Friday, October 2, 2026
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Scam Update: वर्ष 2010 सीडल्यूजी घोटाला…सुरेश कलमाड़ी पर मनी लॉन्डिंग के आरोप पर ईडी की क्लोजर रिपोर्ट

Scam Update: विशेष अदालत में सीडब्लूजी घोटाले को लेकर समिति प्रमुख सुरेश कलमाड़ी सहित अन्य के खिलाफ ईडी ने क्लोजर रिपोर्ट पेश की।

मनी लॉन्ड्रिंग पहलु का क्लोजर रिपोर्ट आने से हुआ अंत

विशेष न्यायाधीश संजीव अग्रवाल ने15 साल पुराने मामले का पटाक्षेप करते हुए 2010 राष्ट्रमंडल खेलों की आयोजन समिति के पूर्व प्रमुख सुरेश कलमाड़ी, तत्कालीन महासचिव ललित भनोट और अन्य के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दायर क्लोजर रिपोर्ट (समापन रिपोर्ट) को स्वीकार कर लिया। इस क्लोजर रिपोर्ट के स्वीकार होने से लगभग 15 साल पहले हुए कथित घोटाले में मनी लॉन्ड्रिंग के पहलू का अंत हो गया है।

ईडी ने भी मामले में सीबीआई के बाद शुरू की थी जांच

विशेष न्यायाधीश संजीव अग्रवाल ने उल्लेख किया कि भ्रष्टाचार के मामले को पहले ही सीबीआई ने बंद कर दिया था, जिसके आधार पर ईडी ने अपनी मनी लॉन्ड्रिंग जांच शुरू की थी। अदालत ने ईडी की रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया, जिसमें कॉमनवेल्थ गेम्स आयोजन समिति (सीडब्लूजी ओसी) के तत्कालीन मुख्य परिचालन अधिकारी विजय कुमार गौतम, तत्कालीन कोषाध्यक्ष ए.के. मट्टो, इवेंट नॉलेज सर्विस, स्विट्जरलैंड और इसके सीईओ क्रेग गॉर्डन मैलाचे का नाम भी शामिल था।

आरोपी पर मनी लॉन्ड्रिंग का कोई अपराध सामने नहीं आया

न्यायाधीश ने ईडी के इस बयान को भी रिकॉर्ड किया कि जांच के दौरान मनी लॉन्ड्रिंग का कोई अपराध सामने नहीं आया। अदालत ने कहा, “चूंकि जांच के दौरान अभियोजन पक्ष मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) की धारा 3 के तहत कोई अपराध स्थापित करने में विफल रहा है… और ईडी द्वारा विस्तृत जांच के बावजूद कोई अपराध नहीं पाया गया, अतः वर्तमान ईसीआईआर को जारी रखने का कोई औचित्य नहीं है। परिणामस्वरूप, ईडी द्वारा दायर की गई समापन रिपोर्ट स्वीकार की जाती है। ईडी की मनी लॉन्ड्रिंग जांच सीबीआई द्वारा दर्ज एक मामले के आधार पर शुरू हुई थी।

जीडब्लूएस व जीपीपीआरएमएस से हुए थे कार्य अनुबंध

सीबीआई के अनुसार, राष्ट्रमंडल खेलों से संबंधित कार्य अनुबंध गेम्स वर्कफोर्स सर्विस (जीडब्लूएस) और गेम्स प्लानिंग, प्रोजेक्ट एंड रिस्क मैनेजमेंट सर्विसेज ( जीपीपीआरएमएस) से जुड़े थे। सीबीआई ने आरोप लगाया था कि आरोपियों ने जानबूझकर और गलत तरीके से इन दोनों अनुबंधों को ईकेएस और अर्न्स्ट एंड यंग के गठजोड़ को देकर उन्हें अनुचित वित्तीय लाभ पहुंचाया और आयोजन समिति (ओसी, सीडब्लूजी) को लगभग 30 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाया। बाद में सीबीआई ने जनवरी 2014 में एक समापन रिपोर्ट दाखिल की थी, जिसमें कहा गया था कि जांच के दौरान कोई भी आपराधिक सबूत सामने नहीं आया” और प्राथमिकी में लगाए गए आरोपों को आरोपियों के खिलाफ साबित नहीं किया जा सका।

सीडब्लूजी घोटाले के बाद राजनीतिक हंगामा हुआ था

2010 राष्ट्रमंडल खेलों (सीडब्लूजी) के आयोजन में कथित भ्रष्टाचार के आरोपों ने देश में भारी राजनीतिक हंगामा खड़ा कर दिया था, जिसके चलते कई आपराधिक और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामलों की जांच शुरू हुई थी, जिसमें यह मामला भी शामिल था। कलमाड़ी और अन्य पर खेलों के लिए दो महत्वपूर्ण अनुबंधों के आवंटन और निष्पादन में गड़बड़ी के आरोप लगे थे।

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