FOLLOW US FOR MORE LEGAL UPDATES ON WhatsApp
मामले की पृष्ठभूमि: क्या था पूरा विवाद?
- OCI पंजीकरण और सरकार का आरोप:जॉन डेनियल को फरवरी 2015 में OCI कार्ड जारी किया गया था। केंद्र सरकार का आरोप था कि उन्होंने 2017 से 2019 के दौरान बिना आवश्यक सरकारी अनुमति के तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में व्यापक मिशनरी गतिविधियां चलाईं, धार्मिक सभाएं आयोजित कीं और ‘लेमेन्स इवेंजेलिकल फेलोशिप इंटरनेशनल’ (LEFI) का नेतृत्व किया।
- याचिकाकर्ता की दलील:डेनियल ने दावों को खारिज करते हुए कहा कि भारत आने का उनका मुख्य उद्देश्य अपनी 92 वर्षीय बुजुर्ग मां और अन्य रिश्तेदारों से मिलना था। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने कभी किसी मिशनरी गतिविधि में हिस्सा नहीं लिया और न ही धर्मांतरण को बढ़ावा दिया।
- पेश किए गए साक्ष्य:अदालत में केंद्र सरकार ने पोस्टर, इंटरनेट विज्ञापन और आंध्र प्रदेश के तेनाली व स्टुअर्टपुरम में हुई धार्मिक सभाओं की क्लिप पेश की, जिससे यह साबित हुआ कि उन्होंने सार्वजनिक बैठकों और धार्मिक सम्मेलनों में सक्रिय रूप से भाग लिया और उपदेश दिए।
हाईकोर्ट के मुख्य निष्कर्ष और कानूनी तर्क
1. “धर्मांतरण न होने पर भी उपदेश देना मिशनरी कार्य है”:
अदालत ने केंद्र सरकार की 4 मार्च 2021 की अधिसूचना का हवाला देते हुए कहा: “प्रवचन और उपदेश के माध्यम से धार्मिक संदेशों का प्रसार करना अपने आप में एक मिशनरी गतिविधि है, भले ही इसके परिणामस्वरूप कोई धर्मांतरण हुआ हो या न हुआ हो। OCI कार्डधारकों को ऐसी गतिविधियों से पहले पूर्वानुमति लेना वैधानिक रूप से mandatory है।”
2. “याचिकाकर्ता का दावा प्रथम दृष्टया झूठ”:
अदालत ने याचिकाकर्ता के इस बयान को खारिज कर दिया कि वे केवल पारिवारिक कारणों से भारत आए थे: “याचिकाकर्ता ने इस अदालत के समक्ष एक स्पष्ट और व्यापक बयान दिया है कि वे भारत में कभी किसी मिशनरी गतिविधि में शामिल नहीं रहे, जो रिकॉर्ड में मौजूद साक्ष्यों को देखते हुए प्रथम दृष्टया झूठ है।”
चेन्नई: नागरिकता अधिनियम, 1955 (Citizenship Act, 1955) की धारा 7D (ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया / OCI कार्ड पंजीकरण रद्द करने के आधार), गृह मंत्रालय की 4 मार्च 2021 की वैधानिक अधिसूचना (OCI कार्डधारकों द्वारा मिशनरी, पत्रकारिता या पर्वतारोहण गतिविधियों हेतु पूर्व अनुमति की अनिवार्यता), विदेशी विषयक अधिनियम, 1946 (Foreigners Act, 1946), तथा भारत का संविधान के अनुच्छेद 25 (धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार बनाम विदेशी नागरिकों के लिए संप्रभु वीजा शर्तें) के विधिक मानकों पर मद्रास हाईकोर्ट ने एक स्पष्ट और नजीरपरक निर्णय दिया है।
मद्रास हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति डी. भरत चक्रवर्ती (Justice D Bharatha Chakravarthy) की एकल पीठ ने अमेरिकी नागरिक जॉन डैनियल द्वारा दायर रिट याचिका को खारिज करते हुए विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण अधिकारी (FRRO), चेन्नई द्वारा 4 सितंबर 2026 को जारी उस आदेश को पूरी तरह बरकरार रखा, जिसके तहत भारत में अनाधिकृत मिशनरी गतिविधियों में संलिप्त पाए जाने पर याचिकाकर्ता का OCI पंजीकरण रद्द कर दिया गया था।
