Sunday, June 28, 2026
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Delhi High Court: बड़ा रोस्टर फेरबदल…सांसदों-विधायकों के केस अब जस्टिस मनोज जैन के पास, जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा सुनेंगी सिविल याचिकाएं

Delhi High Court: दिल्ली हाईकोर्ट ने गर्मी की छुट्टियों (Summer Break) के बाद अदालत खुलने से ठीक पहले अपने जजों के न्यायिक कामकाज के आवंटन (Roster of Cases) में एक बड़ा और प्रशासनिक फेरबदल किया है।

Delhi High Court: नया रोस्टर 1 जुलाई, 2026 से प्रभावी होगा

राष्ट्रीय राजधानी के लिहाज से यह बेहद संवेदनशील और हाई-प्रोफाइल रोस्टर माना जाता है, क्योंकि इसमें पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल सहित कई दिग्गज विपक्षी नेताओं के आपराधिक मामले शामिल हैं। पिछले करीब तीन साल से इन मामलों की सुनवाई जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की कोर्ट में हो रही थी। कोर्ट द्वारा जारी नए रोस्टर के अनुसार, वर्तमान और पूर्व सांसदों व विधायकों (MPs/MLAs) से जुड़े सभी आपराधिक मामलों की सुनवाई अब जस्त्टिस मनोज जैन करेंगे। दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) के कामकाज को और अधिक सुव्यवस्थित और तेज करने के लिए चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय (Chief Justice Devendra Kumar Upadhyaya) ने अदालती मामलों का नया रोस्टर (Roster) जारी कर दिया है। यह नया रोस्टर 1 जुलाई, 2026 से लागू होगा। इस व्यवस्था के तहत तय किया गया है कि सिविल, क्रिमिनल, संवैधानिक, कमर्शियल और टैक्स मामलों की सुनवाई अब कौन से जज करेंगे।

क्या बदलाव हुआ है और क्यों?

दिल्ली हाई कोर्ट प्रशासन के अनुसार, यह एक रूटीन प्रशासनिक प्रक्रिया है जो हर साल गर्मियों की छुट्टियों के बाद मामलों की लिस्टिंग को सुव्यवस्थित (Streamline) करने के लिए की जाती है।

जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा का नया पोर्टफोलियो: रोस्टर फेरबदल के बाद जस्टिस शर्मा अब सिविल रिट याचिकाओं (Civil Writ Petitions) की सुनवाई करेंगी। उनके पास खान (Mines), कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न (Sexual Harassment at Workplace), सूचना का अधिकार (RTI) और विभिन्न वैधानिक प्राधिकरणों जैसे दिल्ली परिवहन निगम (DTC), अर्बन आर्ट्स कमीशन और एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) से जुड़े मामले भेजे गए हैं।

पृष्ठभूमि: कोर्ट रूम में राजनीतिक रस्साकशी और रिक्यूजल विवाद

जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की अदालत पिछले कुछ समय से तीखी राजनीतिक बहस और कानूनी लड़ाइयों का केंद्र बनी हुई थी।

पक्षपात की आशंका और ट्रांसफर: अप्रैल 2026 में दिल्ली आबकारी नीति मामले (Delhi Liquor Policy Case) में निचली अदालत द्वारा बरी किए जाने के खिलाफ सीबीआई (CBI) की चुनौती पर सुनवाई चल रही थी। उस दौरान अरविंद केजरीवाल और अन्य आरोपियों ने हलफनामा दायर कर पक्षपात की आशंका जताते हुए जस्टिस शर्मा से खुद को इस मामले से अलग (Recusal) करने की मांग की थी।

अवमानना कार्यवाही: शुरुआत में जस्टिस शर्मा ने इस रिक्यूजल अर्जी को खारिज कर दिया था और उल्टा केजरीवाल व अन्य के खिलाफ अवमानना (Contempt Proceedings) की कार्यवाही शुरू कर दी थी। हालांकि, बाद में इस संवेदनशील मामले को जस्टिस मनोज जैन की अदालत में ट्रांसफर कर दिया गया था। अब नए रोस्टर के तहत पूरा का पूरा सांसद/विधायक विंग ही जस्टिस जैन को सौंप दिया गया है।

