Sunday, September 20, 2026
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HAMA case: विधवा बहू और बच्चों को भरण-पोषण मिलेगा…ससुर और देवर की अपील खारिज की

HAMA case: झारखंड हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने एक विधवा बहू और उसके दो नाबालिग बच्चों को भरण-पोषण देने के फैमिली कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है।

फैमिली कोर्ट ने 11 सितंबर 2023 को दिया था आदेश

हाईकोर्ट ने ससुर और देवर की उस अपील को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने भरण-पोषण देने के आदेश को चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने कहा कि फैमिली कोर्ट ने सभी कानूनी और तथ्यात्मक पहलुओं को ध्यान में रखते हुए सही फैसला दिया है।फैमिली कोर्ट ने 11 सितंबर 2023 को दिए अपने आदेश में विधवा को ₹3000 और उसके दो बच्चों को ₹1000-₹1000 प्रति माह भरण-पोषण देने का निर्देश दिया था। यह आदेश हिंदू दत्तक और भरण-पोषण अधिनियम (HAMA), 1956 की धारा 19 और 22 के तहत दिया गया था।

पति की मौत के बाद घर से निकाला गया

पीड़िता ने बताया कि उसकी शादी 2007 में हुई थी और उसके दो बच्चे हैं 13 साल का बेटा और 3 साल की बेटी। पति की मौत 24 जनवरी 2022 को हो गई। इसके बाद ससुराल वालों ने उसे नौकरानी की तरह रखा, खाना और दवा तक नहीं दी। पति द्वारा बनाए गए घर से उसे और बच्चों को निकाल दिया गया। उसके जरूरी दस्तावेज जैसे पासबुक, आधार कार्ड, पैन कार्ड और पति का डेथ सर्टिफिकेट भी छीन लिया गया।

कमाई और संपत्ति के बावजूद नहीं किया पालन-पोषण

महिला ने दावा किया कि ससुर और देवर राजमिस्त्री का काम करते हैं और सालाना करीब ₹2 लाख की आमदनी होती है। उनके पास 500 मन धान का उत्पादन होता है। इसके बावजूद उन्होंने महिला और बच्चों की देखभाल नहीं की। महिला ने ₹10,000 प्रति माह अपने लिए और ₹5000-₹5000 प्रति माह बच्चों के लिए भरण-पोषण की मांग की थी।

गवाहों ने महिला के दावे को सही बताया

महिला ने खुद के अलावा अपने भाई, पिता, बहन और बेटे को गवाह के रूप में पेश किया। सभी ने उत्पीड़न, घर से निकाले जाने और ससुराल वालों की आमदनी की पुष्टि की। दूसरी ओर, ससुर और देवर ने आरोपों से इनकार किया और कहा कि वे महिला और बच्चों को घर वापस बुलाने को तैयार हैं। उन्होंने यह भी कहा कि संपत्ति संयुक्त है और वे खुद भी आर्थिक रूप से कमजोर हैं।

फैमिली कोर्ट ने सभी साक्ष्यों की जांच की

फैमिली कोर्ट ने सभी साक्ष्यों की जांच के बाद माना कि महिला और बच्चे ससुराल वालों के संरक्षण में नहीं हैं और उन्हें भरण-पोषण मिलना चाहिए। कोर्ट ने यह भी माना कि पति की संपत्ति पर ससुराल वालों का कब्जा है, लेकिन वे महिला और बच्चों की देखभाल नहीं कर रहे हैं।

हाईकोर्ट ने कहा- फैमिली कोर्ट का फैसला कानूनी रूप से सही

हाईकोर्ट ने कहा कि फैमिली कोर्ट ने सभी दस्तावेजों और गवाहों की गहराई से जांच की है और यह पाया कि महिला और बच्चे मृतक की संपत्ति से भरण-पोषण पाने के हकदार हैं। कोर्ट ने कहा कि यह फैसला किसी भी तरह से गलत नहीं है और इसमें हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है। अंत में कोर्ट ने कहा: “फैमिली कोर्ट, जमताड़ा द्वारा 11 सितंबर 2023 को दिए गए फैसले में कोई त्रुटि नहीं है, इसलिए यह अपील खारिज की जाती है।”

यह रहे केस के अहम बिंदु

  1. विधवा और बच्चों को ₹5000 प्रति माह भरण-पोषण मिलेगा।
  2. पति की मौत के बाद ससुराल वालों ने घर से निकाला।
  3. महिला ने उत्पीड़न और संपत्ति से बेदखली का आरोप लगाया।
  4. फैमिली कोर्ट ने सभी साक्ष्यों के आधार पर फैसला सुनाया।
  5. हाईकोर्ट ने कहा- मृत पति की संपत्ति से विधवा और बच्चे भरण-पोषण के हकदार हैं।
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