अदालत ने स्पष्ट व्यवस्था दी कि केंद्र सरकार की 4 मार्च 2021 की अधिसूचना के तहत ‘मिशनरी गतिविधि’ का दायरा केवल धार्मिक धर्मांतरण (Conversions) कराने तक ही सीमित नहीं है। यदि कोई विदेशी या OCI कार्डधारक बिना केंद्र सरकार की पूर्व विशेष अनुमति (Prior Permission) के अपने धर्म का प्रचार या उपदेश (Preaching) भी करता है, तो यह कानून का सीधा उल्लंघन है और OCI कार्ड रद्द करने का पूर्ण आधार बनता है।
उच्च न्यायालय के मुख्य कानूनी निष्कर्ष एवं विधिक टिप्पणियां
1. ‘मिशनरी कार्य केवल धर्मांतरण नहीं, बल्कि उपदेश देना भी पूर्व अनुमति पर निर्भर है’
न्यायमूर्ति डी. भरत चक्रवर्ती ने केंद्र सरकार के 2021 के नियमों और मिशनरी गतिविधियों के विधिक अर्थ का विश्लेषण करते हुए अपने फैसले में स्पष्ट रूप से दर्ज किया: “यह केवल धर्मांतरण (Conversion) कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि एक मिशनरी के रूप में अपने धर्म का प्रचार या उपदेश (Preaching his religion) देने के लिए भी पूर्व अनुमति (Prior Permission) अनिवार्य की गई है। केंद्र सरकार की 4 मार्च 2021 की अधिसूचना के तहत OCI कार्डधारकों को मिशनरी, पत्रकारिता या किसी प्रतिबंधित गतिविधि में शामिल होने से पहले सक्षम प्राधिकारी से विशेष अनुमति प्राप्त करना सांविधिक रूप से आवश्यक है।”
2. ‘याचिकाकर्ता का यह दावा कि वह केवल मां से मिलने आया था, प्रथम दृष्टया झूठ है’:
- जॉन डैनियल ने अदालत के समक्ष दावा किया था कि वह कभी किसी मिशनरी गतिविधि में शामिल नहीं रहा और भारत में उसकी यात्राएं केवल अपनी 92 वर्षीय बुजुर्ग मां और रिश्तेदारों से मिलने के लिए थीं।
- केंद्र सरकार (FRRO) द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों (2017 से 2019 के पोस्टर, बैनर, इंटरनेट सामग्री, और आंध्र प्रदेश के तेनाली व स्टुअर्टपुरम में लेमेन्स इवेंजेलिकल फेलोशिप इंटरनेशनल – LEFI की धार्मिक सभाओं के विज्ञापनों) का अवलोकन करने के बाद पीठ ने तल्ख टिप्पणी की:“याचिकाकर्ता ने इस न्यायालय के समक्ष एक स्पष्ट और व्यापक दावा किया है कि वह भारत में कभी किसी मिशनरी गतिविधि में शामिल नहीं रहा और केवल अपनी माँ, परिवार व मित्रों से मिलने आया था, जो कि प्रथम दृष्टया पूरी तरह से एक सफेद झूठ (On its face is a lie) साबित होता है।”
3. OCI कार्ड रद्द, किंतु नियमित वीजा से आने का विकल्प खुला:
- यद्यपि अदालत ने OCI रद्दीकरण को वैध ठहराया, किंतु मानवीय आधार पर यह स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता भारत में अपनी वृद्ध माँ से मिलने के लिए नियमित आगंतुक वीजा (Regular Visa) हेतु भारतीय दूतावास में आवेदन करने के लिए स्वतंत्र है।
- यदि वह भविष्य में किसी धार्मिक सभा या मिशनरी गतिविधि में भाग लेना चाहता है, तो उसे भारत सरकार से विधिवत पूर्व अनुमति प्राप्त करनी होगी।
मामले की तथ्यात्मक पृष्ठभूमि एवं प्रक्रियात्मक कालक्रम (2015–2026)
