाताओं (Taxpayers) के पैसे से आता है इसलिए वे कोई उपकार नहीं कर रहे हैं, और पूछा कि क्या जज अदालत में “दादागिरी” चलाएंगे।
- 16 अप्रैल 2025 की घटना: यह विवाद तब हुआ जब वकील का एक मामला गलत तारीख पर सूचीबद्ध हो गया। न्यायाधीश द्वारा यह समझाने के बावजूद कि संबंधित अदालती कर्मचारी से इस चूक पर स्पष्टीकरण मांगा जाएगा, वकील ने असंतुष्ट होकर ऊंची आवाज में बात की, असंसदीय भाषा का प्रयोग किया और अदालत से लिखित माफी (Written Apology) की मांग की।
यहां जानिए वकील पर आरोप और मुख्य घटनाक्रम
जिला जज द्वारा हाईकोर्ट को रिपोर्ट की गई दो प्रमुख घटनाओं के आधार पर आरोप तय किए गए हैं:
- 4 मार्च 2025 की घटना (‘चमचागिरी’ और ‘दादागिरी’ की टिप्पणी)
- आरोप है कि सुनवाई के दौरान वकील ने अपनी आवाज ऊंची की और जज पर पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाया।
- वकील ने कथित तौर पर कहा कि “न्यायाधीश ठीक से काम नहीं करते हैं” और धमकी दी कि वह जज के पिछले रिकॉर्ड की जांच के लिए आरटीआई (RTI) याचिकाएं दाखिल करेंगे।
- उसने यह टिप्पणी भी की कि वह किसी जज की “चमचागिरी” करने के लिए वकील नहीं बना है और टैक्सपेयर्स के पैसे से वेतन मिलने का हवाला देते हुए पूछा कि क्या जज कोर्ट में “दादागिरी” कर सकते हैं।
- 16 अप्रैल की घटना (लिखित माफी की मांग)
- एक मामले की गलत तारीख सूचीबद्ध (Listing) होने पर असंतोष व्यक्त करते हुए वकील ने ट्रायल जज पर चिल्लाना शुरू कर दिया।
- कोर्ट द्वारा यह आश्वासन दिए जाने के बावजूद कि जिम्मेदार कर्मचारी से स्पष्टीकरण मांगा जाएगा, वकील अभद्र भाषा का प्रयोग करता रहा और जज से लिखित माफी (Written Apology) की मांग करने लगा।
- हाईकोर्ट का रुख और आरोप पत्र
- हाईकोर्ट ने माना कि वर्चुअल और फिजिकल माध्यम से खुले कोर्ट में किए गए इस आचरण ने अदालत के प्राधिकार को कमतर किया है और न्याय प्रशासन के सुचारू संचालन में बाधा डालने का प्रयास किया है।
- वकील राकेश कुमार ने खुद को निर्दोष (Pleaded Not Guilty) बताया है।
- अदालत के निर्देश
- हाईकोर्ट ने संबंधित दिनों की CCTV रिकॉर्डिंग तलब की है।
- आरोपी वकील को 15 अक्टूबर को अगली सुनवाई के दौरान व्यक्तिगत रूप से उपस्थित (Personal Appearance) रहने का निर्देश दिया गया है।
- एडवोकेट अमित जॉर्ज को इस मामले में अदालत की सहायता के लिए ‘न्याय मित्र’ (Amicable Curiae) नियुक्त किया गया है।
उच्च न्यायालय द्वारा तय किए गए आरोप
अधिवक्ता के खिलाफ आरोप तय करते हुए उच्च न्यायालय ने कहा: आपने खुली अदालत में और वर्चुअल प्लेटफॉर्म के माध्यम से उपस्थित लोगों के सामने यह कृत्य किया। अदालत को कोई सम्मान न देकर आपने न्यायालय के प्राधिकार (Authority) को कम किया है तथा न्यायिक कार्यवाही और न्याय प्रशासन के सुचारू संचालन में हस्तक्षेप करने का प्रयास किया है, जो आपराधिक अवमानना के दायरे में आता है।
अदालती कार्यवाही और अगला कदम
- वकील का रुख: अधिवक्ता राकेश कुमार ने व्यक्तिगत रूप से पेश होकर इन आरोपों को स्वीकार करने से इनकार किया और खुद को निर्दोष बताया।
- सीसीटीवी फुटेज तलब: उच्च न्यायालय ने निचली अदालत की उस दिन की कार्यवाही की CCTV रिकॉर्डिंग तलब की है, जिस दौरान ये कथित अपमानजनक और अवमाननापूर्ण टिप्पणियां की गई थीं।
- अगली सुनवाई: अदालत ने अधिवक्ता को अपना लिखित जवाब दाखिल करने और 15 अक्टूबर 2026 को अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने का निर्देश दिया है।

