Sunday, October 4, 2026
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Doctor’s Guidelines: अदालती गवाह के रूप में पेश होने वाले डॉक्टरों के लिए नियम बनाए सरकार; डॉक्टरों के कर्तव्यों व जिम्मेदारियों को यहां समझाया

मामला सारांश (At a Glance)

पहलूविवरण
माननीय पीठन्यायमूर्ति बी. पुगलेंदी (Madras High Court, Madurai Bench)
संबंधित निकायतमिलनाडु स्वास्थ्य सचिव एवं चिकित्सा शिक्षा निदेशक
मुख्य निर्देशविशेषज्ञ गवाह के रूप में डॉक्टरों के बयान दर्ज करने और सत्यापन हेतु व्यापक गाइडलाइंस जारी करना।
याचिका का परिणाम8 साल के बच्चे के पोक्सो मामले में दोषियों की सजा निलंबन याचिका खारिज।

Doctor’s Guidelines: मद्रास हाईकोर्ट (Madras High Court) की मदुरै पीठ ने तमिलनाडु स्वास्थ्य सचिव और चिकित्सा शिक्षा निदेशक को सभी सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों के लिए एक विस्तृत परिपत्र या दिशा-निर्देश (Guidelines) जारी करने का निर्देश दिया है।

न्यायमूर्ति बी. पुगलेंदी (Justice B Pugalendhi) की एकल पीठ ने रामनाथपुरम में 8 वर्षीय बच्चे के साथ हुए यौन उत्पीड़न (POCSO Case) मामले में दो दोषियों—नंबू कालीस्वरन और सेल्वराज—की 12 साल की सजा को निलंबित करने की याचिका खारिज करते हुए यह आदेश जारी किया। कोर्ट ने कहा है कि अदालतों में विशेषज्ञ गवाह (Expert Witness) के रूप में उपस्थित होने वाले डॉक्टरों के कर्तव्यों और जिम्मेदारियों को स्पष्ट रूप से रेखांकित किया जाना चाहिए।

यहां पढ़ें: Action Against CM: क्या पदस्थ मुख्यमंत्री के खिलाफ अपराध पर CBI जांच कर सकती है?…ED ने सुप्रीम कोर्ट से निर्णय लेने का किया अनुरोध

Doctor’s Guidelines: अदालत की मुख्य टिप्पणियां और निर्देश

  • बयान (Deposition) की बारीकी से समीक्षा अनिवार्य:“विशेषज्ञ (डॉक्टर) को जिरह के दौरान पूछे गए हर सवाल को ध्यान से समझना चाहिए। उन्हें हस्ताक्षर करने से पहले अपने बयान (Deposition) को ध्यान से पढ़ना और सत्यापित करना चाहिए। यदि कोई चूक या अनजाने में हुई त्रुटि नज़र आती है, तो उसे तुरंत अदालत के संज्ञान में लाना चाहिए।”
  • मामले में डॉक्टर की गवाही का विरोधाभास:
    • अदालत ने नोट किया कि जांच करने वाले डॉक्टर की गवाही में गंभीर विसंगतियां (Inconsistencies) थीं। मुख्य परीक्षा में डॉक्टर ने कहा था कि पीड़िता को चोटें आई थीं, लेकिन जिरह (Cross-examination) के दौरान उन्होंने अपने ही बयान का खंडन कर दिया।

Doctor’s Guidelines: मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला 2023 का है, जहां एक ट्रायल कोर्ट ने 8 साल के नाबालिग लड़के के साथ यौन उत्पीड़न के जुर्म में दो व्यक्तियों को पोक्सो अधिनियम (POCSO Act) के तहत 12 साल के कारावास की सजा सुनाई थी। दोषियों ने अपनी सजा के निलंबन और जमानत के लिए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

हाई कोर्ट ने पाया कि चिकित्सा साक्ष्यों में डॉक्टर की लापरवाही या भ्रम के कारण गवाही प्रभावित हुई, जिसके आधार पर कोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग को सभी डॉक्टरों के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) बनाने का आदेश दिया ताकि भविष्य में विशेषज्ञ साक्ष्य की गुणवत्ता प्रभावित न हो।

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