| चरण / विवरण | तथ्यात्मक स्थिति एवं पक्षों के दावे |
| याचिकाकर्ता | जॉन डैनियल — अमेरिकी नागरिक (फरवरी 2015 में OCI कार्डधारक के रूप में पंजीकृत)। |
| प्रतिवादी पक्ष | भारत संघ (गृह मंत्रालय) एवं विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण अधिकारी (FRRO), चेन्नई। |
| विवादित आदेश | FRRO, चेन्नई द्वारा 4 सितंबर 2026 को नागरिकता अधिनियम की धारा 7D के तहत OCI पंजीकरण रद्द करने का आदेश। |
| सरकार के आरोप | 1. याचिकाकर्ता ने तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के दूरदराज के गांवों में बिना अनिवार्य अनुमति के धार्मिक सभाएं आयोजित कीं और उपदेश दिए। 2. वह Laymen’s Evangelical Fellowship International (LEFI) नामक संगठन का नेतृत्व कर रहा था और धर्मांतरण को बढ़ावा दे रहा था। |
| याचिकाकर्ता का बचाव | उसने कभी किसी पद पर कार्य नहीं किया और न ही कोई धर्मांतरण कराया; वह केवल अपनी 92 वर्षीय मां और परिवार से मिलने व्यक्तिगत यात्राओं पर आया था। |
| सरकारी साक्ष्य | 2017 से 2019 के मध्य तेनाली (आंध्र प्रदेश) के LEF चर्च और स्टुअर्टपुरम में आयोजित सम्मेलनों के पर्चे, सोशल मीडिया घोषणाएं और सार्वजनिक पोस्टर, जिनमें डैनियल को मुख्य प्रचारक के रूप में दर्शाया गया था। |
| हाईकोर्ट का अंतिम निष्कर्ष | याचिका खारिज; OCI रद्दीकरण का प्रशासनिक आदेश विधि सम्मत; नियमित वीजा का रास्ता खुला रखा गया। |
विधिक एवं संवैधानिक विश्लेषण: ‘नागरिकता अधिनियम की धारा 7D और विदेशी नागरिकों के अधिकार’
- नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा 7D का दायरा:
- धारा 7D केंद्र सरकार को यह संप्रभु अधिकार देती है कि यदि कोई विदेशी/OCI कार्डधारक भारत की संप्रभुता, सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था के विपरीत कार्य करता है या केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित किसी कानून/शर्त का उल्लंघन करता है, तो उसका पंजीकरण निरस्त किया जा सकता है।
- 4 मार्च 2021 की गृह मंत्रालय की अधिसूचना (S.O. 1050(E)) के तहत OCI कार्डधारकों को कई क्षेत्रों में छूट दी गई है, किंतु अनुसंधान, पत्रकारिता, पर्वतारोहण, विदेशी राजनयिक मिशनों में इंटर्नशिप और मिशनरी गतिविधियों के लिए स्पष्ट रूप से विदेश मंत्रालय/गृह मंत्रालय से पूर्व विशेष अनुमति लेना अनिवार्य किया गया है।
- विदेशी नागरिकों और अनुच्छेद 25 की सीमाएं:
- सर्वोच्च न्यायालय ने हंस मुलर बनाम प्रिटेंडेंट, प्रेसीडेंसी जेल [(1955) 1 SCR 1284] और डेविड जॉन हॉपकिंस बनाम भारत संघ में स्थापित किया है कि विदेशी नागरिकों को भारत में प्रवेश करने, रहने या किसी भी गतिविधि को संचालित करने का कोई मौलिक अधिकार नहीं है।
- उनका प्रवास पूरी तरह से सरकार द्वारा जारी वीजा या OCI शर्तों के अधीन होता है। विदेशी नागरिक भारतीय क्षेत्र में बिना सरकार की अनुमति के धार्मिक प्रचारक की भूमिका नहीं निभा सकते।
विधिक विवरण एवं उपस्थित अधिवक्ता
- न्यायालय: मद्रास उच्च न्यायालय (मूल रिट क्षेत्राधिकार)
- केस संदर्भ: जॉन डैनियल बनाम भारत संघ व अन्य [W.P. No. … / 2026]
