मुख्य संकेतक और अदालती फैसले (Key Highlights)
- पूर्ण प्रतिबंध या 24 घंटे छूट नहीं:पीठ ने तीखी और स्पष्ट टिप्पणी करते हुए कहा:“हम स्पष्ट कर देना चाहते हैं कि हम न तो पूर्ण प्रतिबंध के लिए सहमत होंगे और न ही 24 घंटे पटाखे फोड़ने की अनुमति देंगे। पूर्ण प्रतिबंध से लोगों की भावनाएं प्रभावित होती हैं, और दिन भर अनुमति देने से बुजुर्गों, बीमारों और बच्चों सहित अन्य सभी जीवों पर भारी असर पड़ता है। हमें ऐसा समाधान खोजना होगा जिसमें हम एक निश्चित समय (Time Limit) और अनुमत पटाखों की श्रेणी तय कर सकें।”
- सशर्त ‘लड़ी’ (Joint Firecrackers) को अनुमति देने का सुझाव स्वीकारा:अदालत ने केंद्र सरकार और CSIR-NEERI (राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान) की उस सिफारिश को स्वीकार करने का रुख अपनाया, जिसमें शर्तों के साथ लड़ी (Joint Firecrackers/Ladi) के निर्माण और बिक्री को अनुमति देने की बात कही गई है।
- शर्तें: लड़ी में पटाखों के आकार, संख्या और उनके फटने के बीच के समय अंतराल पर कड़े नियम लागू होंगे। (उल्लेखनीय है कि 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने लड़ी पर रोक लगाई थी)।
- ग्रीन क्रैकर्स में ‘बेरियम’ के इस्तेमाल पर टेस्ट (Outdoor Testing):अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) ऐश्वर्या भाटी ने कोर्ट को बताया कि जनरेशन-2 ग्रीन क्रैकर्स में ‘बेरियम’ के प्रभाव को जांचने के लिए चार शहरों (दिल्ली, भोपाल, कोलकाता और चेन्नई) में आउटडोर टेस्टिंग की जा रही है। अदालत ने इसके लिए 15 अक्टूबर 2026 तक का समय दिया है।
- दिल्ली-NCR का मुद्दा अलग से सुना जाएगा:पटाखा निर्माताओं ने मांग की कि दिल्ली-एनसीआर को देश के बाकी हिस्सों से अलग न रखा जाए। हालांकि, याचिकाकर्ताओं ने इसका विरोध करते हुए कहा कि दिल्ली में दीवाली के दौरान पराली जलाने (Crop Burning) और अन्य कारणों से प्रदूषण का स्तर बेहद खतरनाक हो जाता है।
- अदालत ने नोट किया कि दिल्ली-एनसीआर में पटाखों का मुद्दा ‘एम.सी. मेहता बनाम भारत संघ’ मामले में भी लंबित है। इसलिए पीठ ने वकीलों को मुख्य न्यायाधीश (CJI सूर्यकांत) की अगुवाई वाली पीठ के समक्ष दोनों मामलों को एक साथ जोड़ने के लिए मेंशन करने की छूट दी।
नई दिल्ली: आगामी त्योहारी सीजन (दशहरा व दिवाली) से पूर्व पटाखों के निर्माण, बिक्री, फोड़ने की समय-सीमा और वायु प्रदूषण के बीच संतुलन साधने के राष्ट्रीय मुद्दे पर शीर्ष अदालत ने एक व्यावहारिक और ‘संतुलित दृष्टिकोण’ (Balanced Approach) अपनाने के स्पष्ट संकेत दिए हैं।
न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह (संबद्ध पीठ: न्यायमूर्ति पी.बी. वराले) की खंडपीठ ने वर्ष 2015 से लंबित ऐतिहासिक अर्जुन गोपाल बनाम भारत संघ मामले की सुनवाई करते हुए पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) तथा CSIR-NEERI की उन सिफारिशों को सैद्धांतिक रूप से स्वीकार कर लिया, जिनके तहत कड़े विनिर्देशों के साथ नई पीढ़ी के संयुक्त पटाखों—‘लड़ी’ (Joint Crackers / Series Crackers)—के निर्माण की अनुमति देने का प्रस्ताव रखा गया है। सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि वह न तो पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध (Complete Ban) लगाने के पक्ष में है और न ही 24 घंटे लगातार आतिशबाजी की बेलगाम छूट दी जा सकती है।
इसके साथ ही अदालत ने ‘जेनरेशन-2 ग्रीन पटाखों’ में बेरियम (Barium) के पर्यावरणीय प्रभाव पर चार शहरों (दिल्ली, भोपाल, कोलकाता, चेन्नई) में चल रहे आउटडोर परीक्षणों की अंतिम रिपोर्ट पेश करने के लिए केंद्र सरकार को 15 अक्टूबर 2026 तक का समय प्रदान किया है।
सुप्रीम कोर्ट की मुख्य टिप्पणियां: ‘संतुलित समाधान’ की आवश्यकता
1. ‘न पूर्ण प्रतिबंध, न 24 घंटे छूट; तय समय में अनुमति ही समाधान’
