Tuesday, October 6, 2026
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TMC’s Advocate Access Judge Chamber: न्यायाधीश के चैंबर से रिकॉर्ड हासिल करने के आरोप; टीएमसी नेता की वकील ने यह कहा, जरूर पढ़ें

केस अवलोकन (Case Snapshot)

पहलूविवरण
अदालतकलकत्ता उच्च न्यायालय (Calcutta High Court)
जजन्यायमूर्ति सुव्रा घोष (Justice Suvra Ghosh)
संबंधित वकीलएडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड मौसुमी भौवाल (Mousumi Bhowal)
मूल मामलाTMC नेता सुजीत बोस की नगरपालिका भर्ती घोटाले में जमानत याचिका
नया मोड़आरोपी वकील ने चीफ जस्टिस से जांच और CCTV फुटेज सुरक्षित करने की गुहार लगाई।

TMC’s Advocate Access Judge Chamber: कलकत्ता हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति सुव्रा घोष द्वारा तृणमूल कांग्रेस (TMC) नेता सुजीत बोस के वकील और अपने निजी सचिव पर चैंबर से केस रिकॉर्ड निकालने के प्रयास का आरोप लगाए जाने के बाद, संबंधित वकील ने उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर जांच कराने की मांग की है।

अधिवक्ता मौसमी भौवाल (Mousumi Bhowal), जो न्यायमूर्ति घोष के समक्ष सुजीत बोस की जमानत याचिका में एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड (AoR) थीं, ने खुद को पूरी तरह निर्दोष बताते हुए न्यायमूर्ति के चैंबर के बाहरी कक्ष (Front Room) के सीसीटीवी (CCTV) फुटेज को सुरक्षित रखने की गुहार लगाई है।

यह है मामले की पृष्ठभूमि

  • जमानत याचिका और फैसला सुरक्षित: नगरपालिका भर्ती घोटाले से जुड़े धनशोधन मामले में गिरफ्तार सुजीत बोस की जमानत याचिका पर न्यायमूर्ति सुव्रा घोष ने 17 अगस्त को सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया था।
  • न्यायाधीश का आरोप और सुनवाई से हटना: 19 अगस्त को न्यायमूर्ति घोष ने आरोप लगाया कि 18 अगस्त को जब वे कोर्ट रूम में थीं, तब बोस के एक वकील और उनके निजी सचिव ने चैंबर से केस रिकॉर्ड निकालने की कोशिश की तथा कर्मचारियों के मना करने पर जबरन चैंबर में घुसने का प्रयास किया। इसे अनुचित उद्देश्य (Oblique Motive) करार देते हुए उन्होंने मामले की सुनवाई से खुद को अलग (Recuse) कर लिया।

वकील मौसमी भौवाल का पक्ष और हलफनामा

यद्यपि न्यायाधीश ने अपने आदेश में किसी वकील का नाम नहीं लिया था, लेकिन एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड होने के नाते मौसमी भौवाल ने मुख्य न्यायाधीश को भेजे गए पत्र और शपथ पत्र (Affidavit) में 18 अगस्त 2026 के पूरे घटनाक्रम का ब्योरा दिया:

  • कोर्ट रूम से बुलावे का दावा: शपथ पत्र के अनुसार, वरिष्ठ अधिवक्ता सब्यसाची बनर्जी के जूनियर अधिवक्ता नाहिद अहमद ने दोपहर करीब 2:25 बजे फोन और व्हाट्सएप पर सूचना दी कि कोर्ट रूम नंबर 15 में तैनात कोर्ट ऑफिसर (न्यायमूर्ति घोष की निजी सचिव शिखा मुखर्जी) फैसलों की प्रतियां (Judgments) लेने के लिए उन्हें बुला रही हैं।
  • चैंबर के बाहरी हिस्से में क्या हुआ: भौवाल ने बताया कि शिखा मुखर्जी उन्हें लगभग 2:35 बजे सेस्किसेंटेनरी बिल्डिंग में जजों के कॉरिडोर से होते हुए न्यायमूर्ति घोष के चैंबर के फ्रंट रूम में ले गईं। वहां मौजूद दो स्टाफ सदस्यों से मुखर्जी ने केस रिकॉर्ड मांगा। कर्मचारियों ने कहा कि फाइल न्यायमूर्ति घोष के पास है और नहीं दिखाई जा सकती।
  • एक शब्द भी न बोलने और तुरंत बाहर आने का दावा: भौवाल ने शपथ पत्र में कहा:“मैंने वहां एक शब्द भी नहीं बोला। स्टाफ के मना करते ही मैं बिना कुछ कहे तुरंत वहां से बाहर निकल आई। मैंने किसी भी अनुचित उद्देश्य से केस रिकॉर्ड बाहर लाने के लिए कोर्ट ऑफिसर से कोई मिलीभगत नहीं की और न ही 18 अगस्त को 2:40 से 2:42 के बीच माननीय न्यायमूर्ति सुव्रा घोष के चैंबर में घुसने का प्रयास किया।””
  • जजमेंट्स की प्रतियां सौंपना: भौवाल के अनुसार, मुखर्जी ने कॉरिडोर में उनसे उन दो फैसलों की प्रतियां मांगीं जिनका उल्लेख वरिष्ठ अधिवक्ता बनर्जी ने सुनवाई के दौरान किया था। भौवाल ने दोपहर 3:10 बजे न्यायमूर्ति घोष द्वारा पूर्व में 16 दिसंबर 2024 और 19 दिसंबर 2025 को पारित आदेशों की प्रतियां मुखर्जी को सौंपीं। इसके समर्थन में उन्होंने कॉल लॉग और व्हाट्सएप चैट के स्क्रीनशॉट भी संलग्न किए हैं।

