मुख्य बिंदु (Key Indicators)
- सुविधाओं का आधुनिकीकरण: जिला अदालतों में केस फाइलों का ऑनलाइन निरीक्षण (e-Inspection) और अदालती रिकॉर्ड की प्रमाणित प्रतियां (e-True Copies) प्राप्त करने की व्यवस्था लागू करने पर जोर।
- जजों की छुट्टी की अग्रिम सूचना: जनहित याचिका में मांग की गई कि जब कोई जज छुट्टी पर हों, तो इसकी जानकारी वकीलों और मुकदमों से जुड़े लोगों को पहले से मिले, ताकि उनके समय और संसाधनों की बचत हो सके।
- ई-कमेटी को निर्देश: हाईकोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता की प्रस्तुति (Representation) ई-कमेटी के समक्ष लंबित है, जिस पर जल्द से जल्द प्रशासनिक निर्णय लिया जाए।
- दिल्ली सरकार देगी बजट: अदालत ने साफ किया कि जिला अदालतों में तकनीकी सुविधाओं के विस्तार या एकीकरण (Integration) के लिए जितने भी अतिरिक्त बजट की आवश्यकता होगी, उसे दिल्ली सरकार द्वारा प्रदान किया जाएगा।
E-Work: दिल्ली हाईकोर्ट ने अपनी ई-कमेटी (e-Committee) को दिल्ली की जिला अदालतों में आधुनिक तकनीक के उपयोग—विशेषकर अदालती रिकॉर्ड के ई-निरीक्षण (e-inspection) और ई-सत्यापित प्रतियों (e-true copies)—से जुड़े मुद्दों की समीक्षा करने और प्रशासनिक स्तर पर यथाशीघ्र उचित निर्णय लेने का निर्देश दिया है।
पीठ और याचिका की पृष्ठभूमि
मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की खंडपीठ ने अधिवक्ता अर्पित भार्गव द्वारा व्यक्तिगत रूप से दायर जनहित याचिका (PIL) का निपटारा करते हुए यह आदेश पारित किया। याचिकाकर्ता की सहायता अधिवक्ता सार्थक शर्मा, निताशा गुप्ता, आस्था शर्मा और अमृता धवन ने की।
याचिका में जिला न्यायालयों में तकनीकी सुधारों और वादियों की सुविधाओं से जुड़े निम्नलिखित प्रमुख मुद्दे उठाए गए थे:
- जिला अदालतों में ई-इंस्पेक्शन और ई-ट्रू कॉपी के नियमों को लागू करना।
- तकनीक का स्तर दिल्ली उच्च न्यायालय की सुविधाओं के बराबर लाना।
- जजों के अवकाश की अग्रिम सूचना प्रणाली विकसित करना जिससे समय और संसाधनों की बर्बादी रोकी जा सके।
अदालती कार्यवाही और निर्देश
सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि याचिकाकर्ता ने इस संबंध में 23 फरवरी को उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल सहित संबंधित अधिकारियों को एक प्रतिवेदन (Representation) दिया था।
- ई-कमेटी के समक्ष लंबित मामला: दिल्ली उच्च न्यायालय की ओर से पेश वकील ने पीठ को अवगत कराया कि यह प्रतिवेदन पहले से ही ई-कमेटी के विचाराधीन है और जिला अदालतों में रिकॉर्ड के ई-निरीक्षण को लेकर कुछ दिशानिर्देश पहले ही जारी किए जा चुके हैं।
- प्रशासनिक स्तर पर त्वरित कार्रवाई: खंडपीठ ने ई-कमेटी से अनुरोध किया कि वह प्रतिवेदन में उठाए गए सभी बिंदुओं की विस्तृत जांच करे और जनहित याचिका में उठाई गई चिंताओं के समाधान के लिए आवश्यक कदम उठाए।
- वित्तीय प्रावधान: अदालत ने आदेश में स्पष्ट किया कि तकनीकी बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए दिल्ली सरकार से जो भी फंड मांगा जाएगा, सरकार उस पर उचित विचार कर आवश्यक धनराशि जारी करेगी।
जनहित याचिका (PIL) के प्रमुख बिंदु और हाईकोर्ट का आदेश
- जजों की छुट्टी की पूर्व सूचना (Advance Intimation)
- याचिका में मांग की गई थी कि यदि जिला अदालतों के न्यायाधीश अवकाश (Leave) पर हैं, तो इसकी पूर्व सूचना डिजिटल माध्यमों से वकीलों और वादियों को दी जानी चाहिए।
- इससे वकीलों और दूर-दराज से आने वाले मुवक्किलों को अदालत में अनावश्यक चक्कर काटने से बचाया जा सकेगा।
- हाईकोर्ट के स्तर की e-Facilities जिला अदालतों में देने की मांग
