Monday, October 26, 2026
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Facility For Retd. Judges: न्याय का सम्मान, एकसमान सुविधाएं…रिटायर हाई कोर्ट जजों की सुविधाओं के लिए सुप्रीम निर्देश, पढ़ें यहां

Facility For Retd. Judges: सेवानिवृत्त हाई कोर्ट जजों के जीवन स्तर, सुरक्षा और सम्मान को सुनिश्चित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्र सरकार को एक महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है।

इन सुविधाओं में देशव्यापी एकरूपता होना नितांत आवश्यक है: सुप्रीम अदालत

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना के साथ बैठी खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि इन सुविधाओं में देशव्यापी एकरूपता (Uniformity) होना नितांत आवश्यक है। अदालत ने कहा, यह बेहद चिंताजनक है कि भारत में सेवानिवृत्त (Retired) उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को मिलने वाली सुविधाएं एक राज्य से दूसरे राज्य में पूरी तरह अलग हैं। जबकि कुछ राज्य उन्हें हर आवश्यक सुविधा प्रदान कर रहे हैं, कुछ राज्यों में स्थिति शून्य है। किसी भी सेवानिवृत्त न्यायाधीश के लिए सुविधाओं में इस प्रकार का विरोधाभास अनुचित है और इसे दूर करना अनिवार्य है।

मामला क्या है?: सुविधाओं में भारी असमानता

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान इस बात पर कड़ी आपत्ति जताई कि कैसे देश के विभिन्न राज्यों में रिटायर जजों की स्थिति अलग-अलग है।

अपर्याप्त वित्तीय सहायता: मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने एक उदाहरण देते हुए कहा कि वर्तमान में ‘सचिवीय सेवाओं’ (Secretarial Services), सुरक्षा और यात्रा जैसे खर्चों के लिए दी जाने वाली ₹15,000 की राशि अत्यंत कम है।

सुरक्षा की आवश्यकता: जस्टिस बागची ने सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की सुरक्षा पर जोर देते हुए कहा कि, “एक पुलिस अधिकारी द्वारा 5 वर्षों तक दी जाने वाली सुरक्षा एक हाई कोर्ट जज के लिए उचित है, क्योंकि वे सेवा के दौरान कई संवेदनशील मुद्दों का निपटारा करते हैं।”

सुप्रीम कोर्ट के प्रमुख निर्देश: 2 हफ्ते में समिति का गठन

अदालत ने माना कि चूंकि इन सुविधाओं के लिए केंद्र सरकार भी वित्तीय मदद (Funds) जारी करती है, इसलिए एक समान नीति होना ही एकमात्र समाधान है। कोर्ट ने निम्नलिखित निर्देश जारी किए हैं।

कार्यसमय-सीमा (Deadline)
समिति का गठनकेंद्र सरकार द्वारा अगले 2 सप्ताह के भीतर।
सिफारिशें पेश करनासमिति को अपनी रिपोर्ट 3 महीने के भीतर केंद्र और सुप्रीम कोर्ट के समक्ष रखनी होगी।
अगली सुनवाईसुप्रीम कोर्ट 3 महीने बाद मामले की समीक्षा करेगा।

समिति का मुख्य कार्यभार (Terms of Reference)

अदालत ने स्पष्ट किया है कि गठित होने वाली समिति को केवल सुविधाओं की सूची ही नहीं बनानी है, बल्कि निम्नलिखित पहलुओं पर ठोस नीति तैयार करनी है।

  • एकसमान दिशा-निर्देश: सभी राज्यों में रिटायर जजों को मिलने वाली सुविधाओं में समानता लाना।
  • वित्तीय तंत्र (Financial Mechanism): वित्तीय सहायता के तरीके और भुगतान प्रक्रिया को पारदर्शी और पर्याप्त बनाना।
  • व्यावहारिक जरूरतें: सचिवीय सहायता, स्वास्थ्य सुविधाओं, सुरक्षा और यात्रा से जुड़े भत्तों का पुनर्मूल्यांकन करना ताकि वे वर्तमान महंगाई के अनुरूप हों।

सुप्रीम कोर्ट के इस हस्तक्षेप से यह उम्मीद जगी है कि अब ‘राज्य-वार’ मनमानी खत्म होगी और देशभर के पूर्व न्यायाधीशों को एक सम्मानजनक और सुरक्षित जीवन के लिए समान संसाधन मिल सकेंगे।

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