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जांच और फुटेज सुरक्षित रखने की गुहार

मौसमी भौवाल ने मुख्य न्यायाधीश को लिखे पत्र में कहा कि 19 अगस्त को मामला अचानक “To Be Mentioned” के रूप में सूचीबद्ध हुआ और खुली अदालत में ऐसी गंभीर टिप्पणियां की गईं जो उनके पूरे पेशेवर करियर को नुकसान पहुंचा सकती हैं।

उन्होंने मुख्य न्यायाधीश से आग्रह किया: इन परिस्थितियों में मैं आपसे विनम्रतापूर्वक जांच कराने का अनुरोध करती हूं, ताकि मैं अपनी बेगुनाही साबित कर सकूं। माननीय न्यायमूर्ति सुव्रा घोष के चैंबर के सामने वाले कमरे (Front Room) के सीसीटीवी फुटेज को कृपया सुरक्षित रखा जाए।

वकील मौसुमी भौवाल का अपना पक्ष (हलफनामे के मुख्य बिंदु)

मुख्य न्यायाधीश को भेजे पत्र और संलग्न हलफनामे (Affidavit) में वकील ने 18 अगस्त की घटना का विवरण दिया:

  1. निजी सचिव (PS) का बुलावा
    • भौवाल के अनुसार, सीनियर एडवोकेट सब्यसाची बनर्जी के जूनियर (एडवोकेट नाहिद अहमद) ने दोपहर 2:25 बजे उन्हें सूचित किया कि जस्टिस घोष की निजी सचिव (शिखा मुखर्जी) ने उन्हें पुराने फैसलों/साइटेशनों की प्रतियां देने के लिए बुलाया है।
  2. चेंबर के बाहर का घटनाक्रम
    • दोपहर 2:40 से 2:42 बजे के बीच निजी सचिव उन्हें जज के चेंबर के सामने वाले कमरे में ले गईं और वहां तैनात स्टाफ से केस रिकॉर्ड लाने को कहा।
    • भौवाल का दावा है: “मैंने एक शब्द भी नहीं कहा।” जब स्टाफ ने कहा कि फाइल जज के पास है, तो वह बिना कुछ बोले तुरंत वहां से चली गईं।
  3. गलत मंशा और साठगांठ का खंडन
    • वकील ने हलफनामे में स्पष्ट किया: “मैंने कभी भी किसी गुप्त/गलत मंशा के साथ केस रिकॉर्ड बाहर निकालने के लिए कोर्ट ऑफिसर के साथ कोई साठगांठ नहीं की और न ही जज साहिबा के चेंबर में घुसने की कोशिश की।”
    • उन्होंने दोपहर 3:10 बजे निजी सचिव को दो पुराने अदालती आदेश सौंपने की बात स्वीकार की, जिन्हें सुनवाई के दौरान उद्धृत किया गया था।
    • उन्होंने अपने दावों के समर्थन में कॉल लॉग्स और व्हाट्सएप संदेशों के स्क्रीनशॉट भी प्रस्तुत किए हैं।
  4. जांच और CCTV की मांग
    • 19 अगस्त को मामला ‘To Be Mentioned’ के तहत सूचीबद्ध हुआ और जज ने गंभीर टिप्पणियां करते हुए केस छोड़ दिया, जिससे वकील के करियर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
    • भौवाल ने चीफ जस्टिस से प्रार्थना की कि सच सामने लाने के लिए निष्पक्ष जांच कराई जाए और चेंबर के फ्रंट रूम की CCTV फुटेज को सुरक्षित रखा जाए।
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