Wednesday, November 4, 2026
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Future Of Child: शिक्षा Vs भावनाएं…बच्चा इंग्लिश बोलता है, दादा-दादी मलयालम; भविष्य के लिए UK जाना जरूरी!, पढ़कर मामला समझिए

Future Of Child: केरल हाई कोर्ट के जस्टिस शोभा अन्नम्मा ईपन और जस्टिस एस. मनु की बेंच ने एक सीमा पार कस्टडी विवाद (Cross-border Custody Dispute) में ऐतिहासिक फैसला सुनाया।

यह कानूनी लड़ाई तब शुरू हुई जब अगस्त 2023 में UK में एक घरेलू दुर्घटना में बच्चे की मां की मृत्यु हो गई। इसके बाद पिता बच्चे को केरल ले आए और अपने माता-पिता (दादा-दादी) के पास छोड़ दिया। एक 6 वर्षीय बच्चे को उसकी मौसी के साथ यूनाइटेड किंगडम (UK) भेजने का आदेश दिया है। कोर्ट ने पाया कि बच्चा केरल में पिछले नौ महीनों से “कैद” जैसी स्थिति में था और उसे स्कूल भी नहीं भेजा जा रहा था।

कोर्ट की जांच और बच्चे से बातचीत (Interaction in Chambers)

  • हाई कोर्ट ने बच्चे को चैंबर में बुलाया और सभी पक्षों से बातचीत की। कोर्ट के सामने कुछ चौंकाने वाले तथ्य आए।
  • भाषा की बाधा: बच्चा पूरी तरह अंग्रेजी (English) में बात करता है, जबकि उसके दादा-दादी को अंग्रेजी नहीं आती। इससे बच्चे के लिए संवाद करना मुश्किल हो रहा था।
  • शिक्षा का अभाव: कोर्ट ने नोट किया कि जुलाई 2025 के बाद से बच्चे को स्कूल नहीं भेजा गया था और वह घर के अंदर ही सीमित होकर रह गया था।
  • बच्चे की इच्छा: मासूम ने अपनी मौसी (Maternal Aunt) के साथ जाने की इच्छा व्यक्त की, जो खुद भी UK में रहती हैं और बच्चे की कस्टडी के लिए कई महीनों से केरल में थीं।

“बच्चे का कल्याण सर्वोपरि” (Welfare is Paramount)

  • अदालत ने माता-पिता या रिश्तेदारों के कानूनी दावों से ऊपर बच्चे के भविष्य को रखा।
  • UK वापसी का रास्ता साफ: कोर्ट ने मौसी को ‘अंतरिम कस्टडी’ (Interim Custody) देते हुए बच्चे को वापस लेसेस्टर (UK) ले जाने की अनुमति दी, जहाँ वह पहले पढ़ रहा था।
  • दस्तावेजों का आदेश: पिता (जो खुद UK में रहते हैं) को निर्देश दिया गया कि वे बच्चे का पासपोर्ट और OCI कार्ड 25 अप्रैल तक हर हाल में उपलब्ध कराएं ताकि यात्रा की औपचारिकताएं पूरी हो सकें।

मुलाकात और कस्टडी का ढांचा (Structured Framework)

  • कोर्ट ने पिता के अधिकारों और मौसी की जिम्मेदारी के बीच संतुलन बनाया है।
  • साप्ताहिक कस्टडी: जब तक बच्चा भारत में है, पिता को हर हफ्ते शुक्रवार शाम 4 बजे से सोमवार शाम 4 बजे तक बच्चे को अपने पास रखने का अधिकार दिया गया।
  • UK में सुरक्षा नियम: मौसी को बच्चे की पूरी देखभाल सुनिश्चित करनी होगी। छुट्टियों के दौरान कस्टडी दोनों परिवारों के बीच साझा की जाएगी। UK से बाहर किसी भी यात्रा के लिए दोनों पक्षों की आपसी सहमति अनिवार्य होगी।

केस के मुख्य बिंदु (Key Highlights)

बिंदुविवरण
बच्चे की उम्र6 वर्ष (जन्म: 21 मई, 2019)।
विवाद का कारणमां की मृत्यु के बाद पिता द्वारा बच्चे को दादा-दादी के पास छोड़ना।
कोर्ट का निष्कर्षभाषा और शिक्षा के अभाव में बच्चे का विकास रुक गया था।
अंतिम आदेशमौसी को कस्टडी मिली; बच्चा UK में शिक्षा जारी रखेगा।

राष्ट्रीय सीमाओं से परे न्याय

केरल हाई कोर्ट का यह फैसला एक नजीर है कि कस्टडी के मामलों में भौगोलिक सीमाएं या माता-पिता के अधिकार बच्चे की ‘मानसिक और शैक्षिक स्थिति’ से बड़े नहीं होते। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि एक बच्चा जो अपनी मूल भाषा (अंग्रेजी) के कारण अपने वर्तमान परिवेश (केरल) में घुल-मिल नहीं पा रहा और जिसकी शिक्षा प्रभावित हो रही है, उसका कल्याण उसके पुराने और परिचित परिवेश (UK) में ही संभव है।

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