सांसदों-विधायकों के मामलों पर सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस

नेताओं के खिलाफ मुकदमों की सुनवाई के लिए विशेष अदालतों और निर्दिष्ट रोस्टर (Designated Rosters) की यह व्यवस्था सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत काम करती है।

अप्रैल 2021 का ऐतिहासिक निर्देश: तत्कालीन भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) एन. वी. रमना की अध्यक्षता वाली तीन न्यायाधीशों की पीठ ने देश भर के सांसदों और विधायकों के खिलाफ लंबित मामलों के त्वरित निपटारे और बैकलॉग को खत्म करने के लिए विशेष रोस्टर बनाने का आदेश दिया था।

हाई कोर्ट की सख्त निगरानी: सुप्रीम कोर्ट ने यह भी अनिवार्य किया था कि किसी भी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में संबंधित हाई कोर्ट की अनुमति के बिना किसी भी मौजूदा या पूर्व सांसद/विधायक के खिलाफ दर्ज आपराधिक मुकदमे को वापस (Withdraw) नहीं लिया जा सकता। हाई कोर्ट लगातार इन मामलों की प्रगति की निगरानी करते हैं।

रोस्टर फेरबदल मैट्रिक्स (Roster Overview)

श्रेणियांदिल्ली हाई कोर्ट नया रोस्टर आवंटन (1 जुलाई, 2026 से प्रभावी)
प्रकृतिवार्षिक रूटीन प्रशासनिक फेरबदल (Post-Summer Vacation)
MP/MLA आपराधिक मामलेअब जस्टिस मनोज जैन के अधिकार क्षेत्र में (पहले जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के पास थे)।
जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा का नया विभागसिविल रिट याचिकाएं (आरटीआई, कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न, खदानें और सरकारी प्राधिकरण)।
मामलों की संवेदनशीलतादिल्ली शराब नीति और विपक्षी नेताओं से जुड़े कई हाई-प्रोफाइल राजनीतिक मामले शामिल।
विधिक अधिदेशसुप्रीम कोर्ट के 2021 के आदेश के तहत नेताओं के खिलाफ मुकदमों की फास्ट-ट्रैक निगरानी।

खंडपीठों (Division Benches) का नया बंटवारा

नए रोस्टर में 9 डिवीजन बेंच (DB) बनाई गई हैं, जिनके बीच मामलों का स्पष्ट विभाजन किया गया है ताकि किसी भी विभाग में पेंडेंसी न बढ़े।

खंडपीठ (Bench)न्यायाधीश (Judges)प्रमुख अधिकार क्षेत्र (Jurisdiction)
DB-Iचीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय व जस्टिस तेजस कारियासभी जनहित याचिकाएं (PILs), स्वतः संज्ञान (Suo Motu) मामले, क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन को प्रभावित करने वाले संवैधानिक मुद्दे। (नए मामलों की तत्काल मेंशनिंग भी यहीं होगी)
DB-IIजस्टिस वी. कामेश्वर राव व जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ाहाई कोर्ट के प्रशासनिक फैसलों के खिलाफ अपीलें, सर्विस लॉ, टेंडर विवाद और IPR अपीलें।
DB-IIIजस्टिस नितिन वासुदेव सांबरे व जस्टिस अमित शर्मासशस्त्र बलों (Armed Forces) के सर्विस मामले और कंपनी अपीलें।
DB-IVजस्टिस दिनेश मेहता व जस्टिस रजनीश कुमार गुप्ताइनकम टैक्स अपीलें, डायरेक्ट टैक्स रिट याचिकाएं और चार्टर्ड अकाउंटेंट्स एक्ट मामले।
DB-Vजस्टिस विवेक चौधरी व जस्टिस रेणु भटनागरफैमिली कोर्ट और रेरा (RERA) की अपीलें, DRT/DRAT मामले, MTNL, MCD और NDMC से जुड़ी रिट।
DB-VIजस्टिस प्रतिभा एम. सिंह व जस्टिस विकास महाजनभूमि अधिग्रहण (Land Acquisition), को-ऑपरेटिव सोसायटी, स्ट्रीट वेंडर विवाद और अवमानना अपीलें।
DB-VIIजस्टिस नवीन चावला व जस्टिस रविंदर डुडेजाक्रिमिनल संवैधानिक मामले, फांसी की सजा की समीक्षा (Death References), बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus), PMLA और FEMA अपीलें।
DB-VIIIजस्टिस सी. हरि शंकर व जस्टिस विनोद कुमारकैट (CAT) से जुड़े सर्विस मामले, सशस्त्र बलों के सर्विस विवाद और लेटर्स पेटेंट अपील (LPA)।
DB-IXजस्टिस अनिल खेत्रपाल व जस्टिस शैल जैनअप्रत्यक्ष कर (Indirect Tax) विवाद — GST, कस्टम, एक्साइज, VAT और म्यूनिसिपल टैक्स।

