Wednesday, July 15, 2026
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Domestic Violence Act Ruling: पत्नी की सैलरी ₹1.5 लाख प्रति माह से अधिक…बेरोजगार पति से Maintenance देने पर यह फैसला, जानना जरूरी

Domestic Violence Act Ruling: कर्नाटक हाई कोर्ट ने घरेलू हिंसा अधिनियम (Domestic Violence Act) के तहत भरण-पोषण (Maintenance) से जुड़े एक मामले में ‘संतुलित’ फैसला सुनाया।

हाईकोर्ट के जस्टिस वी. श्रीशानंद की बेंच ने 2015 के फैमिली कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा, जिसमें पति को ₹9,000 प्रति माह (₹5,000 किराया + ₹4,000 गुजारा भत्ता) देने का निर्देश दिया गया था। अदालत ने मामले में पति और पत्नी, दोनों की अपीलों को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जहां पत्नी की अच्छी आय ‘मेंटेनेंस बढ़ाने’ के आड़े आती है, वहीं पति का ‘बेरोजगार’ होने का दावा उसे ‘मेंटेनेंस देने’ की जिम्मेदारी से मुक्त नहीं करता।

फैसले के मुख्य बिंदु (Key Highlights)

बिंदुहाई कोर्ट का निष्कर्ष
पत्नी की सैलरी₹1.5 लाख+ आय होने के कारण मेंटेनेंस बढ़ाने की मांग खारिज।
पति की बेरोजगारीसंपत्ति होने और लोन लेने की क्षमता के कारण मेंटेनेंस देने से छूट नहीं।
पुरानी राशि₹9,000 प्रति माह का पुराना आदेश बरकरार रखा गया।
नतीजादोनों पक्षों की ‘रिवीजन पिटीशन’ खारिज।

मामला क्या था? (The Background)

  • शादी और आरोप: जोड़े की शादी 2009 में हुई थी। पत्नी ने दहेज के लिए मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना का आरोप लगाया था।
  • निचली अदालत का आदेश: 2015 में कोर्ट ने पति को ₹9,000 मासिक भुगतान और ₹40,000 मुआवजा देने का आदेश दिया था।

दोनों पक्षों की दलीलें (Conflict of Claims)

  • पति का पक्ष: पति ने दावा किया कि उसका स्कूल बंद हो चुका है और वह ‘बेरोजगार’ है। साथ ही, पत्नी की सैलरी ₹1.5 लाख प्रति माह से अधिक है, इसलिए उसे मेंटेनेंस नहीं मिलना चाहिए।
  • पत्नी का पक्ष: पत्नी ने तर्क दिया कि पति के पास पैतृक संपत्ति है और वह अपनी असल संपत्ति छिपा रहा है। उसने भरण-पोषण की राशि बढ़ाने (Enhancement) की मांग की।

हाई कोर्ट का ‘बैलेंस्ड’ नजरिया

  • अदालत ने दोनों की दलीलों में कमियां पाईं और निम्नलिखित आधारों पर फैसला सुनाया।
  • पत्नी के लिए: कोर्ट ने नोट किया कि पत्नी की वित्तीय स्थिति बहुत अच्छी है और वह कानूनी खर्चों पर भी पर्याप्त पैसा खर्च कर रही है। चूंकि वह एक कामकाजी सदस्य है और पति का पैतृक संपत्ति में हिस्सा अभी तय नहीं हुआ है, इसलिए मेंटेनेंस बढ़ाने का कोई आधार नहीं है।
  • पति के लिए: कोर्ट ने पति के ‘बेरोजगार’ होने के दावे की पोल खोलते हुए कहा कि उसके पास 1 एकड़ जमीन है, जिसे उसने 2019 और 2021 में दो बार गिरवी रखकर कुल ₹4.5 लाख का लोन लिया था।
  • कोर्ट की सख्त टिप्पणी: “यदि पति संपत्ति गिरवी रखकर पैसा उधार ले सकता है लेकिन मेंटेनेंस नहीं दे रहा, तो इसका मतलब है कि वह भुगतान करने का इच्छुक ही नहीं है।”

क्षमता बनाम आवश्यकता

कर्नाटक हाई कोर्ट का यह फैसला यह संदेश देता है कि मेंटेनेंस की राशि तय करते समय कोर्ट ‘वास्तविक क्षमता’ देखता है। यदि पत्नी आर्थिक रूप से स्वतंत्र है, तो वह अत्यधिक राशि की मांग नहीं कर सकती। दूसरी ओर, यदि पति शारीरिक रूप से सक्षम है और उसके पास संपत्ति है, तो वह ‘बेरोजगार’ होने का बहाना बनाकर अपनी कानूनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकता।

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