मुख्य बिंदु (Key Indicators)
- 2023 के कानून का क्रियान्वयन: नेशनल नर्सिंग एंड मिडवाइफरी कमीशन एक्ट, 2023 (जो 2024 में लागू हुआ) का उद्देश्य भारत में नर्सिंग और मिडवाइफरी शिक्षा, प्रशिक्षण और पेशेवर अभ्यास को विनियमित करने के लिए पुराने ‘भारतीय नर्सिंग परिषद’ (INC) की जगह नया आयोग (NNMC) स्थापित करना था।
- गठन में अत्यधिक देरी: याचिकाकर्ता एसोसिएशन ने बताया कि सरकार द्वारा 2024 में ही सदस्यों की नियुक्ति के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए थे, लेकिन 2026 तक आयोग का गठन पूरा नहीं हुआ और पुरानी काउंसिल ही काम कर रही है।
- स्वास्थ्य सेवा कार्यबल के साथ भेदभाव: IPNA ने दलील दी कि सरकार ने डेंटल, मेडिकल (NMC), भारतीय चिकित्सा प्रणाली और होम्योपैथी के लिए राष्ट्रीय आयोगों का गठन कर दिया है। स्वास्थ्य सेवा कार्यबल (Healthcare Workforce) का 70% हिस्सा होने के बावजूद केवल नर्सिंग पेशे को छोड़ना संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 के तहत भेदभावपूर्ण और मनमाना है।
- हाईकोर्ट की स्वतंत्रता: कोर्ट ने केंद्र सरकार (स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय) को 2 महीने के भीतर इस मुद्दे पर निर्णय लेने और एसोसिएशन को सूचित करने का आदेश दिया। यदि समस्या का समाधान नहीं होता है, तो याचिकाकर्ता को फिर से कोर्ट आने की छूट दी गई है।
नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को ‘राष्ट्रीय नर्सिंग और मिडवाइफरी आयोग’ (National Nursing and Midwifery Commission – NNMC) के गठन की मांग वाली याचिका पर दो महीने के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया है [इंडियन प्रोफेशनल नर्सेज एसोसिएशन बनाम भारत संघ व अन्य]।
न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की एकल पीठ ने ‘इंडियन प्रोफेशनल नर्सेज एसोसिएशन’ (IPNA) की याचिका का निस्तारण करते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय को इसे एक प्रत्यावेदन (Representation) के रूप में मानकर समयबद्ध निर्णय लेने का आदेश दिया।
उच्च न्यायालय के प्रमुख निर्देश
पीठ ने मामले का निपटारा करते हुए कहा: “अदालत यह उचित समझती है कि इस याचिका को याचिकाकर्ता की ओर से एक प्रत्यावेदन (Representation) माना जाए। प्रतिवादियों को निर्देश दिया जाता है कि वे इस आदेश की तारीख से दो महीने की अवधि के भीतर इस पर निर्णय लें और इसकी सूचना याचिकाकर्ता को दें।”
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि निर्धारित समय में उनकी शिकायतों का समाधान नहीं होता है, तो याचिकाकर्ता संगठन को पुनः अदालत का दरवाजा खटखटाने की स्वतंत्रता (Liberty) होगी।
कानून बनने के बावजूद NNMC के गठन में देरी का मुद्दा
- 2023 का अधिनियम और 2024 में लागू होना: केंद्र सरकार ने ‘राष्ट्रीय नर्सिंग और मिडवाइफरी आयोग अधिनियम, 2023’ पारित किया था, जो 2024 में प्रभावी हुआ। इस कानून के तहत ‘भारतीय नर्सिंग परिषद’ (INC) की जगह एक नया स्वायत्त विधिक आयोग (NNMC) बनाया जाना था।
- अधूरी प्रक्रिया: नए कानून के बावजूद आयोग का गठन अब तक नहीं हो सका है और पुरानी व्यवस्था के तहत भारतीय नर्सिंग परिषद ही विनियामक कार्यों का संचालन कर रही है। सरकार ने 2024 में सदस्यों के चयन के लिए आवेदन आमंत्रित किए थे, लेकिन नियुक्तियां अंतिम रूप नहीं ले सकीं।
याचिकाकर्ता (IPNA) के मुख्य तर्क
- स्वास्थ्य क्षेत्र के 70% कार्यबल के साथ भेदभाव: याचिका में दलील दी गई कि नर्सिंग और मिडवाइफरी पेशेवर भारत के कुल स्वास्थ्य कार्यबल (Healthcare Workforce) का 70 प्रतिशत से अधिक हिस्सा हैं।
- अन्य आयोगों का गठन: सरकार पहले ही ‘राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग’ (NMC), ‘राष्ट्रीय दंत चिकित्सा आयोग’ (NDC), ‘राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग’ और ‘भारतीय चिकित्सा प्रणाली के लिए राष्ट्रीय आयोग’ का गठन कर चुकी है, लेकिन केवल नर्सिंग क्षेत्र के आयोग को लंबित रखना मनमाना, भेदभावपूर्ण और संविधान के अनुच्छेद 14 व 21 का उल्लंघन है।
हाईकोर्ट का निर्देश
न्यायमूर्ति स्वर्णा कांत शर्मा की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा: “अदालत यह उचित समझती है कि इस याचिका को याचिकाकर्ता की ओर से एक अभ्यावेदन (Representation) माना जाए। प्रतिवादियों (केंद्र सरकार) को निर्देश दिया जाता है कि वे इस पर आज से दो महीने की अवधि के भीतर निर्णय लें और याचिकाकर्ता को इसकी सूचना दें।”
अंतिम स्थिति
दिल्ली हाईकोर्ट के इस निर्देश के बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को दो महीने के भीतर NNMC के औपचारिक गठन और सदस्यों की नियुक्ति प्रक्रिया पर अंतिम फैसला लेना होगा।
Nursing and Midwifery Commission: एट ए ग्लान्स (At a Glance of Judgment)
| विवरण | जानकारी |
| केस शीर्षक | इंडियन प्रोफेशनल नर्सेज एसोसिएशन बनाम भारत संघ व अन्य (IPNA v. Union of India & Anr.) |
| संबंधित अदालत | दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) |
| पीठासीन न्यायाधीश | न्यायमूर्ति स्वर्णा कांत शर्मा (Justice Swarana Kanta Sharma) |
| संबंधित कानून | नेशनल नर्सिंग एंड मिडवाइफरी कमीशन एक्ट, 2023 |
| अदालत का निर्देश | स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय 2 महीने के भीतर याचिका को अभ्यावेदन (Representation) मानकर फैसला करे। |

