NEET-UG: मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG को लेकर एक बहुत बड़ा और क्रांतिकारी बदलाव होने जा रहा है।
परीक्षा रद्द और सीबीआई जांच के बाद एनटीए ने उठाए गए कदम के बारे में दायर किया हलफनामा
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस पी. एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ के समक्ष दायर एक हलफनामे में एनटीए ने इस बड़े नीतिगत बदलाव की जानकारी दी। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने सूचित किया है कि अगले साल यानी 2027 से NEET-UG परीक्षा ‘पेन और पेपर’ (ओएमआर शीट) मोड के बजाय पूरी तरह से कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT – Computer Based Test) मोड में आयोजित की जाएगी। यह फैसला इस साल (2026) नीट परीक्षा में हुए पेपर लीक विवाद, 3 मई की परीक्षा को रद्द करने और मामले की सीबीआई (CBI) जांच के बाद लिया गया है। हलफनामे में एनटीए ने इस साल की परीक्षा के आंकड़े और आगामी री-एग्जाम (Re-examination) की सुरक्षा व्यवस्था पर भी बात की।
नीट-यूजी (NEET-UG) में क्या-क्या बदलेगा?
पूरी तरह डिजिटल परीक्षा: एनटीए द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे के अनुसार, आगामी परीक्षा चक्र (Next Examination Cycle) से बदलाव लागू किए जाएंगे। अब तक नीट-यूजी देश की एकमात्र ऐसी बड़ी परीक्षा थी जो ऑफलाइन (पेन और पेपर मोड) हो रही थी। अब इसे भी अन्य बड़ी परीक्षाओं (जैसे JEE Main, CUET) की तरह CBT (कंप्यूटर आधारित) प्लेटफॉर्म पर लाया जाएगा।
मल्टी-सेशन और मल्टी-स्टेज टेस्टिंग: इसरो (ISRO) के पूर्व अध्यक्ष डॉ. के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में गठित उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समिति (HLCE) की सिफारिशों के आधार पर, अब यह परीक्षा बहु-चरणों (Multi-stage) और कई सत्रों (Multi-session) में आयोजित की जा सकती है।
मानवीय हस्तक्षेप कम करने के लिए AI का उपयोग: प्रश्नपत्रों के अनुवाद कार्य में सुरक्षा से समझौता न हो, इसके लिए कम से कम 85 प्रतिशत अनुवाद कार्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टूल्स के जरिए किया जाएगा, ताकि मानवीय दखल कम से कम हो और लीक की संभावना खत्म हो सके।
राधाकृष्णन समिति की 101 सिफारिशें
एनटीए ने कोर्ट को बताया कि जून 2024 में शिक्षा मंत्रालय द्वारा गठित डॉ. के. राधाकृष्णन समिति ने अक्टूबर 2024 में केंद्र सरकार को अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपी थी, जिसमें 101 सुधारवादी सिफारिशें की गई थीं। इन सिफारिशों को समयबद्ध और जवाबदेह तरीके से लागू करने के लिए नवंबर 2024 में एक हाई-पावर्ड स्टीयरिंग कमेटी (HPSC) बनाई गई। एनटीए इसी स्टीयरिंग कमेटी की देखरेख में इन बदलावों को लागू करने के अंतिम चरण में है। प्रश्नपत्र सेट करने और उनकी जांच (Vetting) करने के लिए नए मानक संचालन नियम (SOP) संस्थागत कर दिए गए हैं। पेपर सेटर, मॉडरेटर और ट्रांसलेटरों के चयन के लिए ‘रैंडमाइजेशन’ और रोटेशन पॉलिसी लागू की जा रही है।
इस साल की रद्द परीक्षा और री-एग्जाम की तैयारी
3 मई 2026 की परीक्षा: इस परीक्षा में देश भर के 5,432 केंद्रों पर 22.05 लाख से अधिक उम्मीदवार शामिल हुए थे, जिसे पेपर लीक के बाद रद्द कर दिया गया था।
