मुख्य बिंदु (Key Indicators)
- केवल शक के आधार पर दावा रद्द नहीं: आयकर विभाग महज इस संदेह के आधार पर टैक्स छूट देने से मना नहीं कर सकता कि पति-पत्नी के बीच का लेन-देन टैक्स बचाने के लिए रचा गया था।
- समय का चक्र (Chronology) महत्वपूर्ण: ट्रिब्यूनल ने पाया कि संपत्ति का लेन-देन जून 2021 में पंजीकृत हुआ था, जबकि पति को व्यापार में घाटा (Business Loss) मार्च 2022 में हुआ। इसलिए लेन-देन के समय इस घाटे का पूर्वानुमान लगाकर टैक्स सेटिंग की योजना बनाना संभव नहीं था।
- रिश्तेदारों के बीच लेन-देन वैध: यदि कोई सौदा वैध तरीके से किया गया है, स्टांप ड्यूटी चुकाई गई है और वास्तविक बैंकिंग माध्यमों से भुगतान हुआ है, तो केवल रिश्तेदारों (Related Parties) के बीच होने के कारण उसे ‘बनावटी’ या ‘फर्जी’ नहीं कहा जा सकता।
- भविष्य की सुरक्षा और आय का स्रोत: पत्नी ने स्पष्ट किया कि खरीदा गया फ्लैट उसके वर्तमान निवास (पति का पैतृक घर) से अलग है और इसे उसने अपनी भविष्य की सुरक्षा तथा किराए की आय अर्जित करने के उद्देश्य से अपने स्वयं के फंड से खरीदा था।
Property Purchase: आयकर अपीलीय अधिकरण (ITAT) की मुंबई पीठ ने एक महत्वपूर्ण फैसले में व्यवस्था दी है कि अपने पति से आवासीय संपत्ति खरीदना स्वतः कर चोरी का जरिया (Colourable Device) नहीं माना जा सकता।
पति-पत्नी के बीच संपत्ति की खरीद-बिक्री दिखावटी सौदा नहीं माना जा सकता
इनकम टैक्स एपेलेट ट्रिब्यूनल (ITAT), मुंबई पीठ ने एक लैंडमार्क फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि पति-पत्नी के बीच संपत्ति की खरीद-बिक्री को केवल रिश्तेदारी के आधार पर कर चोरी (Tax Avoidance) या दिखावटी सौदा नहीं माना जा सकता। ट्रिब्यूनल ने एक महिला द्वारा अपने पति की प्रोपराइटरशिप फर्म से ₹7.5 करोड़ में जुहू (मुंबई) स्थित रिहायशी संपत्ति खरीदने के सौदे को वैध मानते हुए धारा 54F के तहत करीब ₹7 करोड़ की टैक्स छूट (Capital Gains Exemption) को हरी झंडी दे दी है।ट्रिब्यूनल ने महिला करदाता द्वारा धारा 54F के तहत किए गए लगभग ₹7 करोड़ के पूंजीगत लाभ कर (Capital Gains Tax) छूट के दावे को पूरी तरह स्वीकार कर लिया है।
यहां समझे मुख्य बिंदु
- वैध संपत्ति लेन-देन: पति की स्वामित्व वाली फर्म से ₹7.5 करोड़ में आवासीय संपत्ति की खरीद को पूरी तरह वास्तविक, वैध और कानूनी प्रावधानों के अनुरूप माना गया।
- संदेह के आधार पर कटौती से इनकार नहीं: ट्रिब्यूनल ने कहा कि केवल इस संदेह पर कि लेन-देन पति-पत्नी के बीच हुआ है, कर छूट से इनकार नहीं किया जा सकता, खासकर तब जब लेन-देन कृत्रिम या फर्जी (Sham) साबित न हुआ हो।
- व्यापारिक घाटे का समय (Timeline): पति का कारोबारी नुकसान संपत्ति सौदे के कई महीनों बाद हुआ था, जिससे यह साबित होता है कि संपत्ति खरीद के समय कर बचाने की कोई पूर्व-नियोजित साजिश नहीं थी।
मामले की पृष्ठभूमि और विवाद
- करदाता का आयकर रिटर्न: करदाता महिला ने वित्तीय वर्ष 2020-21 के लिए ₹1.9 करोड़ की कुल कर योग्य आय घोषित की थी। उनकी आय में गैर-सूचीबद्ध शेयरों (Unlisted Shares) की बिक्री से हुआ ₹8.31 करोड़ का दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ (LTCG) शामिल था।