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं द्वारा पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की दलीलों पर न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश ने स्पष्ट किया:
“हम इसे बिल्कुल स्पष्ट कर देना चाहते हैं। हम न तो आपकी पूर्ण प्रतिबंध (Total Ban) की मांग से सहमत होने जा रहे हैं, और न ही हम लोगों को 24 घंटे पटाखे फोड़ने की अनुमति देने वाले हैं। इसके दो स्पष्ट कारण हैं: पहला, पूर्ण प्रतिबंध लगाने से लोगों की धार्मिक और सामाजिक भावनाएं आहत होंगी।
- दूसरा, पूरे दिन और रात आतिशबाजी की अनुमति देने से अन्य सभी जीवित प्राणियों—विशेषकर बच्चों, बुजुर्गों और बीमार व्यक्तियों के स्वास्थ्य पर अत्यंत गंभीर प्रभाव पड़ेगा।
- इसलिए हमें एक ऐसा समाधान निकालना होगा जिसके तहत हम आतिशबाजी के लिए एक निश्चित समय (Specified Timing) निर्धारित कर सकें और यह विनिर्दिष्ट कर सकें कि किन स्वीकृत पटाखों का उपयोग किया जा सकता है।”
प्रमुख तकनीकी पहलू और अदालती निर्देश
1. न्यू-जेनरेशन संयुक्त पटाखों (Ladis) को सशर्त मंजूरी:
- 2018 का पूर्ववर्ती प्रतिबंध: वर्ष 2018 में शीर्ष अदालत ने अत्यधिक ध्वनि, वायु प्रदूषण और ठोस कचरे के कारण लड़ियों (Joint/Series Crackers) के निर्माण और बिक्री पर पूर्ण रोक लगा दी थी।
- CSIR-NEERI की नई सिफारिश: अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) ऐश्वर्या भाटी ने अदालत को सूचित किया कि वैज्ञानिकों और तकनीकी विशेषज्ञों ने नई पीढ़ी की लड़ियों के लिए कड़े सुरक्षा मानक तय किए हैं:
- शेल्स/ट्यूब के आकार (Shell Size) का सख्त नियमन।
- एक लड़ी में पटाखों की कुल संख्या (Number of Shells) की सीमा।
- लगातार धमाकों के बीच का समय अंतराल (Time Interval between successive bursts)।
- ध्वनि मानक को अधिकतम 125 डेसिबल (dB) तक सीमित रखना।
- खंडपीठ ने केंद्र और नीरी (NEERI) की इस सिफारिश को स्वीकार करने की मंशा जताई कि केवल लाइसेंस प्राप्त निर्माता ही इन निर्धारित फॉर्मूलेशन के तहत लड़ियों का उत्पादन कर सकेंगे।
2. जेनरेशन-2 ग्रीन पटाखों में बेरियम परीक्षण (15 अक्टूबर तक मोहलत):
- बेरियम नाइट्रेट के उपयोग पर लगी रोक की समीक्षा के तहत केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) और CSIR-NEERI देश के चार अलग-अलग वायु-गुणवत्ता क्षेत्रों—दिल्ली, भोपाल, कोलकाता और चेन्नई—में आउटडोर फील्ड परीक्षण कर रहे हैं।
- एएसजी ऐश्वर्या भाटी ने पीठ को अवगत कराया कि प्रयोगशाला परीक्षण पूरे हो चुके हैं, परंतु खुले वातावरण में पड़ने वाले प्रभाव का आकलन करने के लिए आउटडोर डेटा संकलित किया जा रहा है।
- अदालत ने इस वैज्ञानिक अध्ययन की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने हेतु केंद्र को 15 अक्टूबर 2026 तक का समय दिया।
3. दिल्ली-एनसीआर का अलग मुद्दा: CJI की पीठ के समक्ष मेंशन की अनुमति
- एमसी मेहता केस से ओवरलैपिंग: पटाखों के निर्माताओं और व्यापारियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता के. परमेश्वर और वरिष्ठ अधिवक्ता जे. साई दीपक ने तर्क दिया कि पूरे देश के लिए एक समान व्यवस्था होनी चाहिए और दिल्ली-एनसीआर को इससे अलग-थलग नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने रद्द लाइसेंसों की बहाली की भी मांग की।
- दूसरी ओर, याचिकाकर्ताओं की अधिवक्ता पूजा धर ने दलील दी कि पराली जलाने और मौसमी प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण दिवाली के समय दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण का स्तर भयावह हो जाता है, इसलिए यहां पूर्ण प्रतिबंध की आवश्यकता है।
