SCBA Member: दिल्ली के मॉडल टाउन इलाके में खुद पर हुए कथित हमले और पुलिस की निष्क्रियता के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के एक वरिष्ठ वकील ने शीर्ष अदालत में रिट याचिका दायर की है।
यह है याचिकाकर्ता का दावा
याचिकाकर्ता ने दावा किया कि अदालत के एक अधिकारी (अफसर-ऑन-रिकॉर्ड) पर उनके अपने ही घर के भीतर राजनीतिक प्रभाव वाले लोगों द्वारा जानलेवा हमला किया गया, जिससे उनके सिर पर गंभीर चोटें आईं और अत्यधिक खून बहा। इसके बावजूद पुलिस ने मामले को दबाने के लिए केवल ‘साधारण मारपीट’ की हल्की धाराओं में केस दर्ज किया। यह कानून प्रवर्तन एजेंसियों (Law Enforcement Agencies) की व्यवस्थागत विफलता (Systemic Failure) है, जो सीधे तौर पर संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन है।
मामला क्या है?: घर में घुसकर लोहे के गेट पर पटका सिर, आए 8 टांके
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) के सदस्य और पिछले 20 वर्षों से शीर्ष अदालत में वकालत कर रहे अधिवक्ता पंकज शर्मा ने अधिवक्ता तरुण गुप्ता के माध्यम से यह याचिका दायर की है। याचिका में निम्नलिखित गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
क्रूर हमला: 11 जुलाई (2026) को दोपहर करीब 12 बजे कई लोग जबरन पंकज शर्मा के घर में घुस आए और उन पर जानलेवा हमला कर दिया। हमलावरों ने जानबूझकर उनका सिर लोहे के एक गेट पर दे मारा, जिससे उनके सिर पर गहरा घाव (Lacerations) हो गया और भारी मात्रा में खून बहने के कारण वे बेहोश हो गए। उन्हें तुरंत पेंटामेड अस्पताल ले जाया गया, जहां उनके सिर पर 8 टांके (Stitches) आए।
राजनीतिक रसूख की धौंस: हमले के दौरान एक आरोपी ने कथित तौर पर डींग मारी कि वह उस इलाके का अध्यक्ष है और उसके पास मजबूत राजनीतिक पहुंच है, जिसके कारण पुलिस उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकती।
लगातार धमकियां: याचिका में आरोप है कि अगले ही दिन (12 जुलाई) कुछ आरोपी दोबारा उनके घर आए, जबरन भीतर घुसने की कोशिश की और परिवार को एफआईआर (FIR) वापस न लेने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी।
पुलिसिया कार्रवाई पर सवाल: गंभीर धाराओं को जानबूझकर छोड़ने का आरोप
याचिकाकर्ता का मुख्य आरोप यह है कि जिला अपराध टीम (District Crime Team) द्वारा मौका-मुआयना करने और मेडिकल रिपोर्ट सामने आने के बाद भी मॉडल टाउन थाना पुलिस ने राजनीतिक दबाव में आकर आरोपियों को बचाने का प्रयास किया।
दर्ज की गई धाराएं: पुलिस ने 11 जुलाई को भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 332(c) (घर में अतिचार/Trespass), 115(2) (स्वेच्छा से चोट पहुंचाना) और 3(5) (समान इरादा/Common Intention) के तहत प्राथमिकी दर्ज की। ये धाराएं मुख्य रूप से साधारण चोट और अतिचार से जुड़ी हैं।
बचाई गई धाराएं: याचिकाकर्ता के अनुसार, सिर की गंभीर चोट और जानलेवा हमले की प्रकृति को देखते हुए पुलिस को BNS की निम्नलिखित धाराएं लगानी चाहिए थीं, जिन्हें जानबूझकर छोड़ दिया गया। इसमें धारा 109 (BNS): हत्या का प्रयास (Attempt to Murder) [जो पहले IPC की धारा 307 थी। धारा 117 और 118(2) (BNS): खतरनाक हथियारों या तरीकों से जानबूझकर गंभीर चोट पहुंचाना (Grievous Hurt by Dangerous Weapons) [जो पहले IPC की धारा 325/326 थी]।
केस शीट: सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट सुरक्षा एवं एफआईआर संशोधन याचिका (2026)
| कानूनी और प्रशासनिक श्रेणियां | रिट याचिका में उठाई गई मांगें और विधिक स्थिति |
| याचिकाकर्ता (Petitioner) | पंकज शर्मा (अधिवक्ता, सुप्रीम कोर्ट) |
| काउंसिल/अधिवक्ता | तरुण गुप्ता |
| संबद्ध पुलिस स्टेशन | मॉडल टाउन पुलिस स्टेशन, नई दिल्ली |
| वर्तमान एफआईआर धाराएं | धारा 332(c), 115(2), और 3(5) BNS (साधारण चोट व अतिचार) |
| जोड़ने की मांग वाली धाराएं | धारा 109 (हत्या का प्रयास), 117 और 118(2) BNS (गंभीर चोट) |
| संवैधानिक आधार | अनुच्छेद 21 (Right to Life and Personal Liberty) |
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) का हस्तक्षेप
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) ने भी कड़ा रुख अपनाया है।
प्रस्ताव और पत्र: SCBA ने 13 जुलाई 2026 को एक आधिकारिक प्रस्ताव पारित कर इस हमले की कड़े शब्दों में निंदा की।
पुलिस कमिश्नर को पत्र: एसोसिएशन ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर को पत्र लिखकर इस मामले में आरोपियों के खिलाफ सख्त और त्वरित दंडात्मक कार्रवाई करने की मांग की थी। हालांकि, याचिका में कहा गया है कि बार एसोसिएशन के हस्तक्षेप के बावजूद दिल्ली पुलिस ने मामले में कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया है, जिससे पीड़ित का परिवार लगातार खौफ के साए में जी रहा है।
याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से क्या राहत मांगी है?
मामले में स्थानीय पुलिस के निष्पक्ष न होने का दावा करते हुए अधिवक्ता पंकज शर्मा ने अदालत से निम्नलिखित अंतरिम और अंतिम राहतों की गुहार लगाई है:
पुलिस सुरक्षा: उन्हें और उनके परिवार को स्थानीय गुंडों से बचाने के लिए तत्काल 24/7 पुलिस सुरक्षा मुहैया कराई जाए।
जांच का ट्रांसफर: मामले की जांच को मॉडल टाउन पुलिस स्टेशन से हटाकर किसी स्वतंत्र जांच एजेंसी या विशेष विंग को ट्रांसफर किया जाए ताकि निष्पक्ष जांच (Fair Investigation) हो सके।
एफआईआर में संशोधन: पुलिस को निर्देश दिया जाए कि वे एफआईआर में तुरंत हत्या के प्रयास (Section 109 BNS) और गंभीर चोट (Section 117, 118(2) BNS) की संगीन धाराएं जोड़ें।
स्वतंत्र मेडिकल जांच: पीड़ित की चोटों की गंभीरता का सटीक आकलन करने के लिए एक बार फिर से गहन चिकित्सा परीक्षण कराया जाए।

