NEET Paper Leak: NEET-UG 2026 पेपर लीक विवाद और परीक्षा प्रणाली की गहन जांच के बीच केंद्र सरकार द्वारा विनीत जोशी की जगह नरेश पाल गंगवार को नया उच्च शिक्षा सचिव (Higher Education Secretary) नियुक्त किए जाने पर एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है।
विपक्ष का गंभीर आरोप: खुद हितों के टकराव के आरोपों का सामना कर रहे अफसर
विपक्ष ने आरोप लगाया है कि सरकार ने जांच के घेरे में घिरे अधिकारियों को बचाने और बदलने की प्रक्रिया में एक ऐसे अधिकारी को जिम्मेदारी दी है जो खुद हितों के टकराव (Conflict of Interest) के आरोपों का सामना कर रहे हैं। 1994 बैच के राजस्थान कैडर के आईएएस (IAS) अधिकारी नरेश पाल गंगवार को केंद्र सरकार ने शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग (Department of Higher Education) का नया सचिव नियुक्त किया है।
शैक्षणिक एवं प्रशासनिक पृष्ठभूमि
शैक्षणिक योग्यता: गंगवार ने आईआईटी रुड़की (IIT Roorkee) से इलेक्ट्रॉनिक्स एवं संचार इंजीनियरिंग में बी.टेक, आईआईटी दिल्ली (IIT Delhi) से कम्युनिकेशन एंड रडार इंजीनियरिंग में एम.टेक, और राजस्थान विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में एम.ए. की उपाधि प्राप्त की है।
राजस्थान में अनुभव: अपने प्रशासनिक करियर में उन्होंने राजस्थान के कई जिलों (जैसे टोंक, सवाई माधोपुर, झालावाड़, जोधपुर और भरतपुर) में जिलाधिकारी (Collector) के रूप में काम किया है।
शिक्षा क्षेत्र में अनुभव: वे राजस्थान सरकार में स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव/प्रमुख सचिव रह चुके हैं, जहाँ उन्होंने शिक्षा नीतियों और प्रशासनिक सुधारों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
अन्य प्रमुख भूमिकाएं: उन्होंने पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में संयुक्त सचिव के रूप में काम किया है तथा राष्ट्रीय सौर मिशन के शुरुआती दौर (2010–2014) में सौर ऊर्जा नीतियों को विकसित करने में अहम योगदान दिया था।
पूर्व प्रभार: उच्च शिक्षा सचिव की जिम्मेदारी संभालने से पहले, गंगवार मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के तहत पशुपालन एवं डेयरी विभाग के सचिव के रूप में कार्यरत थे।
पदभार हस्तांतरण: नरेश पाल गंगवार को विनीत जोशी (1992 बैच) की जगह उच्च शिक्षा सचिव बनाया गया है। विनीत जोशी का तबादला पंचायती राज मंत्रालय में सचिव के रूप में किया गया है।
मुख्य बिंदु और घटनाक्रम
विनीत जोशी का तबादला: NTA के पूर्व महानिदेशक, CBSE अध्यक्ष और UGC के कार्यवाहक अध्यक्ष रह चुके वरिष्ठ आईएएस अधिकारी विनीत जोशी को उच्च शिक्षा विभाग से हटाकर पंचायती राज मंत्रालय में स्थानांतरित कर दिया गया है।
16 करोड़ रुपये की NHB सब्सिडी विवाद: जून 2026 में सामने आई मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, नए शिक्षा सचिव नरेश पाल गंगवार की पत्नी, मां और बेटे से जुड़े राजस्थान स्थित खीरा (Cucumber) खेती के पॉलीहाउस प्रोजेक्ट्स को राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (National Horticulture Board – NHB) से 1.16 करोड़ रुपये से अधिक की सब्सिडी मिली।
हितों के टकराव (Conflict of Interest) का आरोप: जिस अवधि में गंगवार के परिवार को ये केंद्रीय और राज्य सब्सिडी प्राप्त हुईं, उस दौरान वे राजस्थान राज्य में कृषि विभाग और बाद में केंद्र में वरिष्ठ प्रशासनिक पदों पर कार्यरत थे। हालांकि जांच में कोई सीधे तौर पर अवैधता साबित नहीं हुई है, लेकिन प्रशासनिक नैतिकता और हितों के टकराव पर सवाल उठे हैं।
यह रही राजनीतिक प्रतिक्रियाएं एवं विपक्ष के हमले
पवन खेड़ा (कांग्रेस): “सरकार के पास छिपाने के लिए साफ चेहरे खत्म हो गए हैं”
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए लिखा, नरेंद्र मोदी सरकार के पास छिपने के लिए साफ-सुथरे चेहरे खत्म हो गए हैं। विनीत जोशी को बचाने के लिए सरकार ने ऐसे व्यक्ति को शिक्षा सचिव बनाया है जो खुद जांच के दायरे में होना चाहिए। जब गंगवार कृषि सचिव थे, तब उनकी पत्नी, मां और बेटे को 1.16 करोड़ रुपये की NHB सब्सिडी मिली। यह दिखाता है कि इस सरकार में भ्रष्टाचार कितना गहरा है।
पी. चिदंबरम (पूर्व केंद्रीय मंत्री): “एक ही अधिकारी पर 5 पदों का बोझ क्यों?”
वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने विनीत जोशी के तबादले पर टिप्पणी करते हुए एक ही अधिकारी को कई शीर्ष पदों का प्रभार देने पर सवाल उठाए, इसमें
उच्च शिक्षा सचिव, स्कूली शिक्षा सचिव, UGC अध्यक्ष (कार्यवाहक), CBSE अध्यक्ष, NTA चेयरमैन/महानिदेशक का है। चिदंबरम ने कहा कि भले ही कुछ पद कार्यवाहक (Acting) क्षमता में दिए गए हों, लेकिन पूरी शिक्षा प्रणाली का बोझ एक ही व्यक्ति पर डालना प्रशासनिक विफलता को दर्शाता है।
CJP का राष्ट्रव्यापी आंदोलन और सरकार का रुख
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का दबाव: NEET-UG 2026 पेपर लीक विवाद के बाद CJP के नेतृत्व में शुरू हुआ छात्र आंदोलन अब एक बड़े राष्ट्रव्यापी विरोध का रूप ले चुका है। आंदोलनकारी छात्र केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
सरकार के सुधारात्मक कदम: बढ़ते दबाव के बीच केंद्र सरकार ने पेपर लीक से निपटने के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट्स (Fast-track Courts) के गठन और Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Act के तहत कठोर कार्रवाई की प्रतिबद्धता जताई है।
भाजपा की प्रतिक्रिया: कांग्रेस के इन तीखे आरोपों और गंगवार की नियुक्ति पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेताओं ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है।
नए उच्च शिक्षा सचिव नरेश पाल गंगवार का पूर्व कार्यकाल
राजस्थान में शिक्षा सचिव कार्यकाल के दौरान अदालती/प्रशासनिक विवाद
संविदा कर्मियों और समायोजन का मुद्दा: राजस्थान सरकार में प्राथमिक/स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव रहने के दौरान सर्व शिक्षा अभियान (SSA) और लोक जुम्बिश परियोजना के संविदा कर्मचारियों (Placement Agency Employees) के समायोजन/सेवा निरंतरता को लेकर बड़ा नीतिगत विवाद हुआ था।
कोर्ट की अवमानना संबंधी याचिकाएं: इस फैसले को लेकर प्रभावित कर्मचारियों ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। अदालत के आदेशों के अनुपालन और प्रशासनिक नीतिगत फैसलों की वैधता को लेकर उनके खिलाफ राजस्थान उच्च न्यायालय में अवमानना (Contempt) याचिकाएं दर्ज की गई थीं (जैसे अरुणा जैन बनाम नरेश पाल गंगवार मामला)।
राजनीतिक बयानबाजी और व्यक्तिगत आरोप
तीखी बयानबाजी: उनकी नियुक्ति के बाद सोशल मीडिया और मीडिया बयानों में विपक्षी हलकों व कुछ प्रदर्शनकारी गुटों द्वारा उनके पिछले प्रशासनिक कार्यकाल के फैसलों को लेकर कड़े और व्यक्तिगत आरोप भी लगाए गए हैं।
मामले का त्वरित सारांश (Key Summary)
| पहलू | प्रशासनिक/राजनीतिक विवरण |
| नया पदभार | नरेश पाल गंगवार (नए उच्च शिक्षा सचिव) |
| निवर्तमान सचिव | विनीत जोशी (स्थानांतरित होकर पंचायती राज मंत्रालय भेजे गए) |
| विवाद का कारण | परिवार को कृषि/बागवानी विभाग से ₹1.16 करोड़ की NHB सब्सिडी |
| विपक्ष का रुख | कांग्रेस (पवन खेड़ा, पी. चिदंबरम) द्वारा हितों के टकराव का आरोप |
| छात्र आंदोलन | CJP द्वारा NEET-UG 2026 पेपर लीक पर राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन व शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग |
NEET-UG 2026 पेपर लीक विवाद के बीच शिक्षा मंत्रालय में शीर्ष स्तर पर हुआ यह प्रशासनिक फेरबदल सरकार की मुश्किलों को कम करने के बजाय और बढ़ाता दिख रहा है। सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को होने वाली सुनवाई और दिल्ली हाई कोर्ट की कार्यवाहियों के बीच यह मुद्दा संसद और सड़कों दोनों पर गर्माया हुआ है।

