मामला सारांश (At a Glance)
| पहलू | विवरण |
| माननीय अदालत | बॉम्बे उच्च न्यायालय (Division Bench) |
| पीठ (Bench) | कार्यवाहक CJ रवींद्र वी. घुगे एवं न्यायमूर्ति गौतम अंखड |
| संबंधित संस्था | कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) |
| अस्पताल | ESIC मॉडल अस्पताल, अंधेरी (मुंबई) |
| मूल विवाद | 2018 की आग के बाद बंद पड़े अस्पताल को जनवरी 2026 तक शुरू करने के कोर्ट के आदेश की अवहेलना |
| अगली सुनवाई | 25 अगस्त 2026 (ESIC को स्टेटस रिपोर्ट हलफनामा दाखिल करने का निर्देश) |
Contempt BY ESIC: बॉम्बे उच्च न्यायालय (Bombay High Court) ने कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) को अंधेरी स्थित मॉडल अस्पताल को फिर से शुरू करने के अदालत के अप्रैल 2025 के निर्देशों का पालन न करने पर सख्त रुख अपनाया है।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश (Acting CJ) रवींद्र वी. घुगे और न्यायमूर्ति गौतम अंखड की खंडपीठ ने मुंबई के पूर्व उप महापौर राजेश शर्मा द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह मौखिक टिप्पणी की। याचिकाकर्ता ने कोर्ट को सूचित किया था कि अस्पताल को चालू करने के लिए आवश्यक काम का 20% हिस्सा भी अभी तक पूरा नहीं हुआ है। कोर्ट ने कहा कि अदालत की अवमानना (Contempt of Court) के मामले में अधिकारियों को जेल भेजने का यह बिल्कुल सही समय है।
🏛️ बॉम्बे हाईकोर्ट की प्रमुख टिप्पणियां
- कोर्ट के आदेशों की अवहेलना: खंडपीठ ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा: “इतना समय बीत चुका है। उन्होंने हमारे आदेशों की अवहेलना की है। यह उन्हें जेल भेजने का बिल्कुल सही समय है।”
- अवमानना याचिका की मांग: याचिका में मांग की गई है कि कोर्ट के आदेश का “जानबूझकर और इरादतन उल्लंघन” करने के लिए ईएसआईसी के महानिदेशक (Director General) को 6 महीने के नागरिक कारावास (Civil Imprisonment) और ₹2,000 जुर्माने की सजा दी जाए।
मामले की पृष्ठभूमि और विवाद (Case History)
- 2018 का अग्निकांड (2018 Fire Incident)
- अंधेरी स्थित यह ESIC मॉडल अस्पताल और स्नातकोत्तर चिकित्सा विज्ञान एवं अनुसंधान संस्थान (PGIMSR) 2018 में लगी भीषण आग के बाद से बंद पड़ा है।
- बंद होने से पहले यह अस्पताल बीमित व्यक्तियों और आम जनता को OPD, IPD, ICU, सुपर-स्पेशियलिटी इलाज और आपातकालीन सेवाएं (Emergency Care) प्रदान करता था।
- अदालत द्वारा तय की गई समय-सीमा (Deadline)
- 16 अप्रैल 2025 को न्यायमूर्ति आलोक अराधे और न्यायमूर्ति मकरंद कर्णिक की खंडपीठ ने जनहित याचिका (PIL) पर फैसला सुनाते हुए ESIC को 31 जनवरी 2026 तक हर हाल में अस्पताल शुरू करने का आदेश दिया था।
- अनुपालन न होना और नई अवमानना याचिका
- जनवरी 2026 की समय-सीमा बीत जाने के बाद भी काम पूरा न होने पर राजेश शर्मा ने अधिवक्ता राहुल कामेरकर और अपराजिता आर. झा के माध्यम से कोर्ट का रुख किया।
- याचिका में कहा गया है कि ESIC की लापरवाही के कारण बीमित श्रमिकों और जनता को गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
अदालत का अगला कदम: ESIC द्वारा कोर्ट से काम की स्थिति स्पष्ट करने के लिए समय मांगने पर, उच्च न्यायालय ने अधिकारियों को अस्पताल के काम की वर्तमान प्रगति पर विस्तृत हलफनामा (Affidavit) दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 25 अगस्त 2026 को होगी।
यहां जानिए अस्पताल को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट का पुराना निर्देश
बॉम्बे उच्च न्यायालय ने मुंबई के अंधेरी स्थित कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) मॉडल अस्पताल को फिर से पूरी तरह चालू करने से जुड़ी जनहित याचिका (PIL) पर अप्रैल 2025 में सख्त रुख अपनाते हुए कई महत्त्वपूर्ण निर्देश जारी किए थे। दरअसल, यह अस्पताल दिसंबर 2018 में लगी भीषण आग के बाद से बंद पड़ा था, जिससे लाखों बीमित कर्मचारियों और उनके आश्रितों को स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था।
बॉम्बे उच्च न्यायालय के मुख्य निर्देश
- अस्पताल को पुनः शुरू करने की समय-सीमा: उच्च न्यायालय ने ESIC और संबंधित प्राधिकारियों को निर्देश दिया कि पुनर्निर्माण, सुरक्षा मंजूरी (Fire & Structural Safety) और बुनियादी ढांचे के काम को तेजी से पूरा करके अस्पताल को निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूर्ण रूप से संचालित किया जाए।
- चरणबद्ध पुनरुद्धार की निगरानी: अदालत ने अस्पताल के पुनरुद्धार (Restoration) की प्रगति की नियमित आधार पर निगरानी करने और चरणबद्ध तरीके से विभिन्न विभागों (OPD, IPD, और इमरजेंसी सेवाओं) को शुरू करने का खाका पेश करने का निर्देश दिया।
- वैकल्पिक व्यवस्था और मरीजों की सुविधा: जब तक अस्पताल पूरी तरह चालू नहीं हो जाता, तब तक बीमित कर्मचारियों को पास के अन्य पैनलबद्ध (Empaneled) निजी या सरकारी अस्पतालों में बिना किसी रुकावट के मुफ्त इलाज और कैशलेस सुविधा उपलब्ध कराने के आदेश दिए गए।
- जवाबदेही और अनुपालन रिपोर्ट: उच्च न्यायालय ने ESIC के शीर्ष अधिकारियों को प्रगति रिपोर्ट (Compliance Report) प्रस्तुत करने के लिए कहा ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि प्रशासनिक या नौकरशाही देरी के कारण परियोजना में और विलंब न हो।
मामले की पृष्ठभूमि
दिसंबर 2018 में हुए दर्दनाक अग्निकांड (जिसमें कई लोगों की जान चली गई थी) के बाद से 300 से अधिक बेड वाला यह अस्पताल पूरी तरह से बंद कर दिया गया था। स्थानीय यूनियनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने बीमित कामगारों के अधिकार और सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं की बहाली के लिए बॉम्बे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

