Monday, August 17, 2026
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HAND RICKSHAWS: आजादी के 78 साल बाद भी महाराष्ट्र के माथेरान में हाथ से खींचे जा रहे रिक्शे…शीर्ष कोर्ट हतप्रभ

HAND RICKSHAWS: देश की आजादी के 78 साल बाद भी महाराष्ट्र के माथेरान में हाथ से खींचे जाने वाले रिक्शा चलने पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताई है।

मानव गरिमा के खिलाफ है प्रथा

शीर्ष कोर्ट ने इसे अमानवीय बताते हुए महाराष्ट्र सरकार को आदेश दिया है कि वह इस प्रथा को 6 महीने के भीतर पूरी तरह बंद करे और इसकी जगह ई-रिक्शा का विकल्प अपनाए। मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई, जस्टिस के विनोद चंद्रन और जस्टिस एन वी अंजारिया की बेंच ने कहा कि यह प्रथा मानव गरिमा के खिलाफ है और संविधान में दिए गए सामाजिक और आर्थिक न्याय के वादे को कमजोर करती है। कोर्ट ने कहा कि गरीबी के कारण लोग ऐसा काम करने को मजबूर होते हैं, लेकिन आर्थिक मजबूरी भी मानव श्रम के अपमान का कारण नहीं बन सकती।

ई-रिक्शा किराए पर देने का सुझाव

कोर्ट ने गुजरात के केवड़िया की तर्ज पर माथेरान में भी स्थानीय लोगों को ई-रिक्शा किराए पर देने का सुझाव दिया। केवड़िया में सरदार पटेल की सबसे ऊंची प्रतिमा के पास स्थानीय लोगों को ई-रिक्शा किराए पर दिए गए हैं।

45 साल पुराने फैसले का हवाला

कोर्ट ने 1979 के ‘आजाद रिक्शा पुलर यूनियन बनाम पंजाब राज्य’ केस का हवाला देते हुए कहा कि तब भी कोर्ट ने कहा था कि साइकिल रिक्शा जैसी प्रथाएं सामाजिक न्याय के वादे के खिलाफ हैं। कोर्ट ने अफसोस जताया कि 45 साल बाद भी माथेरान में एक इंसान द्वारा दूसरे इंसान को खींचने की प्रथा जारी है।

माथेरान में गाड़ियों पर रोक, पर्यावरणीय संवेदनशील क्षेत्र

कोर्ट ने कहा कि माथेरान एक पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील हिल स्टेशन है, जहां पर्यावरण की वजह से गाड़ियों पर रोक है। यहां पर्यटकों और सामान की ढुलाई के लिए हाथ से खींचे जाने वाले रिक्शा का इस्तेमाल होता है।

पैवर ब्लॉक बिछाने का आदेश

कोर्ट ने आदेश दिया कि दास्तुरी नाका से शिवाजी प्रतिमा तक पैवर ब्लॉक बिछाए जाएं ताकि ई-रिक्शा चल सकें। हालांकि, आंतरिक सड़कों और व्यापारिक मार्गों पर पैवर ब्लॉक नहीं बिछाए जाएंगे।

रिक्शा खींचने वालों की पहचान होगी

कोर्ट ने माथेरान मॉनिटरिंग कमेटी को आदेश दिया कि वह असली रिक्शा खींचने वालों की पहचान करे। ई-रिक्शा की संख्या भी कमेटी तय करेगी। बाकी ई-रिक्शा आदिवासी महिलाओं और अन्य स्थानीय लोगों को दिए जा सकते हैं ताकि उनकी आजीविका बनी रहे।

फंड की कमी बहाना नहीं चलेगा

कोर्ट ने साफ किया कि फंड की कमी को इस योजना को लागू न करने का बहाना नहीं बनाया जा सकता। राज्य सरकार को इस अमानवीय प्रथा को खत्म करने में पूरी मदद करनी होगी।

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