21 जून 2026 का री-एग्जाम: आगामी 21 जून को होने वाली पुनरीक्षा को बेहद कड़े और मजबूत एसओपी (SOP) के तहत आयोजित किया जाएगा। इसमें मल्टी-लेयर ऑथेंटिकेशन (बहु-स्तरीय पहचान सत्यापन), सख्त निगरानी और विभिन्न सरकारी एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित किया जाएगा। एनटीए ने अदालत को आश्वासन दिया कि उसने राष्ट्रीय परीक्षा प्रणाली की अखंडता और उन लाखों ईमानदार छात्रों के हितों की रक्षा के लिए पूरी ईमानदारी और कानून के दायरे में काम किया है, जिनकी मेहनत पर कोई सवाल नहीं है। एजेंसी सीबीआई को जारी जांच में पूरा सहयोग दे रही है।
पूरे ढांचे और सुरक्षा व्यवस्था में व्यापक (Wide-ranging) करेंगे सुधार
सुप्रीम कोर्ट में दायर हलफनामा ‘फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन’ (FAIMA) और ‘यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट’ (UDF) द्वारा दायर उन याचिकाओं के जवाब में आया है, जिनमें परीक्षा एजेंसी के पुनर्गठन और चिकित्सा प्रवेश परीक्षा में हुई कथित अनियमितताओं की जांच की मांग की गई थी। एनटीए ने शीर्ष अदालत को बताया कि 17 अप्रैल 2026 को हुई हाई-पावर्ड स्टीयरिंग कमेटी (HPSC) की बैठक में नीट-यूजी परीक्षा के लिए त्रि-स्तरीय सुरक्षा प्रोटोकॉल की सिफारिश की गई थी, जिसे लागू किया गया है।
परीक्षा सुरक्षा के लिए कड़े त्रि-स्तरीय सुरक्षा उपाय (Pre, During & Post Exam Reforms)
परीक्षा से पहले और परीक्षा के दौरान (Pre & During Exam Safeguards)
सीसीटीवी और मॉक ड्रिल: सभी परीक्षा केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरों की अनिवार्य जांच की गई और परीक्षा से पहले बकायदा ‘मॉक ड्रिल’ (अभ्यास) आयोजित की गई।
आपातकालीन बुनियादी ढांचा: परीक्षा केंद्रों पर पावर बैकअप (बिजली की वैकल्पिक व्यवस्था), आपातकालीन चिकित्सा सुविधाएं और मौसम से निपटने के लिए आकस्मिक योजनाएं (Weather-based contingency planning) तैयार की गईं।
सघन निरीक्षण: परीक्षा से ठीक एक सप्ताह पहले सभी संवेदनशील केंद्रों का बारीकी से निरीक्षण किया गया।
परीक्षा के बाद की सुरक्षा (Post-Exam Measures)
फुटेज का संरक्षण: परीक्षा केंद्रों के सीसीटीवी फुटेज को कम से कम 90 दिनों तक सुरक्षित (Preserved) रखने का नियम बनाया गया है।
फॉरेंसिक विश्लेषण: परीक्षा समाप्त होने के बाद सीसीटीवी फुटेज का फॉरेंसिक विश्लेषण (Forensic Analysis) करने की व्यवस्था की गई है, ताकि वास्तविक समय (Real-time) में न पकड़ी जा सकीं संदिग्ध गतिविधियों या विसंगतियों का पता लगाया जा सके।
प्रशासनिक ढांचा बदला: नए पदों का सृजन (Administrative Restructuring)
एनटीए ने परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए अपने संगठनात्मक ढांचे में बड़े बदलाव किए हैं।
नए अधिकारियों की नियुक्ति: एनटीए के भीतर 16 नए वरिष्ठ पदों का सृजन किया गया है, जिनमें निदेशक (Director) और संयुक्त निदेशक (Joint Director) स्तर के पद शामिल हैं। मार्च 2026 में एक सचिव स्तर के अधिकारी को एनटीए का नया महानिदेशक (Director General) नियुक्त किया गया था।
विशेष सुरक्षा विंग: दो संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारियों को अतिरिक्त महानिदेशक (Additional Director Generals) के रूप में नामित किया गया है, जो क्रमशः ‘तकनीकी संचालन’ (Technology Operations) और ‘परीक्षा सुरक्षा’ (Test Security) की निगरानी कर रहे हैं।
