Monday, August 31, 2026
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Misconduct Case: जज की जगह पेशकार रिकॉर्ड कर रहा था गवाही!’…आरोपी जज का निलंबन बरकरार; कहा- सस्पेंशन एम्प्लॉयर का विशेषाधिकार

Misconduct Case: एक बेहद असाधारण और चौंकाने वाले प्रशासनिक मामले में सिक्किम हाईकोर्ट ने अपनी ही एक न्यायिक अधिकारी (जज) के निलंबन (Suspension) को सही ठहराते हुए उनकी याचिका को खारिज कर दिया है।

यदि आरोप सच साबित होते हैं, तो यह एक बड़ा जुर्म है: अदालत

हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ए. मोहम्मद मुश्ताक की पीठ ने स्पष्ट किया कि यदि आरोप सच साबित होते हैं, तो यह एक बड़ा जुर्म है जिसके लिए सेवा से बर्खास्तगी जैसी बड़ी सजा (Major Penalty) दी जा सकती है। हालांकि, कोर्ट ने संतुलन बनाते हुए हाई कोर्ट प्रशासन को इस विभागीय जांच को तीन महीने के भीतर पूरा करने की सख्त समयसीमा भी दी है। अदालत ने कहा, यदि किसी न्यायिक अधिकारी पर यह संगीन आरोप हो कि वह खुद अपने चैंबर में बैठी थीं और उनकी अनुपस्थिति में कोर्ट रूम के भीतर उनका पेशकार (कोर्ट क्लर्क) और सरकारी वकील गवाहियों को रिकॉर्ड कर रहे थे, तो यह अत्यंत गंभीर कदाचार (Serious Misconduct) है। ऐसे मामलों में जांच पूरी होने तक नियोक्ता (Employer) को अपने कर्मचारी को निलंबित रखने का पूरा कानूनी अधिकार है ताकि वह गवाहों और सबूतों को प्रभावित न कर सके।

मामला क्या है?: चैंबर में आराम फरमा रही थीं जज साहिबा, बाहर कोर्ट चला रहा था स्टाफ!

यह मामला सिक्किम न्यायपालिका की निलंबित न्यायिक अधिकारी बेबिका छेत्री (Bebika Chettri) से जुड़ा है।

सस्पेंशन और आरोप: बेबिका छेत्री को 13 जून (2026) को सिक्किम हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और जज-इन-चार्ज की फुल कोर्ट (जजों की कमी के कारण दो सदस्यीय) द्वारा निलंबित कर दिया गया था। उन पर आरोप है कि उन्होंने खुली अदालत (Open Court) में गवाही रिकॉर्ड किए जाने के दौरान अपने कर्तव्य का परित्याग किया और खुद कोर्ट रूम छोड़कर अपने पर्सनल चैंबर में चली गईं, जबकि बाहर उनका पेशकार और सरकारी वकील अदालती कार्यवाही का संचालन कर रहे थे।

गवाहों के बयान: हाई कोर्ट प्रशासन के अनुसार, स्थानीय वकीलों और कोर्ट स्टाफ सहित 10 से अधिक व्यक्तियों ने जज के इस आचरण के खिलाफ अपने प्रारंभिक बयान दर्ज कराए हैं।

CCTV फुटेज गायब होने का रहस्य: हाई कोर्ट रजिस्ट्री ने सीलबंद लिफाफे में प्रारंभिक सबूत पेश करते हुए एक और गंभीर घटना का खुलासा किया। रजिस्ट्री ने बताया कि जज के निलंबन के ठीक अगले संडे (रविवार) को उन्होंने कोर्ट परिसर का दौरा किया था, जिसके तुरंत बाद वहां का सीसीटीवी (CCTV) फुटेज रहस्यमय तरीके से डिलीट (इरेज़) हो गया।

निलंबित जज की दलीलें बनाम हाई कोर्ट का कड़ा रुख

निलंबित जज बेबिका छेत्री ने खुद को पूरी तरह निर्दोष बताते हुए अपनी तकनीकी सुरक्षा में कई दलीलें दीं।

