Thursday, October 1, 2026
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ITAT States: आपको पता है…धारा 44AD के तहत बैंक में जमा सभी राशियां स्वचालित रूप से Taxable Income नहीं है, खबर को पूरा पढ़ें

मामला सारांश (At a Glance)

पहलूविवरण
न्यायाधिकरणइनकम टैक्स अपीलीय ट्रिब्यूनल (ITAT), सूरत पीठ
करदाताजाकिर याकूबभाई पटेल (फल व्यापारी, सूरत)
संबंधित धाराआयकर अधिनियम की धारा 44AD (Presumptive Taxation)
मुख्य सिद्धांतबैंक डिपॉजिट अपने आप करयोग्य आय नहीं बनता; विभाग को स्रोत और प्रकृति की जांच करनी होगी।

ITAT States: आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (ITAT) की सूरत पीठ ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि धारा 44AD के तहत अनुमानित कर योजना (Presumptive Taxation Scheme) का चयन करने वाले करदाताओं के बैंक खातों में जमा प्रत्येक राशि को स्वचालित रूप से करयोग्य आय नहीं माना जा सकता।

आयकर अधिकारियों को किसी भी प्रकार की अतिरिक्त कर मांग (Addition) करने से पहले जमा राशि के स्रोत (Source) और प्रकृति की उचित जांच करनी होगी।

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मामला क्या था? (Case Background)

  • करदाता: सूरत के फल व्यापारी जाकिर याकूबभाई पटेल।
  • घोषित आय: व्यापारी ने आय विवरण (ITR) में धारा 44AD के तहत ₹14.57 लाख की अनुमानित आय घोषित की थी।
  • कर अधिकारी (AO) का आकलन: नोटबंदी (Demonetisation) के दौरान बैंक खाते में जमा नकद के आधार पर आकलन अधिकारी ने व्यापारी की कुल आय बढ़ाकर ₹5.09 करोड़ (घोषित आय से 34 गुना अधिक) कर दी।

कर अधिकारी द्वारा जोड़े गए प्रमुख आंकड़े:

  1. बैंक जमा और क्रेडिट: ₹2.43 करोड़
  2. असुरक्षित ऋण (Unsecured Loans): ₹71.87 लाख
  3. ऋण एवं अग्रिम (Loans and Advances): ₹1.79 करोड़

ITAT के समक्ष करदाता की दलीलें और पाई गई कमियां

  1. गलत आंकड़े: व्यापारी ने ट्रिब्यूनल को दिखाया कि कर अधिकारी द्वारा नकद जमा के आंकड़े पूरी तरह गलत थे। वास्तविक नकद जमा ₹2.43 करोड़ न होकर केवल ₹89.16 लाख था।
  2. पुराने ऋण: जिन असुरक्षित ऋणों को चालू वर्ष की आय में जोड़ा गया था, वे वास्तव में पिछले वर्षों से चले आ रहे थे।
  3. अदालत का अवलोकन: ITAT ने पाया कि आकलन अधिकारी के आंकड़े बैंक रिकॉर्ड से मेल नहीं खा रहे थे और डेटा में गंभीर त्रुटियां थीं।

धारा 44AD और ITAT के मुख्य निष्कर्ष

  • धारा 44AD का उद्देश्य: यह छोटे व्यापारियों के लिए एक अनुमानित कर व्यवस्था है, जिसमें हर रोज के खर्चों का विस्तृत बहीखाता (Bookkeeping) रखना अनिवार्य नहीं होता। इसमें टर्नओवर के एक निश्चित प्रतिशत को आय मान लिया जाता है।
  • स्रोत की जांच अनिवार्य: ट्रिब्यूनल ने माना कि केवल बैंक खाते में पैसा जमा होने का मतलब यह नहीं है कि वह पूरी तरह से अघोषित आय है। आयकर विभाग को उसके स्रोत (Source and Nature) की पुष्टि करनी होगी।
  • अंतिम निर्देश: ITAT ने कर अधिकारी के मनमाने आकलन को रद्द करने के बजाय मामले को पुनः सही आंकड़ों के सत्यापन और जांच के लिए आकलन अधिकारी (AO) को रिमांड (Send Back) कर दिया।

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