Friday, October 9, 2026
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Digital Rights: डिजिटल सिग्नेचर को वैध मान्यता…यह होगा मतदाताओं को फायदा, समझें

Digital Rights: गुजरात हाई कोर्ट ने डिजिटल युग के पक्ष में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए “डिजिटल सिग्नेचर” (Digital Signature) को वैध मान्यता दी है।

हाईकोर्ट के जस्टिस एन. एस. एस. गौड़ा और जस्टिस जे. एल. ओडेद्रा की बेंच ने संजय गढ़वी की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। पिछले तीन दिनों में हाई कोर्ट का यह तीसरा ऐसा फैसला है जहाँ मतदाता सूची में सुधार के निर्देश दिए गए हैं। अदालत ने चुनाव आयोग को आदेश दिया है कि वह अहमदाबाद के एक नागरिक का नाम मतदाता सूची (Electoral Roll) में फिर से शामिल करे ताकि वह आगामी नगर निगम (AMC) चुनावों में मतदान कर सके।

मामला क्या था? (The Dispute)

  • नाम कटना: याचिकाकर्ता संजय गढ़वी का नाम ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से हटा दिया गया था।
  • पुनः आवेदन: उन्होंने 12 मार्च को अपना नाम वापस जोड़ने के लिए आवेदन किया, जिसके लिए उन्हें पोर्टल से डिजिटल पावती (Acknowledgement) और SMS भी मिले।
  • रिजेक्शन: चुनाव अधिकारियों ने 6 अप्रैल को उनका अनुरोध यह कहते हुए खारिज कर दिया कि 17 फरवरी की संशोधित सूची में उनका नाम नहीं था।

हाई कोर्ट का डिजिटल तर्क (Recognition of Digital Signature)

  • अदालत ने चुनाव आयोग की तकनीकी आपत्तियों को दरकिनार कर दिया।
  • वैध प्रमाण: याचिकाकर्ता के पास 12 मार्च के आवेदन का “डिजिटल सिग्नेचर” युक्त प्रमाण है। यह साबित करता है कि उन्होंने समय रहते आवेदन किया था।
  • अधिकारों की रक्षा: यदि मतदाता का नाम विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र (मणिनगर) की सूची में शामिल होने के योग्य है, तो उसे नगर निगम (AMC) चुनावों में मतदान से वंचित नहीं किया जा सकता।
  • अनिवार्य निर्देश: कोर्ट ने चुनाव पंजीकरण अधिकारी को निर्देश दिया कि वार्ड नंबर 44 (खोखरा) की मतदाता सूची में याचिकाकर्ता का नाम तुरंत शामिल किया जाए।

चुनाव आयोग की दलील और समय सीमा

  • विरोध: राज्य चुनाव आयोग (SEC) ने नियमों का हवाला देते हुए विरोध किया था।
  • 10 दिन का नियम: SEC के अनुसार, नामांकन की अंतिम तिथि (11 अप्रैल) से 10 दिन पहले की अवधि के भीतर किसी नए नाम को शामिल करना नियमों के खिलाफ है।
  • सत्यापन की कमी: आयोग ने कहा कि वे यह सत्यापित करने में असमर्थ थे कि 12 मार्च का आवेदन स्वीकार किया गया था या नहीं।
  • कोर्ट का जवाब: हाई कोर्ट ने डिजिटल साक्ष्यों और प्राप्त SMS संदेशों को पर्याप्त आधार माना और आदेश दिया कि संशोधित SIR सूची (जो शुक्रवार को प्रकाशित होनी है) में नाम जोड़ा जाए।

फैसले के मुख्य बिंदु

विषयअदालत का निष्कर्ष
डिजिटल सिग्नेचरइसे आवेदन की एक वैध और कानूनी पावती माना गया।
नामांकन की तिथि11 अप्रैल नामांकन की आखिरी तारीख है, जिससे पहले नाम जोड़ना जरूरी है।
सीखडिजिटल तकनीक के माध्यम से प्राप्त पुष्टियों को सरकारी एजेंसियां नकार नहीं सकतीं।
वोट का अधिकारप्रक्रियात्मक कमियों के कारण किसी भी योग्य नागरिक का मताधिकार नहीं छीना जाना चाहिए।

डिजिटल ट्रांजैक्शन पर मुहर

गुजरात हाई कोर्ट का यह फैसला प्रशासन के लिए एक संदेश है कि सरकारी पोर्टल्स द्वारा जारी डिजिटल पुष्टियां और डिजिटल हस्ताक्षर उतने ही प्रभावी हैं जितने कि कागजी दस्तावेज। यह निर्णय न केवल संजय गढ़वी के लिए जीत है, बल्कि उन सभी नागरिकों के लिए एक मिसाल है जो डिजिटल माध्यमों से सरकारी सेवाओं का लाभ उठाते हैं।

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