Tuesday, September 29, 2026
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Muzaffarnagar Riots: 25 भाजपा नेताओं और हिंदू कार्यकर्ताओं पर दर्ज मुकदमा वापस होंगे;उत्तर प्रदेश की विशेष MP-MLA अदालत का फैसला जानिए

मामला सारांश (At a Glance)

विधिक बिंदुविवरण
माननीय अदालतविशेष MP-MLA अदालत (ACJM देवेंद्र कुमार फौजदार)
मूल मामला31 जुलाई 2013 को नंगला मंदौड़ महापंचायत में भड़काऊ भाषण और धारा 144 उल्लंघन
प्रमुख नामकपिल देव अग्रवाल, संजीव बालियान, सुरेश राणा, साध्वी प्राची, यति नरसिंहानंद आदि
आदेशयूपी सरकार के निर्णय के आधार पर अभियोजन पक्ष को केस वापस लेने (Withdrawal) की अनुमति

Muzaffarnagar Riots: उत्तर प्रदेश की एक विशेष MP-MLA अदालत ने 2013 के मुजफ्फरनगर दंगों से जुड़े एक मामले में उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री कपिल देव अग्रवाल, पूर्व केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान और पूर्व राज्य मंत्री सुरेश राणा सहित 25 भाजपा नेताओं और हिंदू कार्यकर्ताओं के खिलाफ दर्ज मुकदमा वापस लेने की अभियोजन (Prosecution) की अर्जी स्वीकार कर ली है।

विशेष न्यायाधीश (अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट) देवेंद्र कुमार फौजदार ने उत्तर प्रदेश सरकार के फैसले के बाद प्रस्तुत की गई अभियोजन की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया।

🏛️ क्या था पूरा मामला?

  • नंगला मंदौड़ महापंचायत (31 जुलाई 2013):यह मामला 31 जुलाई 2013 को जिले के नंगला मंदौड़ गांव में आयोजित एक महापंचायत से संबंधित है।
  • आरोप:आरोपियों पर निषेधाज्ञा (निषेधात्मक आदेश/धारा 144) का उल्लंघन करने, सरकारी कार्य में बाधा डालने और भड़काऊ भाषणों के जरिए सांप्रदायिक तनाव भड़काने का आरोप था।
  • प्रमुख आरोपी शामिल:मामले में कपिल देव अग्रवाल, संजीव बालियान, सुरेश राणा के अलावा पूर्व मंत्री अशोक कटारिया, पूर्व सांसद भारतेंदु सिंह और सोहनवीर सिंह, पूर्व विधायक अशोक कंसल और उमेश मलिक, विश्व हिंदू परिषद (VHP) की नेता साध्वी प्राची और डासना शिव मंदिर के यति नरसिंहानंद सहित 25 लोग आरोपी थे।

⚖️ वापसी का आधार और पृष्ठभूमि

  1. राज्य सरकार का फैसला: उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा मामले को वापस लेने के निर्णय के बाद अभियोजन अधिकारी राहुल सिंह ने कोर्ट में प्रार्थना पत्र दाखिल किया था, जिसे अदालत ने मंजूरी दे दी।
  2. 2013 मुजफ्फरनगर दंगों का संदर्भ: अगस्त-सितंबर 2013 में मुजफ्फरनगर और पड़ोसी जिलों में भड़की सांप्रदायिक हिंसा में 60 से अधिक लोगों की जान चली गई थी और 40,000 से अधिक लोग विस्थापित हुए थे।

Flash Back: वर्ष 2013 के मुजफ्फरनगर दंगा

2013 के मुजफ्फरनगर दंगों से जुड़ा यह मामला नगला मंदौड़ (नंगला मंदौड़) में आयोजित महापंचायत और उससे उत्पन्न तनाव से संबंधित था।

1. मुकदमे की पृष्ठभूमि और मुख्य आरोप

यह मामला जुलाई 2013 में मुजफ्फरनगर जिले के नगला मंदौड़ में हुई एक महापंचायत से शुरू हुआ था। इस दौरान नेताओं और सामाजिक/धार्मिक कार्यकर्ताओं पर निम्नलिखित प्रमुख धाराओं और आरोपों के तहत मामले दर्ज किए गए थे:

  • निषेधाज्ञा (धारा 144) का उल्लंघन: जिले में लागू धारा 144 का उल्लंघन करते हुए भीड़ एकत्रित करना।
  • सरकारी काम में बाधा डालना: ड्यूटी पर तैनात प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों/कर्मचारियों के काम में रुकावट पैदा करना।
  • भड़काऊ भाषण और सांप्रदायिक तनाव: आरोप था कि महापंचायत के मंच से भड़काऊ भाषण दिए गए, जिससे दो समुदायों के बीच तनाव बढ़ा और बाद में जिले में व्यापक दंगे भड़क गए।

2. प्रमुख नामजद आरोपी

इस मुकदमे में उत्तर प्रदेश और केंद्र के प्रमुख नेताओं सहित 25 लोग आरोपी थे, जिनमें शामिल हैं:

  • कपिल देव अग्रवाल (यूपी सरकार में मंत्री)
  • संजीव बालियान (पूर्व केंद्रीय मंत्री)
  • सुरेश राणा (पूर्व राज्य मंत्री)
  • अशोक कटारिया (पूर्व मंत्री)
  • भारतेंदु सिंह एवं सोहनवीर सिंह (पूर्व बीजेपी सांसद)
  • अशोक कंसल एवं उमेश मलिक (पूर्व बीजेपी विधायक)
  • साध्वी प्राची (वीएचपी नेता) तथा यति नरसिंहानंद (डासना शिव मंदिर)।

3. केस की वर्तमान स्थिति (मुकदमा वापसी)

उत्तर प्रदेश सरकार ने जनहित और मामलों की समीक्षा के आधार पर इस मुकदमे को वापस लेने का निर्णय लिया था। इसके बाद विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट (ACJM कोर्ट, मुजफ्फरनगर) में केस वापसी (CrPC की धारा 321 के तहत) के लिए याचिका दाखिल की गई।

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