मुख्य बिंदु और गंभीर आरोप (Key Highlights)
- ‘संदिग्ध गतिविधियां और नेतृत्व में विफलता’: जस्टिस मेहता ने 2 अगस्त के अपने पहले पत्र में लिखा कि उन्हें कार्यवाहक CJ संजीव प्रकाश शर्मा की न्यायिक निष्ठा (Integrity) पर सवाल उठाने वाली कई शिकायतें मिली हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जस्टिस शर्मा साथी जजों को CJI से अपनी निकटता का हवाला देकर प्रशासनिक या तबादले की कार्रवाई की धमकियां देते हैं।
- रोस्टर और शक्तियों का दुरुपयोग: 10 अगस्त के पत्र में जस्टिस मेहता ने विशिष्ट मामलों का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि कार्यवाहक CJ कुछ चुनिंदा वकीलों और पक्षों पर मेहरबानी दिखा रहे हैं। उन्होंने उदयपुर की ‘कीमती जमीनों’ (Priceless Lands) से जुड़े मामलों को जोधपुर (मुख्य पीठ) के अधिकार क्षेत्र से हटाकर जयपुर पीठ में अपने खुद के सामने सूचीबद्ध (Post) करने पर सवाल उठाए।
- रिटायरमेंट के करीब ‘छक्के’ मारना: CJI सूर्यकांत की एक मौखिक टिप्पणी का जिक्र करते हुए जस्टिस मेहता ने इशारा किया कि सेवानिवृत्ति (26 सितंबर 2026) के नजदीक आते ही जस्टिस शर्मा जल्दबाजी में कुछ खास मुकदमों का निपटारा कर रहे हैं।
- न्यायिक अधिकारियों का उत्पीड़न: 17 अगस्त की चिट्ठी में आरोप लगाया गया कि जस्टिस शर्मा व्यक्तिगत रंजिश के चलते जिला न्यायपालिका के अधिकारियों को निशाना बना रहे हैं। इसमें एक सेवारत राजस्थान हाईकोर्ट जज की पत्नी (जो वरिष्ठ जिला जज हैं) के खिलाफ प्रतिशोध की भावना से की गई कार्रवाई का भी जिक्र है।
- जोधपुर कोर्ट कॉम्प्लेक्स के उद्घाटन में बाधा: Jodhpur District Court (Metro) की नई इमारत पिछले एक साल से पूरी तरह तैयार थी, लेकिन जस्टिस शर्मा ने एकतरफा फैसला लेते हुए इसके उद्घाटन पर रोक लगा दी और व्यापक बदलाव के आदेश दिए। बाद में CJI सूर्यकांत के हस्तक्षेप से इसका उद्घाटन हो सका।
- नियुक्तियों में भाई-भतीजावाद (Nepotism): राष्ट्रीय कानूनी सेवा प्राधिकरण (NALSA) के कार्यकारी अध्यक्ष जस्टिस विक्रम नाथ को भेजी गई एक शिकायत का हवाला देते हुए, परमानेंट लोक अदालतों और मध्यस्थों (Mediators) की नियुक्ति में रिश्तेदारों व नजदीकी दोस्तों को लाभ पहुंचाने के आरोप भी लगाए गए हैं।
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति संदीप मेहता ने मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत को पत्रों की एक श्रृंखला लिखकर राजस्थान उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश (Acting Chief Justice) न्यायमूर्ति संजीव प्रकाश शर्मा के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए हैं और उन्हें तुरंत पद से हटाने तथा किसी अन्य हाईकोर्ट से नियमित मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने का आग्रह किया है।
राजस्थान हाईकोर्ट से पदोन्नत होकर शीर्ष अदालत पहुंचे जस्टिस मेहता ने 2 अगस्त, 10 अगस्त और 17 अगस्त 2026 को लिखे पत्रों में चेतावनी दी कि कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ कार्रवाई न करना न्यायपालिका और संस्था के हित के पूरी तरह खिलाफ है।
सत्यनिष्ठा और साथी जजों को धमकाने के आरोप
