Monday, August 10, 2026
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DU Admission: मिरांडा हाउस को PwBD श्रेणी के तहत 10 वीं रैंक लानेवाली ट्रांसजेंडर छात्रा को क्यों दाखिला देने का दिया आदेश, पढ़ें यह केस

DU Admission: दिव्यांग व्यक्तियों के लिए मुख्य आयुक्त की अदालत ने दिल्ली विवि के प्रतिष्ठित मिरांडा हाउस कॉलेज को एक मेधावी ट्रांसजेंडर और दिव्यांग छात्रा को बीए.एलएलबी कार्यक्रम में तुरंत दोबारा दाखिला देने का आदेश दिया है।

CLAT 2025 की दिव्यांग श्रेणी में ऑल इंडिया रैंक (AIR) 10 हासिल किया था छात्रा

Court of the Chief Commissioner for Persons with Disabilities(CCPD) के कमिश्नर एस. गोविंदराज ने कॉलेज के इस कृत्य को शत्रुतापूर्ण भेदभाव (Hostile Discrimination) करार दिया। यह छात्रा कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट (CLAT) 2025 की PwBD (दिव्यांग) श्रेणी में ऑल इंडिया रैंक (AIR) 10 हासिल करने के बावजूद हॉस्टल न मिलने के कारण नियमित कक्षाएं छोड़ने को मजबूर हो गई थी। CCPD ने अपने आदेश में कहा, तार्किक आवास का सिद्धांत एक वैधानिक, संवैधानिक और मानवाधिकार दायित्व है जिसे एक मेधावी दिव्यांग व्यक्ति के लिए सक्रिय रूप से बढ़ाया जाना चाहिए था। प्रतिवादी (कॉलेज) द्वारा छात्रा की उत्कृष्ट योग्यता और उच्च स्कोर के बावजूद हॉस्टल इंटरव्यू की शुरुआती सूची में उसका नाम न शामिल करना सीधे तौर पर शत्रुतापूर्ण भेदभाव का मामला है।

मामले की पृष्ठभूमि: मेधावी छात्रा, गरीबी और प्रशासनिक उदासीनता

विशिष्ट पहचान और योग्यता: यह मामला कानून की पढ़ाई कर रही छात्रा अनुष्का प्रियदर्शिनी से जुड़ा है। अनुष्का के पास विशिष्ट विकलांगता पहचान पत्र (UDID) है जो उनकी 48% बौद्धिक दिव्यांगता (Intellectual Disability) की पुष्टि करता है। इसके साथ ही वह एक ट्रांसजेंडर और इंटरसेक्स व्यक्ति हैं। उन्होंने CLAT 2025 में सामान्य श्रेणी में 2,907वीं रैंक और PwBD श्रेणी में AIR 10 हासिल की थी।

हॉस्टल से वंचित: दिल्ली से बाहर की और आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि से आने के कारण अनुष्का दिल्ली में निजी आवास का खर्च उठाने में असमर्थ थीं। उन्होंने हॉस्टल के लिए आवेदन किया, लेकिन PwBD के लिए आरक्षित 2 सीटें और 5 विवेकाधीन (Discretionary) सीटें खाली होने के बावजूद उन्हें शॉर्टलिस्ट नहीं किया गया।

डिस्टेंस लर्निंग की मजबूरी को बनाया हथियार: रहने की जगह न होने के कारण मजबूरन अनुष्का ने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (IGNOU) के माध्यम से डिस्टेंस लर्निंग में दाखिला ले लिया। मिरांडा हाउस प्रशासन ने इसी कदम को आधार बनाकर उन्हें कॉलेज का ‘पूर्व-छात्र’ (Ex-Student) घोषित कर दिया और उनका हॉस्टल आवेदन पूरी तरह खारिज कर दिया।

अदालती हस्तक्षेप: अनुष्का ने CCPD और राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) का दरवाजा खटखटाया। बाद में उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट में भी याचिका दायर की, जहां जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव ने 18 मई को CCPD को 6 सप्ताह के भीतर इस शिकायत का निपटारा करने का निर्देश दिया था।

