Wednesday, June 17, 2026
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HauzKhas Deer Park: पार्क नहीं, पिंजरा था वो…हौज खास हिरणों के मामले में सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी; जानें क्यों कम की गई संख्या

HauzKhas Deer Park: सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने दिल्ली के हौज खास स्थित ए. एन. झा डियर पार्क (A. N. Jha Deer Park) से सैकड़ों चित्तीदार हिरणों को स्थानांतरित (Translocate) करने के फैसले को बरकरार रखा है।

यह कानूनी लड़ाई ‘न्यू दिल्ली नेचर सोसाइटी’ द्वारा दायर की गई थी, जो हिरणों को राजस्थान के टाइगर रिजर्व में भेजे जाने का विरोध कर रही थी। अदालत ने स्पष्ट किया कि हिरण जैसे वन्यजीवों को छोटे बाड़ों में कैद रखना पारिस्थितिक रूप से गलत है और उन्हें प्राकृतिक आवास में रहने का अधिकार है।

केवल 38 हिरण ही क्यों? (The Science of Carrying Capacity)

  • सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी (CEC) की 6 मार्च, 2026 की रिपोर्ट के आधार पर कोर्ट ने यह संख्या तय की है।
  • ओवरकैपेसिटी (अत्यधिक आबादी): डियर पार्क का घेरा लगभग 10.26 एकड़ में फैला है। सेंट्रल जू अथॉरिटी (CZA) के मानकों के अनुसार, इतनी जगह में केवल 19 जोड़े (38 हिरण) ही स्थायी रूप से और स्वस्थ तरीके से रह सकते हैं।
  • आबादी में विस्फोट: प्रभावी नियंत्रण उपायों के अभाव में हिरणों की संख्या “घातीय” (Exponentially) रूप से बढ़ गई थी, जिससे वहां कुप्रबंधन और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं पैदा हो रही थीं।

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य निर्देश (Key Directions)

  • समयबद्ध स्थानांतरण: अतिरिक्त हिरणों को राजस्थान के मुकुंदरा हिल्स और रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व जैसे सुरक्षित अभयारण्यों में वैज्ञानिक प्रोटोकॉल के तहत स्थानांतरित किया जाएगा।
  • सॉफ्ट रिलीज (Soft Release): हिरणों को सीधे जंगल में छोड़ने के बजाय पहले उन्हें वहां के वातावरण के अनुकूल (Acclimatization) बनाया जाएगा और उनकी निगरानी के लिए ‘टेलीमेट्री कॉलर’ का उपयोग किया जाएगा।
  • संरक्षित वन का दर्जा: कोर्ट ने साफ कर दिया कि हिरणों के जाने के बाद भी हौज खास के इस क्षेत्र की प्रकृति नहीं बदली जाएगी। यह भविष्य में भी हमेशा ‘संरक्षित वन’ (Protected Forest) के रूप में बना रहेगा।

कोर्ट का तर्क: पिंजरा वन्यजीवों के लिए नहीं

जस्टिस विक्रम नाथ ने टिप्पणी की कि हम इस तथ्य से बेखबर नहीं रह सकते कि हिरण एक वन्यजीव प्रजाति है, उन्हें पिंजरों या सीमित बाड़ों में तब तक नहीं रखा जाना चाहिए जब तक कि कोई असाधारण और अनिवार्य पारिस्थितिक कारण न हो। अदालत ने यह भी नोट किया कि अगस्त 2021 में इस पार्क का ‘मिनी जू’ का लाइसेंस समाप्त हो गया था, जिसके बाद यहां बड़ी संख्या में हिरणों को रखना कानूनी रूप से भी गलत था।

केस के मुख्य बिंदु (Key Highlights)

बिंदुविवरण
पार्क का नामए. एन. झा डियर पार्क, हौज खास (दिल्ली)।
स्थानांतरण स्थलमुकुंदरा हिल्स और रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व (राजस्थान)।
रिटेंशन कैपकेवल 38 हिरणों को पार्क में रहने की अनुमति।
अगली सुनवाई19 जनवरी, 2027 (नेशनल गाइडलाइंस की अनुपालन रिपोर्ट के लिए)।

पारिस्थितिक संतुलन की जीत

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला शहरी मनोरंजन और वन्यजीव संरक्षण के बीच एक स्पष्ट रेखा खींचता है। पार्क में हिरणों को देखना लोगों के लिए सुखद हो सकता है, लेकिन उनके स्वास्थ्य और प्राकृतिक प्रवृत्ति के लिए उन्हें खुले जंगलों की आवश्यकता है। यह स्थानांतरण न केवल हिरणों को बेहतर जीवन देगा, बल्कि राजस्थान के जंगलों में ‘Predator-Prey’ (शिकारी-शिकार) के संतुलन को भी मजबूत करेगा।

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