केस अवलोकन (Case Snapshot)
| पहलू | विवरण |
| प्राधिकरण | केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) |
| जुर्माना राशि | ₹5,00000 (5 लाख रुपये) |
| संबंधित कानून | उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 एवं Toys (Quality Control) Order, 2020 |
| मुख्य मुद्दा | बिना BIS मार्क वाले खिलौनों की लिस्टिंग और ‘Flipkart Assured’ टैग के तहत भ्रामक दावा |
Flipkart Sale: केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के अनिवार्य सुरक्षा मानकों का पालन न करने वाले खिलौनों की बिक्री की अनुमति देने के मामले में ई-कॉमर्स दिग्गज फ्लिपकार्ट (Flipkart) पर ₹5 लाख का जुर्माना लगाया है।
मुख्य आयुक्त निधि खरे और आयुक्त अनुपम मिश्रा की पीठ ने फ्लिपकार्ट की उस दलील को पूरी तरह खारिज कर दिया जिसमें उसने खुद को केवल तीसरे पक्ष (Third-party sellers) और उपभोक्ताओं को जोड़ने वाला एक “तटस्थ मध्यस्थ” (Neutral Intermediary) बताया था।
मुख्य बिंदु
- ‘Flipkart Assured’ टैग ने छीनी तटस्थता: प्राधिकरण ने कहा कि फ्लिपकार्ट अपने एल्गोरिदम का उपयोग करके उत्पादों पर ‘Flipkart Assured’, ‘Best Seller’, ‘Trending’ और ‘AD’ जैसे टैग लगाता है। ऐसे टैग लगाने के बाद यह प्लेटफॉर्म महज एक ‘तटस्थ मध्यस्थ’ नहीं रह जाता।
- भ्रामक गारंटी: सीसीपीए ने माना कि ‘Flipkart Assured’ लेबल से उपभोक्ताओं को यह विश्वास होता है कि प्लेटफॉर्म ने उत्पाद की गुणवत्ता और सुरक्षा की जांच की है। ऐसे लेबल के तहत गैर-प्रमाणित और घटिया खिलौने बेचना उपभोक्ताओं को झूठी गारंटी देने और अनुचित व्यापार व्यवहार (Unfair Trade Practice) के समान है।
- भविष्य के लिए कड़े निर्देश: सीसीपीए ने फ्लिपकार्ट को निर्देश दिया कि वह भविष्य में अपने प्लेटफॉर्म पर ऐसे किसी भी गैर-अनुपालन वाले खिलौने को सूचीबद्ध (List), प्रदर्शित, विज्ञापित या बिक्री के लिए पेश न करे।
मामले की पृष्ठभूमि और जांच
यह मामला खिलौने (गुणवत्ता नियंत्रण) आदेश, 2020 (Toys Quality Control Order, 2020) के तहत स्वतः संज्ञान (Suo Motu) जांच के बाद सामने आया। 1 जनवरी 2021 से प्रभावी इस नियम के अनुसार, 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए बनाए जाने वाले सभी खिलौनों का बीआईएस (BIS) सुरक्षा मानकों के अनुरूप होना और उन पर ‘BIS मानक चिह्न’ (ISI Mark) होना अनिवार्य है। इस मामले में जेएसए एडवोकेट्स एंड सॉलिसिटर्स (JSA Advocates & Solicitors) की ओर से अधिवक्ता धीरज नायर और वृष्टि साहनी ने फ्लिपकार्ट का प्रतिनिधित्व किया।
जांच में निम्नलिखित तथ्य सामने आए:
- फ्लिपकार्ट ने स्वीकार किया कि गुणवत्ता नियंत्रण आदेश लागू होने के बाद उसके प्लेटफॉर्म पर 4 विक्रेताओं ने 1,338 गैर-प्रमाणित खिलौने बेचे।
- इन लेन-देनों से विक्रेताओं ने लगभग ₹5.45 लाख कमाए, जबकि फ्लिपकार्ट को प्लेटफॉर्म फीस के रूप में लगभग ₹1.43 लाख का राजस्व प्राप्त हुआ।
- जांच में यह भी पाया गया कि दिसंबर 2025 तक बिना अनिवार्य बीआईएस प्रमाणीकरण वाले खिलौने प्लेटफॉर्म पर सूचीबद्ध रहे। सीसीपीए ने कहा कि उल्लंघन की वास्तविक जानकारी होने के बावजूद प्लेटफॉर्म ने इन उत्पादों को तत्काल हटाने में लापरवाही बरती।
फ्लिपकार्ट की दलीलें और सीसीपीए का रुख
- सुरक्षित बंदरगाह (Safe Harbour) का दावा: फ्लिपकार्ट ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (IT Act) की धारा 79 के तहत मध्यस्थों को मिलने वाली सुरक्षा (Safe Harbour Protection) का हवाला दिया। कंपनी ने तर्क दिया कि वह न तो इन खिलौनों का निर्माण करती है और न ही इन्हें सीधे बेचती है; बीआईएस प्रमाणन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी पूरी तरह विक्रेताओं की है।
- प्राधिकरण का फैसला: सीसीपीए ने इन तर्कों को खारिज करते हुए कहा कि उपभोक्ता कानून के तहत किसी भी ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म का दायित्व उसकी वास्तविक कार्यप्रणाली और उपभोक्ताओं पर पड़ने वाले प्रभाव से तय होता है। केवल खुद को मध्यस्थ कहकर कोई प्लेटफॉर्म अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकता।
अंतिम निर्देश
प्राधिकरण ने फ्लिपकार्ट को भ्रामक विज्ञापन और अनुचित व्यापार व्यवहार का दोषी ठहराते हुए निर्देश दिया:
- ₹5 लाख का जुर्माना अदा किया जाए।
- अपने प्लेटफॉर्म पर ग्राहक सेवा संपर्क नंबर, ईमेल पता और शिकायत निवारण अधिकारी (Grievance Officer) का विवरण प्रमुखता से प्रदर्शित किया जाए।
- 15 दिनों के भीतर प्राधिकरण के समक्ष अनुपालन रिपोर्ट (Compliance Report) प्रस्तुत की जाए।

