Monday, August 17, 2026
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Forced marriages: जबरन शादी के चलते मंगेतर की हत्या करने वाली महिला को सुप्रीम कोर्ट से राहत…यह है मामला

Forced marriages: सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक की एक महिला शुभा को अपने मंगेतर की हत्या के मामले में राज्यपाल से माफी मांगने की इजाजत दे दी है।

जबरन शादी जैसे मामलों में सुधारात्मक रवैया अपनाना जरूरी

कोर्ट ने कहा कि जबरन शादी जैसे सामाजिक दबावों में अपराध करने वाली महिलाओं के मामलों में सुधारात्मक नजरिया अपनाया जाना चाहिए। शुभा को 2003 में अपने मंगेतर की हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया था। उस वक्त वह 20 साल की कॉलेज स्टूडेंट थी और उसने कई बार परिवार से कहा था कि वह शादी नहीं करना चाहती।

अपराधी को समाज से जोड़ने के लिए सुधारात्मक प्रक्रिया जरूरी: कोर्ट

कोर्ट ने कहा कि इस मामले में महिला पूरी तरह से जिम्मेदार नहीं थी, क्योंकि उस पर समाज और परिवार का दबाव था। ऐसे मामलों में समाज की भी जिम्मेदारी बनती है कि वह सुधार और पुनर्वास की दिशा में काम करे। कोर्ट ने कहा कि अपराधी को समाज से जोड़ने के लिए सुधारात्मक प्रक्रिया जरूरी है।

22 साल पुराने मामले में बदला नजरिया

कोर्ट ने कहा कि इस मामले को 22 साल हो चुके हैं और इस दौरान समाज में महिलाओं के साथ होने वाले भेदभाव और जबरदस्ती को लेकर सोच बदली है। कोर्ट ने माना कि समाज की असमानता, गरीबी, शिक्षा की कमी और टूटी हुई संस्थाएं भी अपराध के लिए जिम्मेदार होती हैं।

सुधार की जरूरत, सजा नहीं

कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में अपराधी को पीड़ित के रूप में देखा जाना चाहिए और उसके लिए सहानुभूतिपूर्ण सुधार, संरचनात्मक सहयोग और बदलाव के मौके दिए जाने चाहिए। समाज को ऐसे लोगों को फिर से मुख्यधारा में लाने की जिम्मेदारी लेनी चाहिए, न कि उन्हें हमेशा के लिए अलग-थलग कर देना चाहिए।

अनुच्छेद 161 के तहत माफी की इजाजत

कोर्ट ने शुभा और उसके साथियों को कर्नाटक के राज्यपाल से माफी मांगने की इजाजत दी है। यह भारतीय संविधान के अनुच्छेद 161 के तहत दी गई है, जिसमें राज्यपाल को सजा माफ करने का अधिकार है। कोर्ट ने कहा कि यह अनुच्छेद सुधार की भावना और संवैधानिक मूल्यों को दर्शाता है।

कोर्ट ने शुभा की गलती को सही नहीं ठहराया

हालांकि कोर्ट ने यह भी साफ किया कि शुभा की गलती को सही नहीं ठहराया जा सकता, क्योंकि उसकी वजह से एक निर्दोष युवक की जान गई। कोर्ट ने कहा कि वह बालिग थी, लेकिन फिर भी खुद के लिए फैसला नहीं ले सकी। इसके बावजूद, कोर्ट ने उसे सुधार का मौका देने की बात कही।

8 हफ्ते की सजा पर रोक

सुप्रीम कोर्ट ने शुभा और उसके साथियों की सजा पर 8 हफ्ते की रोक लगा दी है ताकि वे राज्यपाल से माफी की अर्जी दे सकें। कोर्ट ने उम्मीद जताई कि इस मामले से सुधारात्मक न्याय की दिशा में आगे बढ़ा जा सकेगा।

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