- पीठासीन न्यायाधीश: न्यायमूर्ति डी. भरत चक्रवर्ती (एकल पीठ)
- आदेश की तिथि: अक्टूबर 2026
- संबद्ध प्रशासनिक प्राधिकारी: विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण अधिकारी (FRRO), चेन्नई (आदेश दिनांक 04.09.2026)
विधिक प्रतिनिधित्व:
- याचिकाकर्ता (जॉन डैनियल) की ओर से: वरिष्ठ अधिवक्ता आर. षणमुगसुंदरम (Senior Advocate R Shanmuga Sundaram), अधिवक्ता ए.जी. शकीना एवं आर. विनायक विष्णु के सहयोग से।
- प्रतिवादी (भारत संघ / FRRO) की ओर से: वरिष्ठ पैनल वकील एस. पद्मा (Senior Panel Counsel S Padma)।
- प्रासंगिक कानून एवं विधिक प्रावधान:
- नागरिकता अधिनियम, 1955 — धारा 7D (OCI पंजीकरण रद्द करने की शक्तियां)
- गृह मंत्रालय (MHA) की वैधानिक अधिसूचना दिनांक 04 मार्च 2021 — OCI कार्डधारकों के अधिकार एवं पूर्व अनुमति की शर्तें
- विदेशी विषयक अधिनियम, 1946 (Foreigners Act, 1946) — विदेशी नागरिकों के भारत में आचरण व वीजा नियमों का विनियमन
- भारत का संविधान — अनुच्छेद 25 (धार्मिक स्वतंत्रता) एवं अनुच्छेद 226 (उच्च न्यायालय का रिट क्षेत्राधिकार)
- संबद्ध न्यायिक सिद्धांत:
- OCI कार्डधारक और मिशनरी गतिविधियों का विधिक मानक: ‘ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया (OCI) कार्डधारकों को भारत में धार्मिक उपदेश देने या प्रचार करने के लिए केंद्र सरकार से पूर्व विशेष अनुमति लेना सांविधिक रूप से अनिवार्य है; मिशनरी गतिविधि केवल मतांतरण कराने तक सीमित नहीं है बल्कि धार्मिक उपदेश देना भी इसमें शामिल है; शर्तों का उल्लंघन कर गोपनीय धार्मिक प्रचार करना नागरिकता अधिनियम की धारा 7D के तहत OCI कार्ड रद्द करने का पूर्णतः वैध आधार है।’
- वर्तमान स्थिति: FRRO चेन्नई द्वारा OCI कार्ड रद्द करने का आदेश मद्रास उच्च न्यायालय द्वारा पूरी तरह बरकरार; अमेरिकी नागरिक जॉन डैनियल की रिट याचिका खारिज; मानवीय आधार पर नियमित आगंतुक वीजा हेतु भारतीय दूतावास में आवेदन करने का विधिक विकल्प शेष।
OCI Registration: मामले का संक्षिप्त विवरण (At A Glance)
| विवरण | जानकारी |
| संबंधित अदालत | मद्रास उच्च न्यायालय (Madras High Court) |
| न्यायाधीश | न्यायमूर्ति डी. भरत चक्रवर्ती (Justice D Bharatha Chakravarthy) |
| मामला/साइटेशन | जॉन डेनियल बनाम भारत संघ (John Daniel Vs Union of India) |
| याचिकाकर्ता | जॉन डेनियल (अमेरिकी नागरिक व OCI कार्डधारक) | प्रतिनिधित्व: वरिष्ठ अधिवक्ता आर. शनमुगा सुंदरम |
| प्रतिवादी/सरकार | भारत सरकार एवं FRRO चेन्नई | प्रतिनिधित्व: वरिष्ठ पैनल काउंसिल एस. पद्मा |
| मूल विवाद | बिना पूर्व अनुमति तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के अंदरूनी इलाकों में धार्मिक सभाएं आयोजित कर ईसाई धर्म का प्रचार-प्रसार करना। |
| लागू अधिसूचना | केंद्र सरकार की 4 मार्च 2021 की अधिसूचना (विदेशी नागरिकों हेतु मिशनरी गतिविधियों के लिए विशेष अनुमति अनिवार्य)। |
| अदालत का फैसला | याचिका खारिज; OCI निरस्त्रीकरण सही ठहराया गया। हालांकि, मां से मिलने के लिए नियमित वीजा हेतु आवेदन करने की छूट दी गई। |