2 अगस्त 2026 को लिखे अपने पहले पत्र में जस्टिस मेहता ने गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा: “जस्टिस शर्मा द्वारा कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की शक्तियों का ऐसा उपयोग करने के अनगिनत उदाहरण हैं जो संस्था के प्रमुख के लिए पूरी तरह अशोभनीय हैं… मुझे जस्टिस एस.पी. शर्मा के न्यायिक कामकाज के संबंध में कई शिकायतें मिली हैं, जो प्रथम दृष्टया उनकी सत्यनिष्ठा (Integrity) पर गंभीर संदेह पैदा करती हैं।”
जस्टिस मेहता ने आगे लिखा: “राजस्थान यात्राओं के दौरान राजस्थान हाईकोर्ट के कई जजों ने मुझसे मिलकर जस्टिस एस.पी. शर्मा के व्यवहार पर गहरा दुख और पीड़ा व्यक्त की। जस्टिस शर्मा भारत के मुख्य न्यायाधीश के साथ अपनी कथित नजदीकी का दावा करते हुए अपने साथी जजों को तबादले सहित प्रतिशोधात्मक कार्रवाई की बार-बार धमकियां देते हैं।”
‘इतनी लंबी ढील क्यों?’: 10 महीने के लंबे कार्यकाल और तबादले पर सवाल
जस्टिस मेहता ने उठाया कि जस्टिस शर्मा 26 सितंबर 2026 को सेवानिवृत्त होने वाले हैं और वे पिछले 10 महीनों से कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के पद पर बने हुए हैं:
- पूर्व आचरण और कोलेजियम का फैसला: जस्टिस शर्मा को 2016 में राजस्थान हाईकोर्ट में नियुक्त किया गया था और 2022 में पटना हाईकोर्ट स्थानांतरित किया गया था। मार्च 2023 में सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम ने उनके पूर्व आचरण के मद्देनजर स्वास्थ्य आधार पर राजस्थान वापसी के अनुरोध को खारिज कर दिया था।
- मई 2026 में वापसी: इसके बावजूद मई 2026 में कोलेजियम ने उन्हें पुनः राजस्थान हाईकोर्ट में प्रत्यावर्तित (Repatriate) कर दिया। जस्टिस मेहता ने सवाल किया कि 28 मार्च 2023 की स्पष्ट सिफारिश के बावजूद जस्टिस शर्मा को “इतनी लंबी ढील” (Long Rope) क्यों दी गई।
न्यायिक अधिकारियों के साथ प्रतिशोध और प्रशासनिक मनमानी के आरोप
- न्यायिक अधिकारियों का उत्पीड़न: जस्टिस मेहता ने आरोप लगाया कि जस्टिस शर्मा व्यक्तिगत रंजिश के चलते राज्य के न्यायिक अधिकारियों को प्रताड़ित कर रहे हैं। उन्होंने एक सेवारत हाईकोर्ट जज के संदेश का हवाला दिया, जिनकी पत्नी (जिला न्यायपालिका की वरिष्ठतम अधिकारी) के खिलाफ कथित तौर पर बदले की भावना से कार्रवाई की गई।
- जोधपुर कोर्ट भवन के उद्घाटन पर रोक: जोधपुर मेट्रो जिला न्यायालय के नवनिर्मित 40-कोर्ट वाले भवन का काम एक साल से पूरा होने के बावजूद जस्टिस शर्मा ने इसका उद्घाटन रोक दिया और भारी बदलाव के आदेश दिए, जबकि कई अदालतें किराए के कमरों में चल रही थीं। जस्टिस मेहता ने इसे “प्रशासनिक अक्षमता और संस्था-विरोधी दृष्टिकोण” बताया। (बाद में CJI सूर्य कांत के हस्तक्षेप से इसका उद्घाटन हुआ)।
वकीलों के प्रति पक्षपात और रोस्टर शक्तियों का दुरुपयोग
10 अगस्त के पत्र में जस्टिस मेहता ने विशिष्ट मामलों का हवाला देते हुए पक्षपात और रोस्टर के दुरुपयोग के आरोप लगाए:
- खास वकीलों को अनुचित लाभ: कुछ विशेष वकीलों द्वारा पेश किए गए मामलों में 457 दिनों की देरी को माफ करने और राहत देने के आदेशों पर सवाल उठाए गए।
