Saturday, August 15, 2026
HomeLatest NewsRTE Act: गूगल एड्रेस में तकनीकी त्रुटि का बहाना वास्तविक निवास के...

RTE Act: गूगल एड्रेस में तकनीकी त्रुटि का बहाना वास्तविक निवास के प्रमाण का विकल्प नहीं हो सकता…आरटीई (RTE) प्रवेश याचिका क्यों हुई खारिज

RTE Act: बॉम्बे हाईकोर्ट ने फर्जी तरीके से प्रवेश पाने की कोशिशों पर एक कड़ा और महत्वपूर्ण विधिक निर्णय सुनाया है।

नाबालिग बच्चे के पिता की ओर से दायर रिट याचिका

हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवींद्र वी. घुगे और जस्टिस गौतम ए. आंखड़ की डिवीजन बेंच ने एक नाबालिग बच्चे (पिता के माध्यम से) द्वारा दायर रिट याचिका को पूरी तरह खारिज (Dismissed) कर दिया। कोर्ट ने पोदार एजुकेशन नेटवर्क के वाघोली (पुणे) स्थित स्कूल द्वारा बच्चे का आरटीई प्रवेश निरस्त करने के फैसले को विधिक रूप से सही ठहराया।

RTE Act: ऑनलाइन फॉर्म की तकनीकी खामियों पर किया कटाक्ष

दरअसल, शिक्षा के अधिकार अधिनियम (RTE Act, 2009) के तहत पड़ोस के कोटे (Neighbourhood Quota) का लाभ उठाने के लिए केवल ऑनलाइन फॉर्म की तकनीकी खामियों या गूगल मैप्स की ऑटो-जेनरेटेड त्रुटियों का बहाना बनाया गया। अदालत ने स्पष्ट व्यवस्था दी है कि गूगल एड्रेस की त्रुटियों के दावे वास्तविक निवास के ठोस विधिक प्रमाण (Proof of Actual Residence) का स्थान नहीं ले सकते।

मामला क्या था? गूगल मैप्स की ‘गलती’ और होटल में रहने का दावा

यह कानूनी विवाद पुणे के एक छात्र के आरटीई के तहत स्कूल में दाखिले से जुड़ा था।

दावा और ग्राउंड: याचिकाकर्ता का दावा था कि वह और उसके माता-पिता 6 अगस्त 2025 से खराड़ी (पुणे) के एक परिसर में रह रहे हैं, जो स्कूल की निर्धारित ‘नेबरहुड’ (पड़ोस की) दूरी के भीतर आता है। ऑनलाइन आवेदन में पते की विसंगति को लेकर उनके दाखिले को खारिज कर दिया गया था, जिसे उन्होंने कोर्ट में चुनौती देते हुए कहा कि यह गड़बड़ी गूगल मैप्स द्वारा ऑटो-जेनरेटेड एड्रेस उठाने की तकनीकी त्रुटि के कारण हुई थी।

फिजिकल वेरिफिकेशन में खुला राज: मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए हाई कोर्ट ने पते की भौतिक विरूपण जांच (Physical Verification) के आदेश दिए। जब मौके पर निरीक्षण किया गया, तो चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई। जिस पते पर रहने का दावा किया जा रहा था, उसके ग्राउंड फ्लोर पर याचिकाकर्ता की मां द्वारा एक छोटा सा भोजनालय (Eating Establishment/होटल) चलाया जा रहा था, जबकि पहली मंजिल पर केवल एक सिंगल बेड/चारपाई (Cot) थी।

अदालत का संज्ञान: कोर्ट ने इस बात पर आश्चर्य और अविश्वास जताया कि तीन सदस्यों का एक पूरा परिवार ऐसे व्यावसायिक परिसर में कैसे रह सकता है जहां केवल एक ही बेड उपलब्ध हो।

Also Read;DU Admission: मिरांडा हाउस को PwBD श्रेणी के तहत 10 वीं रैंक लानेवाली ट्रांसजेंडर छात्रा को क्यों दाखिला देने का दिया आदेश, पढ़ें यह केस