जज की दलील: उनके वकील ने तर्क दिया कि केंद्रीय कानून और न्याय मंत्रालय के दिशानिर्देशों के अनुसार, बिना किसी औपचारिक शिकायत, शपथ पत्र (Affidavit) और सत्यापन योग्य सामग्री के किसी जज के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जा सकती। उन्होंने यह भी कहा कि निलंबन के समय उन्हें सारे सबूत नहीं सौंपे गए।

हाई कोर्ट का करारा जवाब: मुख्य न्यायाधीश ए. मोहम्मद मुश्ताक ने इन तकनीकी दलीलों को सिरे से खारिज कर दिया। कोर्ट ने साफ किया कि यह कार्रवाई किसी बाहरी तीसरे पक्ष (Third-Party) की शिकायत पर नहीं, बल्कि जज के आचरण को लेकर आंतरिक प्रशासनिक इनपुट के आधार पर की गई है। निलंबन के स्तर पर कर्मचारी को सारे सबूत सौंपना जरूरी नहीं है। जब एक बार औपचारिक आरोप पत्र (Charge Sheet) फ्रेम हो जाएगा, तब याचिकाकर्ता को सभी दस्तावेज पाने का कानूनी हक होगा।

कोर्ट का अंतिम आदेश: ‘तीन महीने की डेडलाइन’

हाई कोर्ट ने माना कि यदि आरोपी जज को इस स्तर पर बहाल (Reinstate) किया जाता है, तो स्थानीय वकीलों और कर्मचारियों में डर का माहौल बनेगा और वे निष्पक्ष गवाही नहीं दे पाएंगे। निलंबन को बरकरार रखते हुए अदालत ने यह ऐतिहासिक सुरक्षा उपाय दिए। पूरी अनुशासनात्मक जांच (Disciplinary Inquiry) को तीन महीने के भीतर हर हाल में समेटा जाए, बशर्ते याचिकाकर्ता जांच में पूरा सहयोग करें। यदि हाई कोर्ट प्रशासन इस दी गई अवधि (Three-Month Window) के भीतर जांच पूरी करने में विफल रहता है, तो अधिकारी को स्वतः ही सेवा में बहाल करना होगा।

केस शीट: सिक्किम हाई कोर्ट न्यायिक कदाचार एवं निलंबन समीक्षा (2026)

कानूनी और प्रशासनिक श्रेणियांउच्च न्यायालय की विधिक स्थिति और वर्तमान स्थिति
संबंधित अदालतसिक्किम उच्च न्यायालय (High Court of Sikkim)
माननीय न्यायाधीशमुख्य न्यायाधीश ए. मोहम्मद मुश्ताक (Chief Justice A Muhamed Mustaque)
याचिकाकर्ता (निलंबित जज)बेबिका छेत्री (Bebika Chettri)
निलंबन की तारीख13 जून 2026
मुख्य आरोपओपन कोर्ट छोड़कर चैंबर में बैठना; पेशकार द्वारा गवाही रिकॉर्ड कराना; संडे को कोर्ट आकर सीसीटीवी फुटेज गायब करने का संदेह।
अदालत का अंतिम निर्देशनिलंबन वैध; 3 महीने के भीतर जांच पूरी करने की सख्त समयसीमा तय।

हाईकोर्ट की सख्ती

सिक्किम हाई कोर्ट ने तकनीकी पेंचों को दरकिनार कर अपनी सहकर्मी के खिलाफ जो सख्त रुख अपनाया है, वह सराहनीय है। संडे के दिन कोर्ट आकर सीसीटीवी फुटेज का डिलीट हो जाना दाल में कुछ काला होने का साफ इशारा करता है। तीन महीने की डेडलाइन देकर कोर्ट ने यह भी सुनिश्चित कर दिया है कि न तो आरोपी के साथ अन्याय हो और न ही जांच में ढिलाई बरती जाए।

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