- धारा 54F के तहत छूट का दावा: इस पूंजीगत लाभ के बदले उन्होंने जुहू स्थित एक आवासीय संपत्ति में निवेश के आधार पर आयकर अधिनियम की धारा 54F के तहत करीब ₹7 करोड़ की कर कटौती का दावा किया।
- संपत्ति का विवरण: यह संपत्ति उनके पति की एकल स्वामित्व वाली फर्म (Sole Proprietorship Concern) से ₹7.50 करोड़ में खरीदी गई थी। इसका ट्रांसफर डीड 30 मार्च 2021 को निष्पादित हुआ, प्रतिफल राशि (Consideration) का भुगतान 27 मई 2021 को किया गया और 30 जून 2021 को संपत्ति पंजीकृत हुई।
- आयकर विभाग का रुख: आयकर अधिकारी (AO) ने पाया कि पति ने संपत्ति बिक्री से लगभग ₹4.8 करोड़ का अल्पकालिक पूंजीगत लाभ (STCG) दिखाया था और उसमें से ₹3.5 करोड़ अपने कारोबारी नुकसान के साथ समायोजित (Set-off) कर लिए थे। अधिकारी ने इसे कर बचाने की साठगांठ मानते हुए धारा 54F की छूट रद्द कर दी और ₹7 करोड़ की राशि महिला की कर योग्य आय में जोड़ दी, जिसे बाद में सीआईटी (अपील) ने भी बरकरार रखा था।
मामले के मुख्य तथ्य और कानूनी विश्लेषण
करदाता महिला ने वित्तीय वर्ष 2020-21 के लिए अपने इनकम टैक्स रिटर्न में गैर-सूचीबद्ध (Unlisted) शेयरों की बिक्री से ₹8.31 करोड़ का लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन दर्शाया था। इसके खिलाफ, उसने मुंबई के पॉश इलाके जूहू में अपने पति की प्रोप्राइटरशिप कंपनी से ₹7.5 करोड़ में एक आवासीय फ्लैट खरीदकर धारा 54F के तहत ₹7 करोड़ के टैक्स डिडक्शन का दावा किया था।
आयकर विभाग का एतराज: इनकम टैक्स अधिकारी (AO) ने इस दावे को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि पति-पत्नी ने आपस में मिलकर टैक्स बचाने की योजना (Colourable Device) बनाई थी। अधिकारी का तर्क था कि एक तरफ पत्नी ने धारा 54F में छूट ली, वहीं दूसरी तरफ पति ने संपत्ति बिक्री से हुए शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन (₹4.8 करोड़) को अपने व्यापारिक नुकसान (₹3.5 करोड़) से एडजस्ट (Set-off) कर लिया।
ITAT का निर्णय: मुंबई ITAT पीठ ने करदाता के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कहा कि कानून के दायरे में रहकर किया गया कोई भी लेन-देन महज इसलिए खारिज नहीं हो सकता क्योंकि उससे टैक्स का लाभ मिला है।
ट्रिब्यूनल ने कहा: केवल इस आशंका या संदेह के आधार पर करदाता के जायज डिडक्शन (कटौती) को खारिज नहीं किया जा सकता कि यह टैक्स चोरी के लिए किया गया एक कृत्रिम सौदा था। जब तक लेन-देन फर्जी साबित न हो और कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया गया हो, तब तक रिश्तेदारों के बीच का सौदा भी पूरी तरह वैध है।
इसके साथ ही ट्रिब्यूनल ने कमिश्नर (अपील) के आदेश को निरस्त करते हुए महिला के ₹7 करोड़ के टैक्स छूट दावे को पूरी तरह से बहाल कर दिया।
आईटीएटी (ITAT) के प्रमुख निष्कर्ष
मुंबई ट्रिब्यूनल ने करदाता की दलीलों को सही ठहराते हुए आयकर विभाग के आदेश को खारिज कर दिया:
- तारीखों का क्रम (Chronology): ट्रिब्यूनल ने माना कि संपत्ति का पंजीकरण जून 2021 में हुआ था, जबकि पति का व्यापारिक नुकसान 31 मार्च 2022 को सामने आया। संपत्ति खरीदते समय भविष्य में होने वाले नुकसान का पहले से अनुमान लगाना संभव नहीं था।
