NIA’s Stance: राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने दिल्ली हाई कोर्ट में एक महत्वपूर्ण हलफनामा (Affidavit) दाखिल किया है।
कश्मीरी अलगाववादी नेता यासीन मलिक मामले में सुनवाई
दिल्ली हाई कोर्ट में जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर दुडेजा की बेंच के सामने NIA ने यासीन मलिक की उस दलील का जवाब दिया, जिसमें उसने पूर्व भारतीय प्रधानमंत्रियों के साथ अपने संबंधों का हवाला देकर खुद को निर्दोष बताया था। NIA ने कश्मीरी अलगाववादी नेता यासीन मलिक पर आरोप लगाया है कि उसने कश्मीर को भारत से अलग करने के लिए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति जैसे शीर्ष नेतृत्व के साथ अपने संपर्कों का इस्तेमाल किया।
पाकिस्तान के साथ ‘सीधा संपर्क’ (The Direct Connect)
- NIA ने अपने हलफनामे में मलिक के अंतरराष्ट्रीय संपर्कों का कच्चा चिट्ठा खोला।
- शीर्ष नेतृत्व: NIA के अनुसार, मलिक न केवल पाकिस्तान के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति, बल्कि वहां के सीनेटरों और सभी प्रांतों के मुख्यमंत्रियों के साथ भी संपर्क में था।
- एजेंडा: इन संपर्कों का उपयोग भारत के खिलाफ नैरेटिव (Narrative) तैयार करने और जम्मू-कश्मीर में अलगाववादी एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए किया गया।
भारतीय राजनेताओं का नाम लेना ‘पब्लिसिटी स्टंट’?
- यासीन मलिक ने पहले कोर्ट को बताया था कि वी.पी. सिंह से लेकर मनमोहन सिंह तक, छह लगातार सरकारों ने कश्मीर मुद्दे को सुलझाने के लिए उसके साथ बातचीत की थी।
- सहानुभूति का खेल: NIA ने कहा कि वरिष्ठ भारतीय राजनेताओं, विदेशी प्रतिनिधियों, नौकरशाहों और मीडिया कर्मियों के नाम लेना केवल जनता की सहानुभूति और लोकप्रियता हासिल करने का एक तरीका है।
- अपराध से मुक्ति नहीं: एजेंसी ने तर्क दिया कि बड़े नाम लेने से मलिक के उन अपराधों की गंभीरता कम नहीं हो जाती, जिनके लिए उसे दोषी ठहराया जा चुका है।
आतंकी कनेक्शन पर NIA का कड़ा रुख
- NIA ने स्पष्ट किया कि राजनेताओं से बातचीत का मतलब यह नहीं है कि मलिक के आतंकी लिंक खत्म हो गए।
- हाफिज सईद और सलाहुद्दीन: NIA ने कहा कि सरकारी अधिकारियों से मिलने के दावों से यह तथ्य नहीं बदल जाता कि मलिक के संबंध लश्कर-ए-तैयबा (Hafiz Saeed) और हिजबुल मुजाहिदीन (Syed Salahuddin) जैसे आतंकी संगठनों के साथ थे।
- खुद की स्वीकारोक्ति: हलफनामे में याद दिलाया गया कि मलिक ने खुद स्वीकार किया था कि वह JKLF (जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट) का ‘कमांडर-इन-चीफ’ था।
केस के मुख्य बिंदु (Key Highlights)
| बिंदु | विवरण |
| मुख्य मांग | NIA यासीन मलिक के लिए मृत्युदंड (Death Penalty) की मांग कर रही है। |
| वर्तमान सजा | ट्रायल कोर्ट ने मलिक को आजीवन कारावास (Life Imprisonment) की सजा सुनाई है। |
| मलिक की दलील | उसने दावा किया कि वह पूर्व IB अधिकारी अजीत डोभाल और अन्य शीर्ष अधिकारियों के संपर्क में था। |
| अगली सुनवाई | सजा बढ़ाने (Enhancement of Sentence) पर बहस के लिए मामला जुलाई तक टाल दिया गया है। |
अजीत डोभाल और सुरक्षा एजेंसियों का जिक्र
मलिक ने अपनी सफाई में कहा था कि उसने 2006 में तत्कालीन IB विशेष निदेशक वी.के. जोशी के अनुरोध पर हाफिज सईद से मुलाकात की थी। उसने यह भी दावा किया कि मौजूदा NSA अजीत डोभाल (तब IB में) ने उसे जेल में रिहाई की खबर दी थी। NIA का कहना है कि ये मलिक के व्यक्तिगत संचार हो सकते हैं, लेकिन इनका मौजूदा ‘टेरर फंडिंग’ केस के मेरिट (Merits) पर कोई असर नहीं पड़ता।
कानूनी लड़ाई और सुरक्षा चिंताएं
यह मामला केवल एक व्यक्ति की सजा का नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के पेचीदा रिश्तों का है। जहां एक तरफ यासीन मलिक खुद को ‘शांति दूत’ और सरकारों के बीच ‘पुल’ के रूप में पेश कर रहा है, वहीं NIA उसे एक रणनीतिक अपराधी मानती है जिसने भारत के लोकतांत्रिक ढांचे का उपयोग भारत को ही तोड़ने के लिए किया। जुलाई में होने वाली सुनवाई इस मामले में निर्णायक साबित हो सकती है।

