Friday, October 2, 2026
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Scam News: रेल मंत्री रहे लालू यादव के कार्यकाल के कौन पूर्व आईएएस, जो नौकरी के बदले जमीन घोटाले में फंसे…

Scam News: केंद्रीय जांच ब्यूरो ने पूर्व आईएएस अधिकारी आरके महाजन के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति दायर की है। वह लालू प्रसाद यादव के कार्यकाल के दौरान रेलवे बोर्ड के सदस्य थे। यह अभियोजन स्वीकृति भूमि के बदले नौकरी मामले में दाखिल की गई है।

पूर्व आईएएस की अभियोजन स्वीकृति अदालत के रिकॉर्ड पर रखा…


विशेष सीबीआई न्यायाधीश विशाल गोगने ने महाजन के खिलाफ सक्षम प्राधिकारी द्वारा दी गई अभियोजन मंजूरी को रिकॉर्ड पर लिया। यह मंजूरी निर्णायक आरोप पत्र के खिलाफ दाखिल की गई है। विशेष लोक अभियोजक (एसपीपी) डीपी सिंह वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से और अधिवक्ता मनु मिश्रा शारीरिक रूप से अदालत के समक्ष उपस्थित हुए। बताया गया कि अभियोजन स्वीकृति प्राप्त कर न्यायालय में दाखिल कर दी गई है।

30 लोक सेवकों के खिलाफ पहले ली जा चुकी अभियोजन स्वीकृति

सीबीआई पहले ही 30 लोक सेवकों और पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति दायर कर चुकी है।
20 सितंबर, 2024 को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने लालू प्रसाद यादव पर मुकदमा चलाने की मंजूरी दाखिल की। 7 जून को, सीबीआई ने नौकरी के बदले जमीन मामले में लालू प्रसाद यादव और 77 अन्य आरोपियों के खिलाफ निर्णायक आरोप पत्र दायर किया। आरोपपत्रित आरोपियों में 38 अभ्यर्थी भी शामिल हैं।

पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी भी बनाए गए थे आरोपी

अदालत ने 29 मई, 2024 को सीबीआई को मामले में अपनी निर्णायक चार्जशीट दाखिल करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने समय देने के बावजूद निर्णायक आरोप पत्र दाखिल न किए जाने पर भी नाराजगी जताई थी। इस घोटाले में लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव को आरोपी बनाया गया है। 4 अक्टूबर, 2023 को अदालत ने मामले में नए आरोप पत्र के संबंध में पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव, बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव, राबड़ी देवी और अन्य को जमानत दे दी थी।

यह है नौकरी के बदले जमीन घोटाले का दूसरा आरोप पत्र

सीबीआई के अनुसार, नौकरी के बदले जमीन घोटाले से जुड़ा मामले में दूसरा आरोप पत्र तत्कालीन केंद्रीय रेल मंत्री, उनकी पत्नी, बेटे, पश्चिम मध्य रेलवे (डब्ल्यूसीआर) के तत्कालीन जीएम, डब्ल्यूसीआर के दो सीपीओ, निजी व्यक्तियों, निजी कंपनी आदि सहित 17 आरोपियों के खिलाफ है। सीबीआई ने 18 मई, 2022 को तत्कालीन केंद्रीय रेल मंत्री और उनकी पत्नी, दो बेटियों और अज्ञात लोक सेवकों और निजी व्यक्तियों सहित अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया। यह आरोप लगाया गया है कि रेलवे के विभिन्न जोन में 2004-2009 की अवधि के दौरान तत्कालीन केंद्रीय रेल मंत्री ने समूह “डी” पद पर प्रतिस्थापन की नियुक्ति के बदले में अपने परिवार के सदस्यों आदि के नाम पर भूमि संपत्ति के हस्तांतरण के रूप में आर्थिक लाभ प्राप्त किया था।

विज्ञापन व सार्वजनिक सूचना निकाले बगैर हुई भर्ती

आरोप लगाया कि इसके बदले में, स्थानापन्न, जो स्वयं या अपने परिवार के सदस्यों के माध्यम से पटना के निवासी थे, ने पटना में स्थित अपनी जमीन उक्त मंत्री के परिवार के सदस्यों और उनके परिवार के सदस्यों द्वारा नियंत्रित एक निजी कंपनी के पक्ष में बेच दी और उपहार में दे दी। जो उक्त परिवार के सदस्यों के नाम पर ऐसी अचल संपत्तियों के हस्तांतरण में भी शामिल था। यह भी आरोप लगाया गया कि जोनल रेलवे में स्थानापन्न की ऐसी नियुक्तियों के लिए कोई विज्ञापन या कोई सार्वजनिक सूचना जारी नहीं की गई थी, फिर भी जो नियुक्त व्यक्ति पटना के निवासी थे। उन्हें मुंबई, जबलपुर, कोलकाता, जयपुर और हाजीपुर में स्थित विभिन्न जोनल रेलवे में स्थानापन्न के रूप में नियुक्त किया गया था। सीबीआई ने कहा, दिल्ली, बिहार आदि सहित कई स्थानों पर तलाशी ली गई।

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