मामला सारांश (At a Glance)
| पहलू | विवरण |
| जांचकर्ता संस्था | नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) |
| संबंधित प्राधिकरण | FSSAI (कोलकाता/पूर्वी क्षेत्र कार्यालय) |
| ऑडिट अवधि | वित्त वर्ष 2017-18 से 2022-23 |
| कुल दोषी कंपनियां | 2,430 (1,018 बिना रिटर्न + 1,412 देर से रिटर्न) |
| देय जुर्माना राशि | ₹5.60 करोड़ (वसूली केवल ₹2.27 करोड़) |
| मुख्य निष्कर्ष | खाद्य सुरक्षा अनुपालन में विफलता; डिफ़ॉल्टरों पर न तो जुर्माना लगा और न ही लाइसेंस रद्द हुए। |
FSSAI Report Card: भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की ऑडिट रिपोर्ट में भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) की बड़ी लापरवाही उजागर हुई है।
यह लापरवाही FSSAI के कोलकाता स्थित पूर्वी क्षेत्रीय कार्यालय (Eastern Region Office) के ऑडिट के दौरान पाई गई। रिपोर्ट के अनुसार, FSSAI ने 2017-18 से 2022-23 की अवधि के दौरान mandatory वार्षिक रिटर्न (Annual Returns) न भरने या देरी से भरने वाली 2,430 खाद्य कंपनियों (Food Businesses) पर कानूनी रूप से देय ₹5.60 करोड़ का जुर्माना नहीं लगाया।
CAG ऑडिट की मुख्य बातें और उल्लंघन
- वार्षिक रिटर्न में डिफ़ॉल्ट (Default Breakdown)
- 1,018 कंपनियों ने निर्धारित अवधि के दौरान अपना वार्षिक रिटर्न जमा ही नहीं किया।
- 1,412 कंपनियों ने नियत तिथि के बाद देरी से रिटर्न दाखिल किया।
- जुर्माना और वसूली की स्थिति
- देय कुल जुर्माना: CAG के आकलन के अनुसार ₹5.60 करोड़।
- वास्तविक वसूली: ऑडिट के बाद FSSAI केवल ₹2.27 करोड़ ही वसूल कर सका।
- कार्रवाई का अभाव: अगस्त 2023 तक डिफ़ॉल्ट करने वाली किसी भी कंपनी का लाइसेंस न तो निलंबित किया गया और न ही रद्द किया गया।
- वार्षिक रिटर्न का महत्व
- लाइसेंस प्राप्त खाद्य व्यवसायों के लिए हर साल 31 मई तक वार्षिक रिटर्न जमा करना अनिवार्य है। इसमें वर्ष भर में उत्पादित, आयातित, निर्यातित या संभाले गए खाद्य पदार्थों की मात्रा का पूरा विवरण होता है।
- समय-सीमा चूकने पर प्रतिदिन ₹100 के हिसाब से जुर्माना (नियमानुसार सीमा के अधीन) लगाने का प्रावधान है।
FSSAI की प्रतिक्रिया
CAG द्वारा विफलता को रेखांकित करने के बाद, FSSAI ने सफाई दी कि उसने कुछ डिफ़ॉल्टिंग कंपनियों को ‘सुधार नोटिस’ (Improvement Notices) जारी किए हैं और बाकी सभी बकाया कंपनियों को दोबारा नोटिस जारी किए जाएंगे।
हालाँकि, CAG ने स्पष्ट किया कि बुनियादी खाद्य सुरक्षा नियमों और अनुपालन (Compliance) की निगरानी में खाद्य नियामक का प्रवर्तन (Enforcement) तंत्र बेहद कमजोर रहा है।

