Wednesday, September 30, 2026
HomeLaworder HindiSC News: सीबीआई के जांच तरीकों पर यूं उठाया सुप्रीम कोर्ट ने...

SC News: सीबीआई के जांच तरीकों पर यूं उठाया सुप्रीम कोर्ट ने सवाल, कश्मीर विवि के तत्कालीन वीसी व सचिव के हत्यारे बरी…

SC News: सुप्रीम कोर्ट ने 1990 में कश्मीर विश्वविद्यालय के तत्कालीन कुलपति मुशीर-उल-हक और उनके निजी सचिव के सनसनीखेज अपहरण और हत्या मामले में प्रतिबंधित जम्मू-कश्मीर छात्र मुक्ति मोर्चा (जेकेएसएलएफ) के कथित सदस्यों को बरी करने के फैसले को बरकरार रखा है।

सीबीआई की अपील को सुप्रीम कोर्ट ने किया खारिज

न्यायमूर्ति अभय एस ओका और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ ने अब निरस्त हो चुके आतंकवादी और विध्वंसकारी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1987 (टाडा) के तहत दर्ज मामले में सात लोगों को बरी करने को चुनौती देने वाली सीबीआई की अपील को खारिज कर दिया। अदालत ने मामले से निपटने के तरीके की आलोचना करते हुए कहा कि प्रक्रियात्मक सुरक्षा उपायों को पूरी तरह से दरकिनार कर दिया गया और आरोपियों और पीड़ितों दोनों के लिए सच्चाई और न्याय मायावी बना रहा।

प्रक्रियात्मक सुरक्षा उपायों को दरकिनार कर दिया गया

शीर्ष अदालत ने कहा कि विधानमंडल ने एसपी और उससे ऊपर के रैंक के उच्च पुलिस अधिकारियों की निष्पक्षता और ईमानदारी पर बहुत भरोसा जताया है, जबकि उन्हें अभियुक्तों के इकबालिया बयान दर्ज करने की कठोर शक्ति प्रदान की है, जो प्रक्रियात्मक सुरक्षा उपायों की पूर्ति के अधीन साक्ष्य के रूप में स्वीकार्य है। लेकिन हमें डर है कि जहां तक ​​वर्तमान मामले का संबंध है, प्रक्रियात्मक सुरक्षा उपायों को पूरी तरह से दरकिनार कर दिया गया है। विशेष अदालत ने यह टिप्पणी करने से परहेज किया है कि यह शक्ति और अधिकार के दुरुपयोग का मामला था। यह वास्तव में एक दुखद प्रतिबिंब है कि इस मामले में जांच और परीक्षण कैसे सामने आया, जहां पीड़ितों और अभियुक्तों दोनों के लिए सच्चाई और न्याय मायावी रहा। यह बिना कारण नहीं है कि ऐसे कठोर प्रावधानों को तब से निरस्त कर दिया गया है। हम यही कहते हैं और इससे ज्यादा कुछ नहीं।

अदालत के दृष्टिकाेण में कोई त्रुटि या कमजोरी नहीं दिखती

शीर्ष अदालत ने कहा कि उसे अभियुक्तों को बरी करने में विशेष अदालत द्वारा लिए गए दृष्टिकोण में कोई त्रुटि या कमजोरी नहीं दिखती है। यह कोई उचित दृष्टिकोण का मामला भी नहीं है। कोई अन्य दृष्टिकोण संभव नहीं है। परिणामस्वरूप, आपराधिक अपील में कोई योग्यता नहीं है जिसे तदनुसार खारिज किया जाता है। करतार सिंह मामले में अपने पहले के फैसले का हवाला देते हुए, न्यायालय ने कहा कि स्वीकारोक्ति को स्वतंत्र वातावरण में दर्ज किया जाना चाहिए। न्यायालय ने कहा कि भारी सुरक्षा वाले बीएसएफ शिविर में स्वीकारोक्ति बयान दर्ज करना, जहां आरोपी के लिए माहौल आम तौर पर डरावना और दबंग होता है, उसे स्वतंत्र वातावरण में दर्ज करना नहीं कहा जा सकता।

रिहाई नहीं करने के एवज में बंधकों की हत्या कर दी गई

सीबीआई के अनुसार, जांच से पता चला कि हिलाल बेग प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन जम्मू और कश्मीर छात्र मुक्ति मोर्चा (जेकेएसएलएफ) का स्वयंभू मुख्य कमांडर था। बेग ने जेकेएसएलएफ के अन्य सदस्यों आरोपी जावेद शाला, ताहिर अहमद मीर, मुश्ताक अहमद शेख, मुश्ताक अहमद खान, मोहम्मद हुसैन खान और मोहम्मद सलीम जरगर के साथ मिलकर कश्मीर विश्वविद्यालय के कुलपति मुशीर-उल-हक और अन्य का अपहरण करने की साजिश रची, ताकि जनता के मन में आतंक पैदा किया जा सके। सरकार को उनके सहयोगियों निसार अहमद जोगी, गुलाम नबी भट और फैयाज अहमद वानी को रिहा करने के लिए मजबूर किया जा सके। हक और उनके निजी सचिव अब्दुल गनी को 6 अप्रैल, 1990 को आतंकवादियों ने उनके सहयोगियों की रिहाई की मांग के लिए अगवा कर लिया था। आरोप है कि मांगें पूरी न होने पर 10 अप्रैल, 1990 को दोनों बंधकों की हत्या कर दी गई।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Patna
few clouds
32.1 ° C
32.1 °
32.1 °
56 %
4.3kmh
13 %
Wed
31 °
Thu
32 °
Fri
34 °
Sat
33 °
Sun
33 °

Recent Comments