CCPD का विधिक विश्लेषण: कॉलेज की नीतियां अवैध और भेदभावपूर्ण

मुख्य आयुक्त की अदालत ने मिरांडा हाउस की दलीलों और आंतरिक नीतियों को पूरी तरह खारिज करते हुए कई महत्वपूर्ण विधिक टिप्पणियां कीं।

आंतरिक उप-वर्गीकरण (Sub-Categorisation) गैर-कानूनी

CCPD ने पाया कि हॉस्टल आवंटन के लिए दिव्यांगता की श्रेणियों का आंतरिक रूप से उप-वर्गीकरण करने की कॉलेज की नीति का कोई वैधानिक आधार नहीं है। यह दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकार (RPwD) अधिनियम, 2016 की धारा 32 का सीधा उल्लंघन है, जो सभी बेंचमार्क दिव्यांगों के लिए न्यूनतम 5% आरक्षण को अनिवार्य बनाती है।

ओपन कैटेगरी का हकदार (सुप्रीम कोर्ट का हवाला)

सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले सौरव यादव बनाम उत्तर प्रदेश राज्य का हवाला देते हुए कमिश्नर ने स्पष्ट किया कि अनुष्का की कुल रैंक (2,907) इतनी अच्छी थी कि वे ओपन-कैटेगरी (सामान्य सूची) में भी हॉस्टल और सीट की हकदार थीं। इसलिए कॉलेज का यह बहाना कि ‘कोटा भर चुका है’, कानूनन लागू नहीं होता।

जेंडर पहचान पर सवाल उठाने का कोई अधिकार नहीं

लैंगिक पहचान (Gender Identity) के मुद्दे पर कमीशन ने बेहद कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि किसी भी शैक्षणिक संस्थान को किसी छात्र की स्व-अनुभूत लैंगिक पहचान (Self-Perceived Gender Identity) पर सवाल उठाने का कोई अधिकार नहीं है। यदि क्रेडेंशियल से जुड़ी कोई शंका थी, तो उसे दिल्ली विश्वविद्यालय के समान अवसर सेल (Equal Opportunity Cell) के पास भेजा जाना चाहिए था।

CCPD की मिरांडा हाउस को प्रमुख सिफारिशें और निर्देश

कमिश्नर ने मिरांडा हाउस प्रशासन को 13 सूत्रीय निर्देश जारी किए हैं, जिनमें मुख्य हैं अनुष्का प्रियदर्शिनी को उनके BA.LL.B. कोर्स में बिना किसी क्रेडिट पेनल्टी के तुरंत पुनः प्रवेश (Re-admit) दिया जाए। उन्हें उनकी पूरी पढ़ाई निःशुल्क (Free of Cost) उपलब्ध कराई जाए। दिल्ली विश्वविद्यालय की ‘ट्रांसजेंडर छात्रों के लिए नीति’ के अनुरूप उन्हें हॉस्टल फीस में पूरी छूट/रियायत दी जाए।

दंडात्मक कार्रवाई की चेतावनी: कॉलेज को इस आदेश पर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट (Action Taken Report) दाखिल करने के लिए 30 दिनों का समय दिया गया है। यदि कॉलेज ऐसा करने में विफल रहता है, तो कमीशन ने RPwD अधिनियम की धारा 89 और 93 के तहत दंडात्मक कार्यवाही (Penal Proceedings) शुरू करने की चेतावनी दी है।

केस मैट्रिक्स और विधिक सारांश (Case Overview)

कानूनी और प्रशासनिक बिंदुदिव्यांगता आयुक्त अदालत (CCPD) की कार्यवाही (जून 2026)
फोरम/अदालतमुख्य आयुक्त कार्यालय, दिव्यांगजन (CCPD)
मुख्य आयुक्तकमिश्नर एस. गोविंदराज
याचिकाकर्ता (छात्रा)अनुष्का प्रियदर्शिनी (CLAT 2025 – PwBD AIR 10)
प्रतिवादी संस्थानमिरांडा हाउस, दिल्ली विश्वविद्यालय (DU)
उल्लंघन की गई धाराएंRPwD अधिनियम, 2016 की धारा 32 (आरक्षण का उल्लंघन) और धारा 89, 93 (दंडात्मक प्रावधान)
अंतिम आदेश30 दिनों के भीतर छात्रा को मुफ़्त शिक्षा, हॉस्टल रियायत और पुनः प्रवेश देने का सख्त निर्देश
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