- सामान्य कारोबारी प्रक्रिया: अदालत ने रेखांकित किया कि पति ने पूरे पूंजीगत लाभ को नुकसान के साथ सेट-ऑफ नहीं किया था, बल्कि केवल आंशिक लाभ को समायोजित किया था, जो सामान्य व्यावसायिक नियमों के तहत आता है।
- रिश्तेदारों के बीच लेन-देन पर छूट का अधिकार: ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट किया कि जब तक कोई सौदा कृत्रिम या फर्जी साबित न हो, तब तक केवल संबंधित पक्षों या रिश्तेदारों के बीच लेन-देन होने के आधार पर कर कटौती से इनकार नहीं किया जा सकता।
“केवल इस संदेह या अनुमान के आधार पर करदाता को मिलने वाली वैधानिक कटौती से इनकार नहीं किया जा सकता कि यह लेन-देन कर चोरी के उद्देश्य से किया गया एक कृत्रिम सौदा था।”
विवाद की पृष्ठभूमि और ITAT का फैसला
- मामले की पृष्ठभूमि (₹8.31 करोड़ का कैपिटल गेन्स)
- करदाता (महिला) ने वित्त वर्ष 2020-21 के लिए दाखिल रिटर्न में गैर-सूचीबद्ध शेयर्स (Unlisted Shares) की बिक्री से ₹8.31 करोड़ का दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ (Long-Term Capital Gain) घोषित किया था।
- इस कैपिटल गेन्स के एवज में उन्होंने जुहू में स्थित एक प्रॉपर्टी खरीदने के आधार पर सेक्शन 54F के तहत ₹7 करोड़ की छूट का दावा किया। यह संपत्ति उन्होंने अपने पति की फर्म से ₹7.50 करोड़ में मार्च 2021 में खरीदी थी।
- इनकम टैक्स विभाग की आपत्ति (संदेह के आधार पर Disallowance)
- टैक्स असेसिंग ऑफिसर (AO) ने इस दावे को पूरी तरह से खारिज कर दिया। अधिकारी का तर्क था कि यह दंपत्ति के बीच केवल टैक्स बचाने के लिए रचा गया एक ‘कलरबल डिवाइस’ (Artificial Setup) था।
- विभाग का मानना था कि पत्नी ने 54F की छूट ले ली और पति ने संपत्ति बिक्री से हुए शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन (₹4.8 करोड़) को अपने बिजनेस लॉस (₹3.5 करोड़) के सामने सेट-ऑफ (Set-off) कर लिया, जिससे दोनों पक्षों को टैक्स लाभ मिला।
- ITAT के तर्क और टैक्सपेयर के पक्ष में फैसला
- घटनाक्रम की क्रोनोलॉजी (Chronology): ट्रिब्यूनल ने पाया कि संपत्ति की बिक्री जून 2021 में पंजीकृत हुई थी, जबकि पति का बिजनेस लॉस मार्च 2022 (वित्त वर्ष के अंत) में सामने आया था। लेनदेन के वक्त भविष्य के नुकसान का अनुमान लगाकर टैक्स प्लानिंग करना संभव नहीं था।
- संदेह बनाम कानूनी अधिकार: ITAT ने टिप्पणी की कि केवल संदेह (Surmise/Suspicion) के आधार पर कानूनी दायरे में किए गए सौदे को अमान्य नहीं ठहराया जा सकता।
- वास्तविक हस्तांतरण: संपत्ति की रजिस्ट्री, स्टाम्प ड्यूटी का भुगतान और बैंक खातों से वास्तविक पेमेंट का लेन-देन साबित हुआ था। महिला ने यह भी स्पष्ट किया कि यह प्रॉपर्टी उसके पति के पैतृक घर से अलग थी जिसे उसने अपने भविष्य की सुरक्षा और किराये (Rent) पर देने के उद्देश्य से खरीदा था।
केस अवलोकन (Case Snapshot)
| पहलू | विवरण |
| ट्रिब्यूनल | इनकम टैक्स एपेलेट ट्रिब्यूनल (ITAT), मुंबई बेंच |
| संबंधित कानून | आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 54F (Section 54F) |
| संपत्ति का मूल्य | ₹7.50 करोड़ (जुहू, मुंबई) |
| कैपिटल गेन्स छूट | लगभग ₹7 करोड़ (Section 54F Exemption Cleared) |
| मुख्य सिद्धांत | रिश्तेदारों/पति-पत्नी के बीच वैध लेनदेन को केवल टैक्स लाभ मिलने के आधार पर फर्जी (Sham) नहीं माना जा सकता। |

