Monday, August 10, 2026
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MNNIT PROFESSOR DISMISSAL: प्रोफेसर की बर्खास्तगी का 18 साल पुराना फैसला रद्द…कहा—सजा जरूरत से ज्यादा सख्त

MNNIT PROFESSOR DISMISSAL: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (MNNIT) के एक प्रोफेसर की साल 2006 में हुई बर्खास्तगी को रद्द कर दिया है।

मामले को यौन उत्पीड़न’ की श्रेणी में रखने से इनकार

कंप्यूटर साइंस विभाग के लेक्चरर राजेश सिंह पर एक पूर्व छात्रा ने भावनात्मक और शारीरिक शोषण का आरोप लगाया था। अदालत ने इस रिश्ते को ‘कदाचार’ (Misconduct) तो माना, लेकिन इसे ‘यौन उत्पीड़न’ की श्रेणी में रखने से इनकार कर दिया।

यह था पूरा मामला

शिकायत 2003 में एक पूर्व छात्रा द्वारा दर्ज कराई गई थी, जिसने साल 2000 में अपनी पढ़ाई पूरी कर ली थी। छात्रा का आरोप था कि पढ़ाई के दौरान प्रोफेसर ने जबरन शारीरिक संबंध बनाए। हालांकि, यह शिकायत छात्रा के संस्थान छोड़ने के तीन साल बाद और प्रोफेसर की किसी अन्य महिला से सगाई होने के बाद की गई थी।

कोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणियां

  • सहमति से संबंध: न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की पीठ ने पाया कि दोनों के बीच संबंध आपसी सहमति से थे, जो संस्थान छोड़ने के तीन साल बाद तक जारी रहे।
  • विवाह का असफल प्रस्ताव: कोर्ट ने नोट किया कि यह विवाद मुख्य रूप से अंतर-धार्मिक मतभेदों के कारण विवाह का प्रस्ताव विफल होने से उपजा था, न कि किसी आपराधिक मंशा से।
  • अनुपातहीन सजा: अदालत ने कहा कि प्रोफेसर ने भले ही उच्च नैतिक मानकों का पालन न किया हो, लेकिन 2006 में उन्हें सेवा से बर्खास्त करना “चौंकाने वाला और असंगत” था।
  • अगला कदम: हाईकोर्ट ने 16 दिसंबर के अपने फैसले में बर्खास्तगी के आदेश को रद्द करते हुए मामले को सक्षम प्राधिकारी के पास वापस भेज दिया है। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि कानून के दायरे में रहकर सजा की मात्रा (Quantum of Punishment) पर पुनर्विचार किया जाए।
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