Wednesday, October 28, 2026
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Existing SC/ST Quota:सरकार की सूची से जाति हटने पर भी नहीं छीन सकते पुराने SC-ST आरक्षण का लाभ…जातिगत आरक्षण पर बड़ा फैसला, पढ़ें

Existing SC/ST Quota: यदि किसी व्यक्ति का जन्म ऐसी जाति में हुआ है जो उस समय अनुसूचित जाति (SC) या अनुसूचित जनजाति (ST) की सूची में शामिल थी, तो उसे मिलने वाले आरक्षण के लाभ उसके पूरे जीवनकाल तक बने रहेंगे।

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन की याचिका खारिज

गुजरात हाईकोर्ट ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) की याचिका खारिज करते हुए यह ऐतिहासिक निर्णय सुनाया है। जस्टिस एन.एस. संजय गोवड़ा और जस्टिस जे.एल. ओडेदरा की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 341 के तहत SC/ST सूची से किसी जाति को बाहर करने का नियम भविष्यलक्षी (Prospective) रूप से लागू होता है, न कि कार्योत्तर (Retrospective) रूप से। अदालत ने कहा, संसद को सूची में संशोधन का अधिकार है, लेकिन वह पहले से निहित (Vested Rights) संवैधानिक अधिकारों को वापस नहीं ले सकती।

मामला क्या है?: मोची समुदाय और EPFO कर्मचारी के डिमोशन का विवाद

मूल मामला: याचिकाकर्ता रंजीत वसंतलाल मकवाना 1995 में SC कोटे के तहत EPFO में लोअर डिवीजन क्लर्क (LDC) के रूप में भर्ती हुए थे। वे गुजरात के ‘मोची’ (Mochi) समुदाय से आते हैं।

2002 का संशोधन: 1976 के अधिनियम के तहत गुजरात के सभी मोची SC वर्ग में आते थे। हालांकि, 2002 में संसद ने संशोधन करके मोची समुदाय के लिए SC आरक्षण को केवल डांग जिले और वलसाड जिले के उमरगाम तालुका तक सीमित कर दिया।

प्रमोशन और डिमोशन: 2003 में मकवाना का प्रमोशन ‘प्रवर्तन अधिकारी’ (Enforcement Officer) के पद पर हुआ। 2012 में EPFO ने उन्हें यह कहते हुए पुराने पद पर रिबर्ट (Demote) कर दिया कि 2002 के संशोधन के बाद वे अब SC कोटे के हकदार नहीं रहे।

CAT का रुख: सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (CAT) ने कर्मचारी के पक्ष में फैसला सुनाया और डिमोशन रद्द कर दिया। इसके खिलाफ EPFO ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी।

गुजरात हाई कोर्ट के मुख्य विधिक निष्कर्ष (Legal Principles)

जन्म के समय की स्थिति ही मान्य होगी

कोर्ट ने कहा कि जाति इंसान पर जन्म से थोपी जाती है जो उसकी मृत्यु तक साथ रहती है। यदि किसी व्यक्ति के जन्म के समय उसकी जाति SC/ST सूची में अधिसूचित थी, तो वह व्यक्ति जीवनभर उसी श्रेणी का लाभ पाने का हकदार रहेगा।

हाई कोर्ट की तीखी टिप्पणी: “कोई व्यक्ति जिस जाति में जन्म लेता है, उसके आधार पर आरक्षण का लाभ पाने का एक ‘निहित अधिकार’ (Vested Right) अर्जित कर लेता है। बाद में संसद द्वारा सूची से जाति हटा दिए जाने पर भी वह बीच राह में (Midway) अपने संवैधानिक अधिकार नहीं खोएगा।”

कार्योत्तर प्रभाव (Retrospective Effect) पर रोक

अदालत ने माना कि संसद के पास अनुच्छेद 341 के तहत सूची में संशोधन या बदलाव का पूरा अधिकार है। लेकिन यह बदलाव केवल उन बच्चों/व्यक्तियों पर लागू होगा जो जाति हटने के बाद पैदा हुए हैं। जो पहले से इसका लाभ उठा रहे थे या जिनका जन्म अधिसूचना से पहले हुआ था, उनसे यह अधिकार नहीं छीना जा सकता।

डिमोशन का फैसला रद्द

कोर्ट ने EPFO की उस दलील को खारिज कर दिया कि प्रमोशन 2003 (संशोधन के बाद) में हुआ था। कोर्ट ने कहा कि मकवाना का SC दर्जा सेवाकाल के दौरान समाप्त नहीं हुआ था, इसलिए उनका प्रमोशन पूरी तरह से वैध था।

केस मैट्रिक्स: गुजरात हाई कोर्ट का फैसला

विधिक और प्रक्रियात्मक बिंदुमामला और अदालत का रुख
मामले का शीर्षककर्मचारी भविष्य निधि संगठन एवं अन्य बनाम रंजीत वसंतलाल मकवाना (EPFO & Ors. v. Ranjit Vasantlal Makwana)
संबंधित अदालतगुजरात उच्च न्यायालय (Gujarat High Court)
माननीय पीठजस्टिस एन.एस. संजय गोवड़ा एवं जस्टिस जे.एल. ओडेदरा
संबंधित संवैधानिक अनुच्छेदअनुच्छेद 341 (अनुसूचित जातियों की सूची व संशोधन)
मुख्य निर्णययाचिका खारिज; जाति हटने के बावजूद पहले से मिले SC/ST आरक्षण लाभ आजीवन सुरक्षित रहेंगे।
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