- अदालत का दृष्टिकोण: खंडपीठ ने संज्ञान लिया कि एमसी मेहता बनाम भारत संघ मामले में 15 अक्टूबर 2025 को तीन जजों की पीठ ने दिल्ली-एनसीआर में सीमित शर्तों के साथ ग्रीन पटाखों की अनुमति दी थी। चूंकि दोनों मामलों में मुद्दे परस्पर टकरा रहे हैं, अतः अदालत ने पक्षकारों को छूट दी कि वे भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष मामले को एक साथ सूचीबद्ध करने हेतु औपचारिक मेंशनिंग (Mentioning) कर सकते हैं। वर्तमान पीठ ने दिल्ली-एनसीआर पर कोई अलग अंतरिम आदेश पारित करने से परहेज किया।
विधिक एवं संवैधानिक संतुलन
- अनुच्छेद 21 बनाम अनुच्छेद 25:
- सर्वोच्च न्यायालय का यह दृष्टिकोण संविधान के अनुच्छेद 21 (स्वच्छ पर्यावरण, प्रदूषण-मुक्त वायु और स्वास्थ्य का अधिकार) तथा अनुच्छेद 25 (धार्मिक स्वतंत्रता और सांस्कृतिक रीति-रिवाजों का सम्मान) के मध्य एक संवैधानिक सामंजस्य स्थापित करने का प्रयास है।
- सतत विकास और एहतियाती सिद्धांत (Precautionary Principle):
- अदालत ने माना कि संपूर्ण प्रतिबंध से अक्सर अवैध और अत्यधिक प्रदूषणकारी पटाखों की तस्करी बढ़ जाती है। इसके स्थान पर वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित ‘ग्रीन क्रैकर्स’ को निश्चित समय-सीमा के भीतर अनुमति देना पर्यावरण संरक्षण और सार्वजनिक अनुशासन दोनों को सुदृढ़ करता है।
विधिक विवरण
- केस संदर्भ: अर्जुन गोपाल व अन्य बनाम भारत संघ व अन्य [रिट याचिका (सिविल) संख्या 728/2015 – भारत का सर्वोच्च न्यायालय]
- संबद्ध कार्यवाही: एमसी मेहता बनाम भारत संघ (दिल्ली-एनसीआर वायु प्रदूषण वाद)
- पीठ: न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह / न्यायमूर्ति पी.बी. वराले
- विधिक प्रतिनिधित्व:
- याचिकाकर्ताओं की ओर से: अधिवक्ता पूजा धर
- केंद्र सरकार / MoEFCC की ओर से: अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) ऐश्वर्या भाटी
- पटाखा निर्माताओं व व्यापारियों की ओर से: वरिष्ठ अधिवक्ता के. परमेश्वर, वरिष्ठ अधिवक्ता जे. साई दीपक, अधिवक्ता प्रणव सचदेवा
- प्रासंगिक कानून एवं विधिक प्रावधान:
- वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1981
- पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986
- विस्फोटक नियम, 2008 (Explosives Rules) एवं PESO विनिर्देश
- भारत का संविधान – अनुच्छेद 21 (जीवन व स्वास्थ्य का अधिकार), अनुच्छेद 25 (धार्मिक स्वतंत्रता) एवं अनुच्छेद 48A (पर्यावरण की सुरक्षा व सुधार)
- संबद्ध ऐतिहासिक न्यायिक नजीरें:
- अर्जुन गोपाल बनाम भारत संघ (2018, सुप्रीम कोर्ट) — ‘पारंपरिक पटाखों पर रोक, ग्रीन पटाखों की शुरुआत और आतिशबाजी हेतु 2 घंटे की समय-सीमा का निर्धारण।’
- वेल्लोर सिटिजन्स वेलफेयर फोरम बनाम भारत संघ (1996, सुप्रीम कोर्ट) — ‘प्रदूषण निवारण में “एहतियाती सिद्धांत” (Precautionary Principle) और “प्रदूषक भुगतान करे” का सिद्धांत लागू होता है।’
- ध्वनि प्रदूषण (V) इन री (2005, सुप्रीम कोर्ट) — ‘रात 10 बजे से सुबह 6 बजे के बीच ध्वनि प्रदूषण फैलाने वाले पटाखों पर प्रतिबंध।’
- अंतिम निर्देश: नई पीढ़ी की लड़ियों (Joint Crackers) के निर्माण की तकनीकी सिफारिश स्वीकृत; बेरियम प्रभाव की सीपीसीबी/नीरी रिपोर्ट दाखिल करने हेतु 15 अक्टूबर 2026 तक का समय; मामले की अगली सुनवाई 15 अक्टूबर 2026 को नियत।
Series Crackers: मामले का संक्षिप्त विवरण (At A Glance)
| विवरण | जानकारी |
| संबंधित अदालत | सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court of India) |
| पीठ | न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश, न्यायमूर्ति ए.जी. मसीह और न्यायमूर्ति पी.बी. वराले |
| मुख्य विषय | दीवाली पर पटाखों के उपयोग, लड़ी (Joint Crackers) और बेरियम-आधारित ग्रीन क्रैकर्स पर नियम |
| अदालत का दृष्टिकोण | निर्धारित समय सीमा (Specified Timing) और स्वीकृत पटाखों के साथ संतुलित छूट |
| अगली सुनवाई की तिथि | 15 अक्टूबर 2026 |