- याचिकाकर्ता ने कहा कि जिस तरह दिल्ली हाईकोर्ट में e-Inspection और e-True Copies आसानी से ऑनलाइन मिल जाती हैं, वही सुविधा जिला अदालतों (Tis Hazari, Saket, Patiala House आदि) में भी लागू की जानी चाहिए।
- e-Committee को प्रशासनिक स्तर पर फैसले का निर्देश
- हाईकोर्ट को सूचित किया गया कि याचिकाकर्ता का अभ्यावेदन (Representation) पहले से ही हाईकोर्ट की e-Committee के समक्ष विचाराधीन है और इस पर कुछ दिशा-निर्देश पहले भी जारी किए गए हैं।
- पीठ ने e-Committee को निर्देश दिया कि वह याचिका में उठाए गए सभी मुद्दों की प्रशासनिक स्तर पर जांच कर जल्द से जल्द निर्णय ले।
- दिल्ली सरकार उपलब्ध कराएगी फंड
- हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि जिला अदालतों में बुनियादी तकनीकी ढांचे (IT Infrastructure) के उन्नयन या नई तकनीकों के एकीकरण के लिए अतिरिक्त धन की आवश्यकता होती है, तो दिल्ली सरकार (GNCTD) आवश्यक धनराशि तुरंत उपलब्ध कराएगी।
कुछ अहम बातें
- ई-कमेटी द्वारा प्रशासनिक समीक्षा: अदालत ने निर्देश दिया कि जिला अदालतों में डिजिटलीकरण, ई-निरीक्षण और डिजिटल प्रतियों की व्यवस्था को दिल्ली उच्च न्यायालय के मानकों के अनुरूप बनाने पर उच्च न्यायालय की प्रशासनिक शाखा शीघ्र निर्णय ले।
- जजों के अवकाश की पूर्व सूचना: जनहित याचिका (PIL) में यह मांग भी उठाई गई कि न्यायिक अधिकारियों (न्यायाधीशों) के अवकाश पर रहने की पूर्व सूचना (Advance Intimation) उपलब्ध कराई जाए, ताकि वकीलों और वादियों को अदालत के अनावश्यक चक्कर न लगाने पड़ें।
- दिल्ली सरकार उपलब्ध कराएगी बजट: उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यदि जिला अदालतों में तकनीकी सुविधाओं के उन्नयन या एकीकरण के लिए अतिरिक्त धनराशि की आवश्यकता होगी, तो दिल्ली सरकार (GNCTD) आवश्यक बजट और फंड उपलब्ध कराएगी।
मामले के मुख्य तथ्य और कानूनी विश्लेषण
यह आदेश अर्पित भार्गव द्वारा दायर एक जनहित याचिका (PIL) का निपटारा करते हुए पारित किया गया। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया था कि दिल्ली हाईकोर्ट में वकीलों और पक्षकारों को डिजिटल माध्यम से जो सुविधाएं मिल रही हैं, वैसी सुविधाएं जिला अदालतों में न होने के कारण वकीलों और आम नागरिकों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ता है। हाईकोर्ट के वकील ने पीठ को सूचित किया कि ई-कमेटी पहले से ही इस मामले पर विचार कर रही है और जिला अदालतों में ई-इंस्पेक्शन को लेकर कुछ दिशानिर्देश जारी भी किए जा चुके हैं।
हाईकोर्ट का निर्णय मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने ई-कमेटी से कहा कि वह याचिका में उठाए गए सभी मुद्दों की समीक्षा करे और प्रशासनिक स्तर पर तुरंत उचित कदम उठाए। इसके साथ ही, कोर्ट ने दिल्ली सरकार (GNCTD) को निर्देश दिया कि तकनीकी इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार के लिए जब भी फंड का अनुरोध किया जाए, तो उस पर सकारात्मक रूप से विचार कर तुरंत फंड जारी किया जाए।
केस अवलोकन (Case Snapshot)
| पहलू | विवरण |
| अदालत | दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) |
| पीठ | मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय एवं न्यायमूर्ति तेजस कारिया |
| याचिकाकर्ता | एडवोकेट अर्पित भार्गव (Public Interest Litigation) |
| मुख्य मांगें | e-Inspection, e-True Copies, जजों की छुट्टी का एडवांस नोटिफिकेशन, IT इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड |
| फंडिंग एजेंसी | दिल्ली सरकार (Government of NCT of Delhi) |