हाई कोर्ट का विधिक विश्लेषण: निवास स्थान की शर्त कोई औपचारिक औपचारिकता नहीं

डिवीजन बेंच ने आरटीई कानून के दुरुपयोग को रोकने के लिए कई महत्वपूर्ण विधिक सिद्धांत स्पष्ट किए।

सबूत का विधिक भार (Burden of Proof) आवेदक पर है

अदालत ने साफ किया कि नेबरहुड कोटे के तहत पात्रता साबित करने का पूरा दायित्व (Onus) याचिकाकर्ता पर है। कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा, दावा किए गए पते पर वास्तविक निवास स्थापित करने वाला कोई स्वतंत्र और समकालीन साक्ष्य रिकॉर्ड पर नहीं है। निरंतर निवास को प्रमाणित करने के लिए कोई बिजली बिल, पानी का बिल, गैस कनेक्शन, बैंक पत्राचार या राशन कार्ड जैसे दस्तावेज पेश नहीं किए गए। केवल ऑनलाइन फॉर्म या गूगल एड्रेस में त्रुटि होने के दावे वास्तविक निवास के प्रमाण का विकल्प नहीं हो सकते।

पते के विधिक दस्तावेजों में भारी विसंगतियां

अदालत ने पाया कि याचिकाकर्ता द्वारा प्रस्तुत किए गए विभिन्न विधिक दस्तावेजों में भारी विरोधाभास था। प्रवेश फॉर्म, लीव एंड लाइसेंस (किरायानामा) समझौता, मतदाता पहचान पत्र (Voter ID) और अन्य आधिकारिक पहचान रिकॉर्ड्स में दिए गए पते आपस में मेल नहीं खा रहे थे।

RTE Act:आरक्षित कोटे की पात्रता को हल्का नहीं किया जा सकता

हाई कोर्ट ने रेखांकित किया कि आरटीई के तहत निवास की आवश्यकता कोई खाली या कागजी औपचारिकता (Empty Formality) नहीं है, बल्कि यह आरक्षित कोटे के तहत प्रवेश को नियंत्रित करने वाली एक अनिवार्य पात्रता शर्त (Essential Eligibility Condition) है। कोर्ट ने कहा, संतोषजनक प्रमाण के अभाव में ऐसी आवश्यकताओं को नजरअंदाज करने या ढीला करने से न केवल वैधानिक योजना का उद्देश्य विफल होगा, बल्कि इसका परिणाम किसी अन्य जरूरतमंद और गरीब बच्चे को प्रवेश के लाभ से वंचित करना हो सकता है जो वास्तव में ‘नेबरहुड’ की शर्तों को पूरा करता है।

RTE Act:केस मैट्रिक्स और विधिक सारांश (Case Matrix Overview)

विधिक श्रेणियां / बिंदुबंबई उच्च न्यायालय का विधिक निर्णय (2026)
संबंधित अदालतबंबई उच्च न्यायालय (Division Bench)
माननीय न्यायाधीशकार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवींद्र वी. घुगे और जस्टिस गौतम ए. आंखड़
मूल अधिनियम/कानूनशिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE Act, 2009) – नेबरहुड कोटा
विवादित संस्थानपोदार एजुकेशन नेटवर्क, वाघोली, पुणे (महाराष्ट्र)
मुख्य विधिक प्रश्नक्या गूगल मैप्स एड्रेस की तकनीकी खराबी का दावा, वास्तविक निवास के दस्तावेजी प्रमाणों (बिजली/पानी बिल आदि) की कमी को पूरा कर सकता है?
अदालत का विधिक स्टैंडनहीं। आरटीई के तहत निवास स्थान की पात्रता अनिवार्य शर्त है। संतोषजनक सबूतों के बिना इसे तकनीकी आधार पर अनदेखा नहीं किया जा सकता, अन्यथा वास्तविक हकदार बच्चे का अधिकार मारा जाएगा।
अंतिम न्यायिक परिणामरिट याचिका पूरी तरह खारिज (Writ Petition Dismissed); स्कूल द्वारा प्रवेश रद्द करने का निर्णय बरकरार।
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Patna
overcast clouds
30 ° C
30 °
30 °
84 %
3.1kmh
100 %
Fri
30 °
Sat
35 °
Sun
36 °
Mon
29 °
Tue
32 °