विशेषज्ञों की मदद: परीक्षा प्रबंधन को मजबूत करने के लिए IIT, UGC, CBSE, KVS और IGNOU जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञों को शामिल किया गया है।
राज्य और जिला स्तर पर मजबूत निगरानी नेटवर्क
संस्थागत समन्वय को बेहतर करने के लिए एनटीए ने पूरे देश में एक अभेद्य सुरक्षा ग्रिड तैयार किया है। इसके तहत देश भर में राज्य-स्तरीय समन्वय समितियां (SLCCs) और जिला-स्तरीय समन्वय समितियां (DLCCs) गठित की गई हैं। 3 मई 2026 को आयोजित हुई नीट-यूजी परीक्षा तक देश में 18 SLCC और 621 DLCC पूरी तरह सक्रिय कर दिए गए थे। इन समितियों में स्थानीय प्रशासन, पुलिस, खुफिया एजेंसियों (Intelligence Agencies), राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) और NTA के अधिकारी शामिल हैं, जो परीक्षा के दौरान रीयल-टाइम निगरानी और सुरक्षा तालमेल सुनिश्चित करते हैं।
बदलाव की रूपरेखा: एक नज़र में (Core Matrix)
| पैरामीटर | वर्तमान व्यवस्था (2026 तक) | नई प्रस्तावित व्यवस्था (2027 से) |
| परीक्षा का माध्यम (Mode) | पेन और पेपर (PPT / ऑफलाइन ओएमआर) | कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT / ऑनलाइन) |
| परीक्षा के चरण | एक ही दिन, एक ही सत्र (Single Session) | मल्टी-सेशन और मल्टी-स्टेज टेस्टिंग। |
| पेपर अनुवाद प्रक्रिया | मुख्य रूप से मानवीय अनुवाद (Human Intervention) | 85% कार्य AI आधारित टूल्स द्वारा किया जाएगा। |
| सुरक्षा ढांचा | पारंपरिक सुरक्षा और जांच। | मल्टी-लेयर ऑथेंटिकेशन और हाई-पावर्ड कमेटी की कड़ी SOP। |
एनटीए के सुरक्षा सुधार: एक नज़र में (Core Matrix)
| सुरक्षा आयाम | पुरानी स्थिति | 2026 के नए सुरक्षा सुधार (New Protocols) |
| सीसीटीवी फुटेज | सामान्य रिकॉर्डिंग। | अनिवार्य मॉक ड्रिल, 90 दिनों तक फुटेज संरक्षण और बाद में फॉरेंसिक ऑडिट। |
| प्रशासनिक कमान | सीमित सुरक्षा विंग। | 16 नए वरिष्ठ पद; तकनीकी और सुरक्षा ऑपरेशन्स के लिए दो विशेष एडिशनल डीजी (ADG)। |
| स्थानीय समन्वय | केंद्रीय नियंत्रण। | 18 राज्य-स्तरीय (SLCC) और 621 जिला-स्तरीय (DLCC) कमेटियां (पुलिस व इंटेलिजेंस शामिल)। |
| भविष्य का तरीका (Mode) | केवल पेन-पेपर मोड। | स्टीयरिंग कमेटी स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ मिलकर CBT (कंप्यूटर आधारित परीक्षा) या PPT मोड पर अंतिम निर्णय लेगी। |
निष्कर्ष (Takeaway)
नीट-यूजी को सीबीटी (CBT) मोड में ट्रांसफर करने का निर्णय मेडिकल प्रवेश परीक्षा की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बहाल करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। ऑफलाइन मोड में पेपर लीक और कॉपियों में हेरफेर का जो जोखिम बना रहता था, कंप्यूटर आधारित परीक्षा और एआई (AI) तकनीक के इस्तेमाल से उस पर पूरी तरह से लगाम लगाई जा सकेगी। देश के लाखों मेडिकल एस्पिरेंट्स के लिए 2027 से परीक्षा का अनुभव पूरी तरह बदलने वाला है। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल इस हलफनामे से साफ है कि 2026 के पेपर लीक विवाद के बाद एनटीए ने केवल लीपापोती करने के बजाय अपने सुरक्षा तंत्र में जमीनी बदलाव किए हैं। इंटेलिजेंस एजेंसियों, पुलिस और तकनीकी विशेषज्ञों को सीधे परीक्षा प्रक्रिया से जोड़कर और प्रशासनिक अधिकारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही तय करके परीक्षा की शुचिता (Integrity) को दोबारा बहाल करने की कोशिश की जा रही है।