- उदयपुर की जमीनों से जुड़ा मामला: उदयपुर की अत्यधिक मूल्यवान जमीनों से जुड़ी अपीलों को जस्टिस शर्मा ने अपने ही एक पूर्व फैसले के विपरीत, मुख्य पीठ जोधपुर के बजाय जयपुर पीठ में अपनी ही बेंच के समक्ष सूचीबद्ध कराया।
- सेवानिवृत्ति से पहले जल्दबाजी: जस्टिस मेहता ने CJI की उस टिप्पणी का संदर्भ दिया जिसमें सेवानिवृत्ति की पूर्व संध्या पर जजों द्वारा “छक्के मारने” की प्रवृत्ति की बात कही गई थी, और आरोप लगाया कि जस्टिस शर्मा सेवानिवृत्ति से ठीक पहले चुनिंदा मामलों को जल्दबाजी में निपटाने का प्रयास कर रहे हैं।
नियुक्तियों में भाई-भतीजावाद (Nepotism) के आरोप
25 जुलाई 2026 को एक वकील द्वारा नालसा के कार्यकारी अध्यक्ष जस्टिस विक्रम नाथ को भेजी गई शिकायत (जिसकी प्रति जस्टिस मेहता को भी भेजी गई थी) का हवाला देते हुए आरोप लगाया गया कि:
- परमानेंट लोक अदालतों और मध्यस्थता केंद्रों में करीबी रिश्तेदारों और दोस्तों को नियुक्त किया गया।
- जयपुर मेट्रो नंबर 1 के लिए नियुक्त मध्यस्थ जस्टिस शर्मा के बचपन के दोस्त और उनकी बेटी के ससुर हैं।
कोलेजियम और राष्ट्रपति से तत्काल कार्रवाई की मांग
जस्टिस मेहता ने CJI सूर्य कांत से पुरजोर अनुरोध किया है कि सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम की तत्काल बैठक बुलाई जाए, राजस्थान उच्च न्यायालय में किसी अन्य राज्य से नियमित मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया जाए और जस्टिस एस.पी. शर्मा को उनके अशोभनीय आचरण के कारण तुरंत राज्य से बाहर स्थानांतरित किया जाए।
इन पत्रों की प्रतियां सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम के अन्य वरिष्ठ सदस्यों और भारत की राष्ट्रपति को भी आवश्यक कार्रवाई हेतु भेजी गई हैं।
‘इतना लंबा मौका क्यों दिया गया?’
जस्टिस मेहता ने अपने पत्र में सवाल उठाया कि मार्च 2023 में सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने जस्टिस शर्मा के पुराने आचरण को देखते हुए उन्हें पटना से राजस्थान वापस भेजने की याचिका खारिज कर दी थी और पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ट्रांसफर करने का प्रस्ताव रखा था। इसके बावजूद मई 2026 में उन्हें वापस राजस्थान भेजकर 10 महीने तक कार्यवाहक CJ बनाए रखने पर सवाल खड़े होते हैं।
जस्टिस संदीप मेहता ने CJI और सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम से तत्काल बैठक कर राजस्थान हाईकोर्ट में नियमित मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति करने और संस्था की गरिमा बचाने की गुहार लगाई है। इन पत्रों की प्रतियां राष्ट्रपति और कॉलेजियम के अन्य सदस्यों को भी भेजी गई हैं।
एट ए ग्लान्स (At a Glance of Letters)
| विवरण | जानकारी |
| पत्र लिखने वाले न्यायाधीश | न्यायमूर्ति संदीप मेहता (Justice Sandeep Mehta, सुप्रीम कोर्ट) |
| पत्र प्राप्तकर्ता | भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत (CJI Surya Kant) |
| आरोपों के घेरे में | न्यायमूर्ति संजीव प्रकाश शर्मा (Acting CJ, राजस्थान हाईकोर्ट) |
| मुख्य आरोप | शक्तियों का दुरुपयोग, पक्षपात, न्यायिक अधिकारियों का उत्पीड़न और मनमाने प्रशासनिक फैसले |
| जस्टिस शर्मा की सेवानिवृत्ति | 26 सितंबर 2026 |

