Tuesday, September 29, 2026
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Constitutional Values: न्यायपालिका किसी पक्ष या विपक्ष के लिए फैसला नहीं करती; CJI सूर्यकांत बोले— सुप्रीम कोर्ट संविधान का संरक्षक है, यहां पढ़ें

Constitutional Values: सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI सूर्यकांत) ने एक टीवी साक्षात्कार में देश की न्याय प्रणाली, न्यायिक सक्रियता (Judicial Activism) और मामलों के लंबित रहने की समस्या पर खुलकर बात की। CJI ने स्पष्ट किया कि भारतीय न्यायपालिका किसी भी राजनीतिक पक्ष या विपक्ष के लिए काम नहीं करती, बल्कि इसके सभी फैसले पूरी तरह से संवैधानिक मूल्यों (Constitutional Values) और संविधान की सुरक्षा के प्रति समर्पित होते हैं।

🏛️ मुख्य न्यायाधीश (CJI सूर्यकांत) के वक्तव्य के मुख्य बिंदु

1. संविधान ही सर्वोच्च शक्ति (Constitution is Supreme)

  • CJI ने कहा कि भारत में सबसे बड़ी शक्ति देश का संविधान है।
  • समता, गरिमा, कानून का शासन (Rule of Law), लोकतांत्रिक मूल्य और स्वतंत्र न्यायपालिका जैसी मूलभूत अवधारणाएं संविधान का हिस्सा हैं।
  • उन्होंने जोर देकर कहा: “संविधान का मूल ढांचा (Basic Structure) हमेशा एक जैसा रहेगा। परिस्थितियों के बदलने के बावजूद इसमें बदलाव नहीं किया जा सकता, बल्कि इसे उसी सम्मान और आदर के साथ और मजबूत किया जाना चाहिए।”

2. न्यायिक सक्रियता (Judicial Activism) पर दृष्टिकोण

  • समाज के कमजोर और वंचित वर्गों के अधिकारों की रक्षा को लेकर न्यायिक सक्रियता पर उठने वाले सवालों पर CJI ने कहा:
    • देश की एक बड़ी आबादी सामाजिक और आर्थिक रूप से इतनी सक्षम नहीं है कि वह अपने अधिकारों के लिए आसानी से अदालत का दरवाजा खटखटा सके।
    • ऐसे मामलों में जनहित याचिका (PIL) या सुओ मोटो (Suo Motu – स्वतः संज्ञान) के जरिए कदम उठाना न्यायपालिका का संवैधानिक दायित्व है।
  • उन्होंने स्पष्ट किया: “जब कोई व्यक्ति अपने व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं, बल्कि समाज के किसी बड़े वंचित वर्ग के अधिकारों के हनन को अदालत के सामने लाता है, तो न्यायपालिका उस अधिकार को बहाल करती है। इसे अन्य रूप में नहीं देखा जाना चाहिए; यह हमारी संवैधानिक जिम्मेदारी का ही हिस्सा है।”

3. मुकदमों की पेंडेंसी और डॉकेट मैनेजमेंट (Docket Management)

  • पदभार ग्रहण करने के बाद से मामलों के त्वरित निपटारे (Case Pendency) को प्राथमिकता देने की बात दोहराते हुए CJI ने बताया कि इसके लिए विशेष योजनाएं लागू की गई हैं:
    • संविधान पीठों का गठन (Constitutional Benches): देश पर व्यापक प्रभाव डालने वाले संवेदनशील और महत्वपूर्ण मामलों के त्वरित निपटारे के लिए संविधान पीठें गठित की गईं।
    • मामलों की ग्रुपिंग (Grouping of Cases): एक जैसी कानूनी प्रकृति वाले हजारों मामलों को समूहों में वर्गीकृत कर एक साथ सुना गया, जिससे न केवल सुप्रीम कोर्ट, बल्कि उच्च न्यायालयों और जिला न्यायालयों में भी मुकदमों का बोझ तेजी से कम हुआ।

संक्षिप्त परिचय (Profile Note)

  • सर्वोच्च न्यायालय में पदोन्नति: 24 मई 2019
  • भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) के रूप में शपथ: 24 नवंबर 2025
  • मुख्य प्राथमिकताएं: संविधान के मूल ढांचे की सुरक्षा, न्यायिक पहुंच (Access to Justice) और मुकदमों के पेंडेंसी को कम करना।
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