एकल पीठ (Single Bench) का आवंटन

एकल जजों के रोस्टर को भी मामलों की प्रकृति के आधार पर तीन मुख्य हिस्सों में बांटा गया है।

सिविल मामले (Civil Jurisdiction):

  • जस्टिस संजीव नरूला: भूमि सुधार और 2016 के बाद की सर्विस रिट याचिकाएं।
  • जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा: सूचना का अधिकार (RTI), कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न और अन्य विविध सिविल रिट।
  • जस्टिस जसमीत सिंह: DDA, शिक्षा और बैंकिंग विवाद।
  • जस्टिस अमित बंसल: रेलवे, बिजली, दिल्ली जल बोर्ड (DJB), MTNL, MCD और NDMC मामले।
  • जस्टिस अनीश दयाल: वक्फ बोर्ड, मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल (MACT) और कंपनी मामले।
  • लेबर मामलों का विभाजन: जस्टिस मनोज कुमार ओहरी (2018-2023 के केस), जस्टिस मिनी पुष्करणा (2024 से आगे) और जस्टिस अमित महाजन (2017 तक)।

आपराधिक मामले (Criminal Roster):

  • नई जमानत अर्जियों (Bail Applications), आपराधिक अपीलों और क्रिमिनल रिट याचिकाओं का जिम्मा जस्टिस प्रतीक जालान, जस्टिस पी.के. कौरव, जस्टिस सौरभ बनर्जी, जस्टिस गिरीश कठपालिया, जस्टिस मनोज जैन और जस्टिस मधु जैन की अदालतों को सौंपा गया है।

कमर्शियल और बौद्धिक संपदा (Commercial & IPR):

  • कमर्शियल विवाद (Original Side): जस्टिस अवनीश झिंगन, जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद, जस्टिस तुषार राव गेडेला, जस्टिस सचिन दत्ता और जस्टिस ओम प्रकाश शुक्ला।
  • इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी डिवीजन (IPD): पेटेंट, ट्रेडमार्क और कॉपीराइट मामलों की सुनवाई पहले की तरह ही जस्टिस ज्योति सिंह और जस्टिस अनूप जयराम भंभानी करेंगे।

पुराने कैदियों और कमर्शियल मुकदमों पर विशेष फोकस

  • सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन: दशकों पुरानी आपराधिक अपीलों के निपटारे के लिए 2 समर्पित बेंच बनाई गई हैं। रोस्टर में साफ हिदायत है कि उन कैदियों की अपीलों को प्राथमिकता (Priority) दी जाए, जिनकी सजा पूरी होने वाली है।
  • कमर्शियल मुकदमों में तेजी: व्यापारिक और कॉर्पोरेट विवादों को जल्द सुलझाने के लिए हाई कोर्ट में 8 कमर्शियल अपीलेट डिवीजन बेंच और 7 कमर्शियल डिवीजन सिंगल बेंच का गठन किया गया है।
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